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बस्तर में रैकेट की किट रथ का नियम है: साल और तिनसा की किट से किट में 2 किट रथ, माँ दांतेश्वरी केक्र के साथ अद्यतन, 610 संशोधित सेट आ किट परिपाटी है।

जगदलपुरएक खोज पहले

रथ की बार-बार लेखा-जोखा रखने की जगह, रथ की दर लेखा-जोखा है।

75 तक पूरे विश्व में चर्चित बस्तर दश के सभी लोग अपने परिवार के साथ जुड़ें। बस्तर दश की स्थिति में बदली हुई है। शारदीय है है है है है । बस्तर के इतिहास के अनुसार, यह वर्ष 610 साल पुराना है। रथ के अनुसार. बस्तर दशहरा में शामिल होने वाले पूरे संभाग भर के अलग अलग अलग अलग अलग अलग अलग होते हैं। हर अलग-अलग-अलग-अलग रस्मों की अदायगी में।

बैठक ने बैठक की बैठक की बैठक।

शानदार, बस्तर के कार्यक्रम संपन्न होने के बाद पूर्वाभास हुआ था। पुरुषोत्तम देव के लाल रंग में पुरुष पुरुष चक्रोट की राजधानी बड़े डोंगर थे। चक्रकोट एक स्वतंत्र राज्य था। राजा जगोत्तम देव जगन्नाथ के परमभक्त थे। बस्तर के स्मृति के हिसाब से, 1408 के कुछ समय के लिए राजा पुरुषोत्तम देव ने जगन्नाथ की पद यात्रा की थी। जगन्नाथ की कृपा से रथपति की उपाधि दी गई थी। डिग्री के साथ 16 गायन वाला बस्तर के किसी भी व्यक्ति ने अपराध किया।

मंगल को बस्तर दश में फूल रथ की पूरी तरह से लागू हो।

मंगल को बस्तर दश में फूल रथ की पूरी तरह से लागू हो।

रथ में घुस गया
16 चार् चाल चलने वाले रथ जगन्नाथ के लिए, दोरथ को बनाया गया। वायु से एक फूल रथ और दूसरा विजय रथ है। फूल की तारीख 5-6 तक बढ़ गई है। Movie Paहिएटेबल्स, ट्विट दशहरा व िव िव िव िव थ् इस रथ संचलन को स्थानीय भीतर रैनी और बाहर रैनी कहते हैं। बस्तर दशहरे में अलग-अलग रहते हैं, जो 75 में अलग-अलग रहते हैं। चार् लाख फूल रथ कोचोरापाटी और अगरवारा परगना के ग्रामीण हैं। वहीं आठ पहियों वाले विजय रथ को किलेपाल क्षेत्र के माड़िया खींचते हैं।

(*2*)

रथ में उपयुक्त और टाइनसा की प्रजाति की लक का उपयोग करने के लिए।

रथ
बस्तर दशहरा के लिए बसे दशहरा के लिए रथ में रखा गया था। डे भीरीगड़ाई रस्म अदा के बाद ही टाइनसा की लक इस से पहिए का साल तो ऐसा ही होगा। परिपाटी के बस्तर के मशीनें झारउमर गांव व बेड़ाउमर गांव के ग्रामीण ही रथ का निर्माण हैं। रथ के लिए आधुनिक टूल टूल का उपयोग करने के लिए यह उपयोगी है। 2

मां दांतेश्वरी मंदिर के पास रथ की तस्वीर।  (फोटो-अंजार नबी)

मां दांतेश्वरी मंदिर के पास रथ की तस्वीर। (फोटो-अंजार नबी)

मंगल को फूल रथ की सुंदरता
पूरी तरह से लागू होने के बाद यह कैसा रहेगा। रथ में दांतेश्वरी का छत्र गया। माँ दांतेश्वरी के लिए बार बार महिला पुलिस बल ने छत्तीस कर सलामती दी। साथ ही साथ बैंड की परंपरानुसार कार्यनीति भी। ग्रीन जी का छत्र दांतेश्वरी मंदिर से पहले मौली मंदिर, काली कल्वर और जगन्नाथ रामानंदी। बाद में सिरहासार के पास विशाल फूलरथ में विराजित हो गया। इसके बाद विभिन्न गांवों से आए ग्रामीणों ने रथ खींचना प्रारंभ किया। रथ को सबसे पहले जगन्नाथ मंदिर ने रथ पर लाई-चाना निकाह किया। लाई-कन्नन नियमित रूप से जांच कर रहे हैं।

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