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सिस्टम से फिर से गई जिंदगी: बिलासपुर में जिला अस्पताल के दरवाजे पर डेढ़ घंटे तड़पती रही महिला; पहले तो गार्ड ने गेट नहीं खोला, जब डॉ पहुंचे तो मौत हो गई थी

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बिलपुर7 मिनट पहले

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श्यामा बाई के पुत्र धीरज मानिकपुरी ने कहा, पता है कि कोरोना संक्रमण के कारण बहुत कठिनाई होती है। माँ की गोद देखनी चाहिए थी। वह सीरियस थे। कुछ गाइड करते हैं, हम ही बताते हैं कि क्या करते हैं। बिस्तर नहीं था तो कहीं और ले जाने के लिए कहता है।

छत्तीसगढ़ में फिर एक जीवन प्रणाली के सामने हार गई। बिलासपुर के जिला अस्पताल (कोविद अस्पताल) के दरवाजे पर महिला डेढ़ घंटे तक तड़पती रही। पहले तो गार्ड ने गेट ही नहीं खोला। परिजनों के एसडीएम से बात करने के बाद किसी तरह गेट खुला। इसके बाद एएरेंस अंदर चली गई, लेकिन महिला को भर्ती कराने के लिए कोई नीचे ही नहीं आया। पत्रकारों ने कॉल किया तो डॉक्टर नीचे आ गए, लेकिन तब तक महिला की मौत हो चुकी थी।

सहा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में महिला में को विभाजित के लक्षण देखने वाले डॉक्टरों ने उन्हें जिला अस्पताल ले जाने की सलाह दी।

सहा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में महिला में को विभाजित के लक्षण देखने वाले डॉक्टरों ने उन्हें जिला अस्पताल ले जाने की सलाह दी।

दरअसल, माशा के गांव म्योराभाठा निवासी मां बाई (55) की तबीयत बुधवार को अचानक बिगड़ गई। परिजन उन्हें लेकर राधा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गए थे। वहां महिला में कोविड के लक्षण देख डॉक्टरों ने उन्हें जिला अस्पताल ले जाने की सलाह दी। एरणेंस से परिजन श्यामा बाई को विभाजित अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन गार्ड ने गेट ही नहीं खोला। लगभग आधे घंटे तक यह सब चलता रहता है। इसके बाद उनके बड़े बेटे ने एसडीएम को कॉल किया।

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एसडीएम के निर्देश पर अस्पताल प्रबंधन ने गेट खोल दिया
एसडीएम कार्यालय से अस्पताल को निर्देश मिलने के बाद गार्ड ने गेट खोला और ऊपर बनाए गए कोविड वार्ड में सूचना दी। इसके बाद लगभग एक घंटे तक अंदर के दरवाजों पर एर्केन खड़ी रही, लेकिन कोई भी मरीज को लेने के लिए नहीं आया। अंदर महिला दर्द से तड़प रही थी। पत्रकारों के बीच यह जानकारी मिलने पर अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ। अनिल गुप्ता को सूचना दी। वह स्टाफ के साथ नीचे आया, लेकिन तब तक महिला की मौत हो चुकी थी।

एसडीएम कार्यालय से अस्पताल को निर्देश मिलने के बाद गार्ड ने गेट खोला और ऊपर बनाए गए कोविड वार्ड में सूचना दी।  इसके बाद लगभग एक घंटे तक अंदर के दरवाजों पर एर्केन खड़ी रही, लेकिन कोई भी मरीज को लेने के लिए नहीं आया।

एसडीएम कार्यालय से अस्पताल को निर्देश मिलने के बाद गार्ड ने गेट खोला और ऊपर बनाए गए कोविड वार्ड में सूचना दी। इसके बाद लगभग एक घंटे तक अंदर के दरवाजों पर एर्केन खड़ी रही, लेकिन कोई भी मरीज को लेने के लिए नहीं आया।

बेटा बोला- पता है कोरोना के कारण मुश्किलें हैं, लेकिन गाइड तो करते हैं
वहीं श्यामा बाई के बेटे धीरज मानिकपुरी ने बताया कि उनकी मां एकर्न्स के अंदर ही तड़पती रह गई, लेकिन अस्पताल का कोई स्टाफ मदद के लिए नहीं आया। उन्होंने कहा कि पता है कि कोरोना संक्रमण के कारण बहुत समस्या है। बिस्तर नहीं हैं, डॉक्टर, रोगी, स्वास्थ्यकर्मी सब परेशान है, लेकिन माँ की रीढ़ देखना चाहिए था। वह सीरियस थे। कुछ गाइड करते हैं, हम ही बताते हैं कि क्या करते हैं। बिस्तर नहीं था तो कहीं और ले जाने के लिए कहता है।

डॉ।  गुप्ता बोले- ऊपर बिस्तर खाली नहीं था।  क्रिटिकल रोगी के लिए हाउसकीपिंग स्टाफ तैयारी कर रहा था।  सीरियस मरीज को गेट पर लाकर खड़े हो जाएंगे तो उनकी गलती है।

डॉ। गुप्ता बोले- ऊपर बिस्तर खाली नहीं था। क्रिटिकल रोगी के लिए हाउसकीपिंग स्टाफ तैयारी कर रहा था। सीरियस मरीज को गेट पर लाकर खड़े हो जाएंगे तो उनकी गलती है।

डॉ। बोले- मुझे कोई जानकारी नहीं है कि मरीज कब आया
गार्ड की ओर से ऊपर अस्पताल स्टाफ को सूचना दी जाती है। कहां दिक्कत हुई यह जांच का विषय है। मुझे कोई जानकारी नहीं है कि रोगी कब लाया गया है। से सूचना मिली तो 10 मिनट में पहुंच गए, पर उनकी मौत हो गई। सुपरवाइजर को भी पता नहीं था कि कोई गंभीर रोगी लाया जा रहा है। नियमानुसार, सीएचसी और पीएचसी को रोगी भेजते समय सूचना देनी चाहिए थी। ऊपर बिस्तर खाली नहीं था। क्रिटिकल रोगी के लिए हाउसकीपिंग स्टाफ तैयारी कर रहा था। सीरियस मरीज को गेट पर लाकर खड़े हो जाएंगे तो उनकी गलती है।
– डॉ। अनिल गुप्ता, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल, बिलपुर

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