Harshit India news

breaking news | Bhopal local news | Madhya Pradesh news | Indore news

भास्कर ग्राउंड राउंड रिपोर्ट: RT-PCR की निगेटिव रिपोर्ट पर ही एंट्री, पर लक्षण दिखे तो होने देंगे ख़त्म; आंध्र प्रदेश में कोरोना का नया वैरिएंट मिलने के बाद सड़क से जंगल तक नजर

  • हिंदी समाचार
  • स्थानीय
  • छत्तीसगढ
  • आंध्र प्रदेश कोरोनावायरस न्यू स्ट्रेन; भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ सरकार अलर्ट पर, आरटी पीसीआर नकारात्मक रिपोर्ट पर ही एंट्री

विज्ञापन से परेशान हैं? बिना विज्ञापन खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

जगदलपुर22 मिनट पहलेलेखक: लोकेश शर्मा

  • कॉपी लिस्ट

पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश में कोरोना का नया वैरियंट मिलने के बाद बस्तर के बीजापुर और सुकमा जिले में दर्शन कर लिया गया है।

पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश में कोरोना का नया वैरिएंट मिलने के बाद छत्तीसगढ़ सरकार की समीक्षा पर है। बस्तर के बीजापुर और सुकमा जिले की सीमाएँ आंध्र प्रदेश से मिलती हैं। ऐसे में यहाँ पर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। प्रदेश में प्रवेश करने से पहले 72 घंटे की RT-PCR की निगेटिव रिपोर्ट होना आवश्यक है। इसके बाद भी अगर लक्षण दिखाई दिए तो तबोलेट होना पड़ेगा। प्रशासन की इन तैयारियों को लेकर दैनिक भास्कर ने ग्राउंड रिपोर्ट की।

बीजापुर के तिमेड और तारलागुड़ा में 3 राज्यों से लगता है कि सीमा है
बीजापुर जिले से आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र राज्यों की सीमा लगती है। यहां पर केवल प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। इसके नक्सल प्रभावित क्षेत्र तिमेड और तारलागुड़ा में चेकपोस्ट बनाया गया है। तिमेद में महाराष्ट्र की ओर से, तो तारलगुड़ा में आंध्रप्रदेश और तेलंगाना से लोग छत्तीसगढ़ में प्रवेश कर रहे हैं। तीनों चेकपोस्ट हाईवे पर है। यहां से गुजरने वाले हर व्यक्ति की जांच की जा रही है। गांव जाने देने से पहले उन्हें आइसोलेट किया जा रहा है।

बीजापुर के नक्सल प्रभावित क्षेत्र तिमेड और तारलागुड़ा में चेकपोस्ट बनाया गया है।  तिमेद में महाराष्ट्र की ओर से, तो तारलगुड़ा में आंध्रप्रदेश और तेलंगाना से लोग छतीसगढ़ में प्रवेश कर रहे हैं।

बीजापुर के नक्सल प्रभावित क्षेत्र तिमेड और तारलागुड़ा में चेकपोस्ट बनाया गया है। तिमेद में महाराष्ट्र की ओर से, तो तारलगुड़ा में आंध्रप्रदेश और तेलंगाना से लोग छत्तीसगढ़ में प्रवेश कर रहे हैं।

मुख्य मार्ग से ज्यादा जंगल और ग्रामीण अंचलों में दृष्टिकोण है
बीजापुर कलेक्टर रितेश अग्रवाल ने बताया कि आंध्रप्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र से ज्यादातर लोग जंगले के रास्ते से होकर ही जिले में प्रवेश करते हैं। पिछली बार भी ऐसा ही हुआ था। इस बार गांवों की सीमा में भी टीम तैयार है। ग्रामीणों को भी जागरूक किया जा रहा है कि, गांव में आने वाले व्यक्ति की जानकारी दें। तेलंगाना के चेरला गांव से पामिंग बेहद नजदीक है। वहीं बेदरे की सीमा महराष्ट्र से शुरू हुई है। दोनों ही क्षेत्र नक्सल प्रभावित हैं। ग्रामीण ज्यादातर इन्हीं रास्तों का इस्तेमाल करते हैं।

सुकमा कलेक्टर चेकपोस्ट से निकलने वाले लोगों से पूछ रहे हैं- कहां जा रहे हो भाई
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की सीमा से लगा दक्षिण बस्तर का दूसरा जिला सुकमा है। यहां भी हाइवे पर चेकपोस्ट बनाया गया है। कर्मचारियों के साथ खुद सुकमा कलेक्टर विनीत नंदनवार भी मौजूद रहे। कोंटा के चेकपोस्ट से गुजर रहे लोगों से कलेक्टर ने पूछ रहे हैं कि कहां जा रहे हो भाई। सारी जानकारी स्पष्ट होने के बाद ही उसे एंट्री दी जा रही है। अगर किसी के पास निगेटिव रिपोर्ट है और लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो उसे आइसोलेट किया जा रहा है।

सुकमा कलेक्टर विनीत नंदनवार कोंटा हाईवे पर बनाई गई चेकपोस्ट पर खुद मौजूद रहे।  इस दौरान वहां से निकल रहे लोगों से वह खुद भी जानकारी ले रहे थे।

सुकमा कलेक्टर विनीत नंदनवार कोंटा हाईवे पर बनाई गई चेकपोस्ट पर खुद मौजूद रहे। इस दौरान वहां से निकल रहे लोगों से वह खुद भी जानकारी ले रहे थे।

40 हजार से ज्यादा ग्रामीण मिर्ची तोड़ने वाले आंध्र प्रदेश हैं
दक्षिण बस्तर के सुकमा, बीजापुर और दंतेवाड़ा जिलों के लगभग 40 हजार से ज्यादा ग्रामीण मजदूरी के लिए मिर्ची तोड़ने आंध्र प्रदेश जाते हैं। वर्ष 2020 में कोरोना ने देश में दस्तक दी थी और लॉकडाउन लगा, उस समय भी बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने वापसी की। इनमें से ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्रों व नक्सलगढ़ क्षेत्रों के थे। कुछ महीने पूर्व ग्रामीण फिर मिर्ची तोड़ने आंध्रप्रदेश गए थे। अब एक बार फिर कोरोना के नए वैरिएंट का पता चलने के बाद आंध्र प्रदेश से उनके शरण गांवों में हो रही है।

मौजूदा तनाव से बहुत खतरनाक है
सेंटर फॉर सेल्यूलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (CCMB) के वैज्ञानिकों का दावा है कि भारत में मौजूदा स्ट्रेन के मुकाबले नए वैरिएंट 15 गुना ज्यादा खतरनाक है। चिंता की बात ये है कि यह वैरिएंट अच्छी इम्यूनिटी वाले लोगों को भी चपेट में ले रहा है। नए वैरिएंट से अस्थिर होने वाले रोगी 3-4 दिनों में हाइपोक्सिया या डिस्पानिया के शिकार हो जाते हैं। इस स्थिति में सांस रोगी के फेफड़े तक पहुंचना बंद हो जाता है। सही समय पर इलाज और ऑक्सीजन सपोर्ट नहीं मिलना पर मरीज की मौत हो जाती है।

दक्षिण बस्तर के सुकमा, बीजापुर और दंतेवाड़ा जिलों के लगभग 40 हजार से ज्यादा ग्रामीण मजदूरी के लिए मिर्ची तोड़ने आंध्र प्रदेश जाते हैं।

दक्षिण बस्तर के सुकमा, बीजापुर और दंतेवाड़ा जिलों के लगभग 40 हजार से ज्यादा ग्रामीण मजदूरी के लिए मिर्ची तोड़ने आंध्र प्रदेश जाते हैं।

कुरनूल में हुई पहचान, इसके बाद तेजी से फैला
‘द हिंदू’ की रिपोर्ट के मुताबिक, यह वायरस आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम सहित अन्य हिस्सों में फैल रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि सबसे पहले इस तनाव की पहचान आंध्र प्रदेश के कुरनूल में हुई थी। दक्षिण भारत में अब तक कोरोना के 5 वैरिएंट मिल चुके हैं। आंध्र प्रदेश में मिला कोरोनावायरस का नया तनाव एपी स्ट्रैन आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना में काफी तेजी से फैल रहा है। इसका असर महाराष्ट्र में भी देखा जा रहा है।

खबरें और भी हैं …

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

%d bloggers like this: