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धान पर सियासी घमासान: बारिश से धान भीगा, पूर्व मंत्री चंद्राकर बोले- ये सरकार के कुप्रबंध का नतीजा; मंत्री चौबे का जवाब- केंद्र सरकार की वजह से बने ये हालात

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रायपुर19 मिनट पहले

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फोटो रायपुर जिले की एक धान सोसायटी की है, खुले में रखी धान की बारियां भीग गईं।

बेमौसम बरसात ने भले ही फिजाओं में ठंडी हवा घोली हो लेकिन प्रदेश का सियासी मौसम गरमा रहा है। बारिश की वजह से प्रदेश के कई हिस्सों में धान सोसायटी में खुले में रखे धान भीग चूका है। इस मामले में पूर्व मंत्री और कुरुद से भाजपा के विधायक अजय चंद्राकर ने कुछ फोटोज सोशल मीडिया पर शेयर कीं और लिखा, ‘असमय बारिश से लोक संपत्ति (धान) के रख-रखाव और कु-प्रबंधन का एक छोटा-सा उदाहरण, (अइसे गढ़बो नव छत्तीसगढ़)। ‘

केंद्र सरकार जिम्मेदार
जवाब में मंत्री रवेंद्र चौबे ने दैनिक भास्कर को बताया कि 4 दिन पहले ही जब मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की थी तो सभी केंद्रों में धान को ढांकने का बंदोबस्त किया गया था। कितने धान भीगा ये पूछने पर मंत्री ने कहा कि अब इसका आंकलन किया जा रहा है। सभी जिलों में बारिश की अलग स्थिति है। केंद्र सरकार ने 60 लाख टन टन धान खरीदने का वादा किया था, लेकिन खरीद नहीं की गई। इस कारण से प्रदेश में धान बचा। अगर केंद्र अपना प्रोम प्लेटी तो ये स्थिति नहीं बनती। हमने उपाय के तौर पर लगभग 10 लाख और टन धान नीलाम किया है। ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है, हर जिले के कलेक्टर नुकसान का आंकलन करने कहा गया है, किसानों को फसलों के नुकसान का उचित मुआवजा भी मिलेगा।

आंबेडकर कार्रवाई कार्रवाई हो
पूर्व कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने सोमवार को अपने बयान में कहा कि बारिश से करोड़ों के धान के नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि सही व्यवस्थाजाम न होने की वजह से प्रदेश में पिछले साल भी कई टन धान सड़ गए थे, इस साल भी बारिश में धान भीगा है। इसके जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए और प्रभावित किसानों को मुआवजा मिलना चाहिए। दूसरा पक्ष मंगलवार को ही मुख्यमंत्री प्रदेश के हर जिले के कलेक्टर से बारिश की वजह से नुकसान का आंकलन करने को कहा है।

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