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बिस्तर खाली होने लगे हैं: शहर में अकाओक्जनी-असाईसीयू के 12 सौ बिस्तर, 54 वेंटिलेटर खाली हैं

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रायपुर2 घंटे पहले

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  • डॉक्टरों का सुझाव; यदि अकोक्सीजन सेचुरेशन 94 से कम अा रहा है, तो घर के बजाय जा सकते हैं अस्पताल

राजधानी में सप्ताहभर से कोरोना के कम मरीज मिलने का असर ये हुआ है कि सरकारी और निजी अस्पतालों में बिस्तर खाली होने लगे हैं। सोमवार रात 8 बजे की स्थिति में निजी अस्पतालों में ऑक्सीजन बिस्तर 989 व आईसीयू के 251 बिस्तर खाली थे। 54 वेंटीलेटर के साथ-साथ एचडीयू के 209 बिस्तर भी खाली हो गए हैं।

हालांकि बड़े निजी अस्पतालों में आईसीयू व वेंटीलेटर खाली नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऑक्सीजन सेचुरेशन 94 से कम हो तो घर में इलाज कराने के बजाय अब अस्पताल जाना ही बेहतर है। राजधानी में पिछले एक सप्ताह से 1500 से कम मरीज मिल रहे हैं। इसका असर ये हुआ है कि सभी अस्पतालों में बिस्तर खाली हो रहे हैं। गंभीर मरीजों के लिए भी आईसीयू बिस्तर उपलब्ध होने लगे हैं। सप्ताहभर पहले ऑक्सीजन बिस्तर के लिए मारामारी थी, लेकिन अभी भी सबसे ज्यादा ऑक्सीजन बिस्तर ही खाली है। अंबेडकर अस्पताल में 16 ऑक्सीजन बिस्तर खाली है। जबकि आईसीयू व वेंटीलेटर फुल है।

कोरोना में ऑक्सीजन सेचुरेशन महत्वपूर्ण है। 94 से कम हो ऑक्सीजन देने की जरूरत रहती है। न्यूरो सर्जन डॉ। राजीव साहू और प्लास्टिक सर्जन डॉ। कमलेश अग्रवाल के अनुसार कई मामलों में देखा गया है कि ऑक्सीजन स्तर एक बार कम होने पर तेजी से कम होने लगता है। ऐसे में रोगी को ऑक्सीजन की जरूरत होती है। इसके लिए एक पात्र व्यक्ति की भी जरूरत होती है, जो यह आकलन कर सकता है कि रोगी को प्रति मिनट कितनी लीटर ऑक्सीजन देने की जरूरत है। निर्धारित मात्रा से कम या ज्यादा ऑक्सीजन देने पर मरीज की स्थिति बिगड़ सकती है। इस तरह की निगरानी बहुत जरूरी है। वर्तमान में अस्पतालों में ऑक्सीजन सेचुरेशन कम वाले रोगी ज्यादा जा रहे हैं। ऐसे मरीजों की मौत भी हो रही है। ऑक्सीजन सेचुरेशन संभाल लें तो मौतों में कमी लाई जा सकती है। घर में सांस में तकलीफ होना, रोगी के गंभीर होने का संकेत है।

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