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कविता एंट बॉडी वाली: कोरोना में लोगों की उदासी दूर करने वाले हास्य कवि सुरेंद्र दुबे ने लिखी कविता, बोले- लोग कद्दू की तरह फूल रहे, स्कूल बंद और बच्चों के पैरेंट्स के सिर पर झुल रहे

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रायपुरएक घंटा पहले

छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध हास्य कवि ने अपनी पंक्तियों के माध्यम से लोगों को खुश करने की कोशिश की है। उन्होंने एक कविता कोरोना की वजह से बने उदासी के माहौल को दूर करने के लिए लिखी है। डॉ दुबे ने कहा कि लोगों में इस तहर से डर, घर कर गया है कि वह डर भी उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता पर बुरा असर डाल रहा है। डॉक्टर्स के पास लोग चेकअप के लिए जाते हैं तो वह कहते हैं, डरना या घबराना नहीं है। इसलिए इस टेंशन भरे माहौल में हंसाना और हंसाना जरूरी है।

डॉ। दुबे की रचना
हम हंसते हैं लोग को हंसाते हैं
इम्यूनिटी बढ़ाते जा रहे हैं।
घिसे-पिटे चुटकलों में भी हंसो
कोरोना के आंकड़ों में मत फंसो
नदी के बाढ़ का धीरे-धीरे पानी घटता चला जाता है
कुत्तों को भौंकने के लिए आदमी नहीं मिल रहा है
थोंस को चोरी करते हुए खाली घर नहीं मिल रहा
सुबह-शाम टहलने वाले अब कद्दू की तरह फूल रहे
स्कूल बंद हैं बच्चे मां-बाप के सिर पर झुल रहे हैं
दूध बादाम मुन्नक्का विटामिन सी खाओ
कोरोना का दुखद नया मत सुनाओ
अब भी लंबी तीसरी लहर में संभल जाओ
हंसो-हंसाओ और एंटी बॉडी मेक

जन्मदिन के कम मौत की खबरें ज्यादा हैं
दैनिक भास्कर से कवि डॉ। सुरेंद्र दुबे ने कहा कि कोरोना के इस माहौल में आम आदमी के अंदर से डर गया है। सोशल मीडिया जन्म दिवस की बजाए निधन के समाचार हैं। इस कारण से अब हाल ये है कि सामान्य सा सिर दर्द, बुखार, थकान हो तो आदमी यही सोचता जाता है कि कहीं कोरोना तो हो गया है। जबकि इस वायरस के सामने आने के पहले ये सब आम था। इस डर की वजह से आदमी डिप्रेशन में रहा है। मेरा मनना है कि हमें डरना नहीं रहना चाहिए। सावधानी बनीकर मुख, खोज, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें।

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