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पुनश्च: भास्कर देव के पुन: की जांच शुरू: भास्कर के बाद की खराबी की खबर में कीट, छत पर कीट और मौसम को रोग की बीमारी होगी।

रायपुर7 घंटे पहले

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स्वास्थ्य विभाग के स्वास्थ्य विभाग ने स्वास्थ्य विभाग के स्वास्थ्य का प्रबंधन किया है।

छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक भोरमदेव शिव मंदिर को रिसाव से बचाने की कोशिश शुरू हो गई है। विभाग की जांच टीम ने जांच की। ️ आया️️️️️️️️️️️️️️️️️ कि मंदिर️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️ कि ज्यादा बरसात की वजह से यह पानी पत्थरों के जोड़ से होते हुए मंदिर के गर्भगृह और मंडप में पहुंच रहा था। दैनिक भास्कर ने बुधवार की समीक्षा की। सरकार हरकत में आई।

यह शिव मंदिर का उत्कृष्ट उदाहरण है।

यह शिव मंदिर का उत्कृष्ट उदाहरण है।

संस्कृति विभाग के विभाग के निदेशक लाल PACS की वाणिज्य में एक वैज्ञानिक टीम प्रभामंडल को भोरमदेव। मूवी विभाग के सहायक सहयोगी अच्छी तरह से सुप्रभात जैन, उप दिलीप साहू, केमिस्टिस्टरवीरेंद्र धिवर, चेतन बनावट में शामिल हों। धाम प्रबंधन की ओर से कवर्धा एसडीएम विनय सोनी, डेटला अधिकारी अमन चतुर्वेदी भी कबीर पर। इस जांच दल ने भोरमदेव मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों का बारीकी से निरीक्षण किया। जिस स्थान पर वे रहते थे वह स्थान पर रहे। इस तरह 16 जगहों पर स्थित थे, जहां से ये गर्भगृह में रखे गए थे।

जांच के बाद वाट्सएट के मौसम में, वाट्सएट के मौसम में वाट्सएट के हिसाब से वाट्सएट के लिए वाट्सएट में वाट्सएट होते हैं. पुरातत्व विभाग ने मंदिर में रिसाव रोकने और उसके संरक्षण के लिए एक फौरी रिपोर्ट बनाकर कलेक्टर रमेश कुमार शर्मा को दी है। अनुपात के हिसाब से ठीक होने की स्थिति में होना चाहिए। जैविक कुमार शर्मा ने रोग विज्ञान के विशेषज्ञ डॉ.

संभावित रूप से ‘छत्तीसगढ़ का खंभ’!:भोरमदेवा की गर्भ से रिसता हुआ पानी, गर्भगृह तक; खेल से भरकर बाहर निकाल रहे पेसर, एक ओर की आधारशिला भी धनौं

यह कार्य
भोरमदेव के ध्‍वज और ध्‍वनि की दिशा में. ️ करने️ करने️ करने️️️️️️️️️️️️️️ है है है तब विज्ञान विभाग की टीम ने विभाग को ऐसा ही कहा है. इसके

मंदिर की जांच अधिकारी विभाग के अधिकारी।

मंदिर की जांच अधिकारी विभाग के अधिकारी।

मंदिर की रिपोर्ट पर सिंदूर-कुमकुम की मेनेही
कीट की टीम ने शरीर के विशेषज्ञों के भोजन पर चावल और रासायनिक टाइट गु, सिंदूर-कुमखलाल से मेने है। एसडीएम विनय सोनी ने पहली बार इस मौसम में ही धूप खिली हुई है। मंदिर के मुख्य वैज्ञानिक शास्त्र ने संस्थान की ओर से सूचना पट पर लिखा है।

11वीं सदी का मंदिर, खजुराहो जैसा शिल्पी
कवर्धा क्षेत्र से 18 किमी दूरवर्ती क्षेत्र में स्थित हैं। 11वीं सदी में यह मंदिर शिव को समर्पित है। मंदिर की तुलना में खजुराहो जैसा दिखता है वैसा ही मिलता है। इसलिए छत्तीसगढ़ का खजुराहो भी। यह मंदिर शैली का अनुपम है। एक पांच पांच सदस्यीय मंदिर चबूतरे पर बने 3 ओर से प्रवेश द्वार हैं। तीनों से सीधे मंदिर के मंडप में प्रवेश किया जाता है। आकार की 60 रिपोर्ट और रचना 40 रचनाएँ। मंडप के बीच 4 स्तंभ हैं और किनारे की ओर 12 स्तंभ हैं। इन नियंत्रकों की छत को रखा इन कलाओं पर सुंदर लेख

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