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कोरोनाकैनीकरण: आल्हा के भाव मे कोरोना वैक्सीन का जागरूकता छत्तीसगढ़ी गीत, लोगो को वैक्सीन संदेश पाने का संदेश

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बालोद12 मिनट पहले

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चिटौद गांव के जितेंद्र साहू ने कोरोना वैक्सीन को लेकर छत्तीसगढ़ी गीत को आल्हा लोक अभिव्यक्ति के रूप में सुना है।

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में चितौड गांव के रहने वाले जितेंद्र साहू ने छत्तीसगढ़ी गीत को आल्हा के भाव से फेंक दिया है। उनकी बेटी आकांक्षा साहू ने माइक पर साथ दिया है। यह गीत लोगों को कोरोना की वैक्सीनेशन लगाने की जागरुकता को लेकर है, जो बहुत सराहा जा रहा है।
आस-पास के गांव में इस गीत की धूम
बालोद जिले के चिटौड गांव के जितेंद्र साहू के गीत को लेकर खूब चर्चा हो रही है। जहां एक ओर कोरोना संक्रमण की तोड़ वैज्ञानिकों ने तो हटा ली है। लेकिन आज भी लोगों में जागरूकता के अभाव में कोरोना संक्रमण को बढ़ावा दे रहा है। जहां एक ओर शासन-प्रशासन कोरोना वैक्सीन लगाने वाले कई प्रकार के जागरूकता अभियान चला रहा है, तो वहीं दूसरी ओर लोक कलाकार व लोक मंच सोनहा के संचालक जितेंद्र साहू और उनकी बेटी आकांक्षा साहू ने आल्हा भाव में कोरोना विषकनन को लेकर जागरूकता गीत तैयार किया है। । जितेंद्र साहू ने बताया कि उनकी पत्नी गांव में मितानिन का काम करती है। और वह गांव में वैक्सीन लगाने के लिए लोगो को बताती है। लेकिन अभी भी कई तरह की अफवाहें गांवों में वैक्सीनेशन को लेकर फैली हुई है, तो मैंने सोचा कि क्यों न वैक्सीनेशन की जागरूकताुकता को लेकर एक कविता लिखी जाए, और फिर भाग जाए। इस विचार को हमने छत्तीसगढ़ी भाषा में गीत लिखकर और आल्हा की लोक धुन पर चलना है। इसमें मेरी बेटी आकांक्षा साहू ने पहली बार माइक पर मेरा साथ दिया है। गीत के बोल इस प्रकार से है।
जिनगी हे अनमोल संगी
नोहे लम्बर संधि कहत हव,
बात मोर पतियावाव,
भड़काउनी मे तुम झन आवव,
कोरोना केकै लगावव,
जिनगी हे अनमोल संगी,
गाँव में संगीत की शिक्षा
चिटौद गांव के रहने वाले जितेंद्र साहू संगीत की शिक्षा छात्रों को निशुल्क दे रहा है। उन्होने बताया कि उनके वहाँ से संगीत की शिक्षा पाकर आगे कई छात्रों ने अपना नाम रौशन किया है। संगीत की कक्षा में तबला, हारमोनियम, ऑर्गन, बांसुरी वादन के लिए स्वयं व अपने कला परिवार के सिद्धहस्त प्रतिभाओं को अपने गांव के बच्चों के साथ जोड़कर, अनुभव बांटते है।

बालोद जिले के चिटौद गांव में संगीत की कक्षा में तबला, हारमोनियम, ऑर्गन की शिक्षा जारी है।

बालोद जिले के चिटौद गांव में संगीत की कक्षा में तबला, हारमोनियम, ऑर्गन की शिक्षा जारी है।

क्या है आल्हा गायन
आल्हा वीर रस की गाथा है। बारहवीं शताब्दी में चंदेल राजा परमार के दरबारी कवि जगनिक ने इस लोक-काव्य की रचना की थी। उन्होंने परमार के सामंत व अतुल पराक्रम आल्हा-ऊदल को परख मानकर इस खंड काव्य की रचना की। इसमें दोनों शहरों के वीरता और उनके द्वारा लड़ी गई, 52 लड़ाइयों का रोमांचक वर्णन किया गया है। बताया जाता है कि यूरोपीय महायुद्ध के दौरान सैनिकों का उत्साह व जोश बढ़ाने के लिए ब्रिटिश सरकारनमेंट को भी आल्हा का सहारा लेना पड़ा था।

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