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तेंदूपत्ता बोनस पर राज्यपाल और वन मंत्री आमने-सामने: राज्यपाल ने कहा कि लक्ष्य से आधा भी नहीं, बिचौलियों को बेची; अकबर बोले इमली में 50 करोड़ ज्यादा कमाए, 300% घटे

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रायपुर9 मिनट पहले

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कोरोना के बावजूद वनोपज संग्रहण वटन में छत्तीसगढ़ देश में शीर्ष पर चल रहा है। प्रदेश के वन मंत्री मोहम्मद अकबर इमली और वनोपज से आय गिना रहे हैं, वहीं राज्यपाल इंदैया उइके उन्हें पत्र लिखकर वनोपज राष्ट्रहकों को पिछले बका पैसे देने को कह रहे हैं।

राज्यपाल के अनुसार, इमली निर्धारित लक्ष्य की 50 प्रतिशत भी नहीं गई है। सीजन शेष रहने के बावजूद बंद कर दिया गया। इस कारण से संगाहकों को कम मूल्य पर इमली बिचौलियों को बेचनी पड़ी। उइके ने नामांकितरों पर कार्रवाई कर वन मंत्री से रिपोर्ट मांगी है। उइके ने वनमंत्री को पत्र लिखकर लघु वनोपजों के संगाहकों की कठिनाईयों को दूर करने कहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में लघु वनोपजों के संग्रहण का मौसम चल रहा है। प्रदेश में पाँचवीं अनुसूची में शामिल बहुत से जिले इस काम में लगे हुए हैं। खाद्य ग्रेड महुआ 4000 क्विंटल का लक्ष्य था। इसके खिलाफ बहुत कम की गई। इससे करोड़ों रुपए का संयंत्र जो राजनांदगांव में बंद पड़ा है। पिछले सीजन में तेंदूपत्ता की प्राप्ति घोषित से कम की गई है। संग्राहकों को करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ।

इधर, वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने बताया कि वर्ष 2020 और 2021 में विभाजित लाभांश और लाक डाउन के बावजूद महिला स्व-सहायता समूहों व ग्रामीणों ने इमली एकत्रित दुगनी वृद्धि हुई है। संग्राहकों को इमली संग्रहण के साथ उसकेिब से बहुत अधिक कमाई हुई है। राज्य में संग्रह वर्ष 2020 में महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा संगाहकों से 67 हजार 552 क्विंटल इमली की प्राप्ति हुई, जिसका मूल्य 20 करोड़ 99 लाख रुपए था। जबकि इस वर्ष 71 करोड़ 36 लाख रुपए की 1 लाख 92 हजार 582 क्विंटल इमली की प्राप्ति हुई।

गत वर्ष की तुलना में संगाहकों को 50 करोड़ 37 लाख रुपए की अतिरिक्त आय हुई है। प्राप्ति में 300 प्रतिशत की वृद्धि हुई। बस से भी संगहकों की आजीविका में वृद्धि हुई है। पिछले वर्ष जिला संघ जगदलपुर, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, द। कोंडागांव और केशकाल द्वारा अच्छा प्रदर्शन किया गया था। इस वर्ष जगदलपुर, कोंडागांव, बीजापुर, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, सुकमा और केशकाल में अच्छा प्रदर्शन किया गया है। एटी इमली की क्रय दर 31 रु। प्रतिरूप से उठकर दौड़। 36 प्रतिरूप की गई। इसी प्रकार के फूल इमली 63 रु। प्रति किलो को बढ़ाकर 69 प्रति किलो की गई। इमलीबेन में जगदलपुर, दंतेवाड़ा, कोंडागांव ने अच्छा प्रदर्शन किया था।

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