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हौसले से जीत रही जिंदगी: जिस उम्र में लोग रिटायरमेंट ले लेते हैं, उसमें कोरोना ड्यूटी कर रहे हैं 61 साल के जनपद पंचायत के सीईओ डीपी पटेल; बोले- किसी का गति नहीं, सेवा नैतिक धर्म

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  • छत्तीसगढ़ जिले के सीईओ डीपी पटेल ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में संक्रामक कोरोना रोगों के खिलाफ सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाई

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दंतेवाड़ाएक घंटा पहले

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उम्र महज नंबर गेम है। यह सच साबित कर रहे हैं छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में जनपद सीईओ डीपी पटेल। कोरोना काल में जब अपनों ने भी हाथ छोड़ दिया है। ऐसे में 61 साल की उम्र में वह रोजाना 10 घंटे ड्यूटी करते हैं। इस दौरान केंद्र पर गो वैक्सीनेशन की स्थिति संभालते हैं, तो नक्सल प्रभावित गांवों में संक्रमण के खिलाफ जागरूकता भी फैलाते हैं। सीईओ पटेल कहते हैं कि काम को लेकर उन पर किसी का दबाव नहीं है। बस जनता की सेवा उनका नैतिक धर्म है।

गीदम जनपद पंचायत के सीईओ डीपी पटेल का रिटायरमेंट करीब है। उनके ऊपर 30 से ज्यादा पंचायतों की जिम्मेदारी है। इनमें कई नक्सल प्रभावित गांव भी शामिल हैं। अपनी ड्यूटी को पूरी करने के लिए रोज सुबह 9 बजे घर से निकलते हैं। इसके बाद वैक्सीनेशन सेंटर पहुंचते हैं। वैक्सीन लगवा रहे लोगों को संक्रमण से लड़ने के तरीके बताते हैं। फिर शुरू होता है गांव-गांव में जाने का सफर। कोरोना की लड़ाई में पिछड़ते ग्रामीणों को जागरूक करते हैं। फिर घर लौटकर आइसोलेट हो जाते हैं।

4 बार टाइफाइड हुआ, ब्लड प्रेशर और डायबिटिज भी, हिम्मत नहीं हारी
सीईओ डीपी पटेल के लिए वर्ष 2020 सबसे खराब समय था। इस दौरान जहां हर कोई कोरोना से लड़ रहा था। लॉकडाउन लगा था। ऐसे में वह 4 बाद टाइफाइड का शिकार हुआ। अस्पताल में भर्ती हुई और कई दिनों तक उपचार चलता रहा। उन्हें डायबिटीज और ब्लड प्रेशर की भी समस्या है, लेकिन उन्होंने कभी भी हिम्मत नहीं हारी। बीमारी से लड़कर फिर ड्यूटी के मैदान में लौट आए। अब एक बार फिर कोरोना संक्रमण से लड़ने के लिए अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

बच्चे कहते हैं- आप पर गर्व है, पापा अपना ख्याल रखते हैं
सीईओ डीपी पटेल का परिवार जगदलपुर सहित अन्य जिलों में रहता है। यहां गीदम के सरकारी क्वार्टर में वह अकेली रहती हैं। संक्रमण के बीच में दिन भर की थका देने वाली ड्यूटी के बाद जब घर लौटते हैं तो सबसे पहले खुद को सैनिटरीज़ करते हैं। फिर स्नान के बाद परिवार के सदस्यों से फोन पर शाम को बात होती है। परिवार के सदस्य जहां उनका हालचाल पूछते हैं। वहीं उनके बच्चे कहते हैं, पापा आप पर गर्व है। बस अपना ही रखना।

ड्यूटी करने के लिए बड़े अधिकारियों का कोई दबाव नहीं है। अपनी स्वेच्छा से अपनी ड्यूटी कर रहे हैं। मैंने खुद के लिए जीवन जी ली है। अब पर्स्रो के लिए जी रहा हूं। जब तक शरीर साथ देगा तब तक लोगों की सेवा करता रहेगा।
– डीपी पटेल, जनपद सीईओ, गीदम, दंतेवाड़ा

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