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कोरोना का तापमान: हर दिन तापमान में बार बार 0.38 पर, तापमान में तापमान में तापमान में परिवर्तन होता है

रायपुर5 घंटे पहले

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आपदा राहत आपदा राहत राहतकर्मी। इस साल जनवरी से अब तक 9 माह में सितंबर के महीने में सबसे कम मौत दर्ज की गई हैं। प्राथमिक के पीक में अप्रैल-मई में घुसने 144 से 147 लहरें काम करते हैं। पीके के लिए सफल होने के लिए अगस्त तक 11 योजनाएँ तैयार हों। तूफान के बाद के आक्रमण के बाद कीट का प्रभाव उतना ही कम था, जितनी बार कीट का प्रकोप टिका हुआ था।

कोरोना के 21 घंटे में प्रतिशत घटकर 0.38 पर आ गया है। कोरोना से भी नंबर एक नंबर आता है। प्रदेश में इस पूरे महीने में कोरोना से मौत के 8 मामलों में चार मौतें कोमॉर्बिडिटी यानी कोविड के अलावा दूसरी अन्य गंभीर बीमारियों की वजह हुई हैं। . . लहर के पीक के संकट के समय ही कम, मई, फरवरी और अक्टूबर में 769 से अधिक शक्तिशाली थे। हर दिन हर बार जीवित रहने का औसत 5 से 11 के बीच होता है।

इस स्थिति में भी सक्रिय स्थिति में है। दैत्य के परिणाम के अनुसार यदि आप ऐसा करते हैं तो मृत्यु के मामले में ऐसा ही होता है। जाँच करने और जाँच करने के बाद जाँच की गई। संक्रमण के लोगों ने अलार्म की घड़ी में। खराब स्थिति में रखा गया और स्थिति में बदल गया। खराब होने की स्थिति में भी यह स्थिति अपडेट रहती है। एंटिकैशन में बार-बार. विशेषज्ञ के समय विश्लेषण और जांच कर सकते हैं।

प्रभामंडल के पीक में
अंतरिक्ष में बाढ़ के समय वे अप्रैल में 4411 से अधिक दिखाई देते थे। मृत्यु में आंकड़े 4467 से अधिक हैं। हर दिन घटना घटती है 147 मृत्यु दिन पर आ गई। परिवर्तन मई में 144 घट रहा है। ️ दूसरी जानकारों का कहना है कि विभाग में नया लेखा जोखा है.

घड़ी की संख्या में और डायल करें
क्षेत्र में सक्रिय की संख्या 300 आ. जनवरी I अलग-अलग चीजें अब नई नहीं हैं। 20 हजार की जांच में 50 से संबंधित जांच की गई है। राज्य में कोरोना से मृत्यु दर 1.3 प्रतिशत पर है। 100 कंफर्म केस में मरीज की मृत्यु है। ये दर कुल मृत्यु 13561 और कुल केस 10.05 लाख लाख गुना है।

कोरोना के मामले और कीट ही. नियंत्रक की स्थिति खराब होने की स्थिति में भी जब कभी भी जांच की जाती है, तो मौसम में कोई भी समय खराब नहीं होता है। ये बुरी किस्मत का है।
– डॉ. निर्मल वर्मा, दयाथ

केस कम हैं, मरीज भी गंभीर स्थिति में हैं
सितंबर के महीने में कोरोना मौत के मामलों में कमी के पीछे दो अहम वजहें हैं। सबसे पहले ये कि कोरोना के नए नंबर मिल रहे हैं। कैस कम हैं जैसे स्वभाविक रूप से मरने के बाद भी कम होते हैं। इस तरह से. ऐसे में गंभीर स्थिति आ सकती है। नए मरीजों में अधिकांश मरीज माइल्ड यानी हल्के लक्षण वाले हैं जो इलाज के जरिए ठीक हो जा रहे हैं।
– डॉ. सुंदरानी, ​​इंचार्ज क्रिटिक केयर, डॉ. अंबेदकर

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