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गुहानगार गिरफ्त में: राजधानी अस्पताल अंग्निकांड के 16 दिन बाद दो डॉक्टर्स गिरफ्तार, 6 मरीजों की हुई मौत; घरवाले बोले- बिना सजा के छुटने न पाएं

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रायपुर5 मिनट पहले

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राजधानी अस्पताल में हुए अग्निकांड के 16 दिन बाद पुलिस ने अस्पताल के संचालक दो डॉक्टर्स डॉ सचिन मल और डॉ अरविंदा को गिरफ्तार किया है।

रायपुर के राजधानी अस्पताल में हुए अग्निकांड के 16 दिन बाद पुलिस ने अस्पताल के संचालक दो डॉक्टर्स डॉ सचिन मल और डॉ अरविंदा को गिरफ्तार किया है। टिकारापारा थाने में उनके खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया है। 16 दिनों तक पुलिस से छुपने और बचने में कामयाब रहे इन डॉक्टर्स को अब जाकर पुलिस ने पकड़ा है। उस हादसे में अपने परिजनों को खो चुके घर वालों को डर है कि कहीं फिर पैसा और रसूख की ताकत से ये छूट न जाएं। हादसे में जलकर मरे रमेश साहू के भाई प्रिय प्रकाश ने कहा कि हम कानून से ऊपर नहीं, कानून में जो भी सजा इन जैसों के लिए है, मेरी सरकार से पारितंत्र है कि वह उन्हें मिले, ये बिना सजा पाए कहीं छूट न जाएं।

हादसे में अपने परिजनों को खो चुके घर वालों को डर है कि कहीं फिर से पैसे और रसूख की ताकत से ये छूट न जाएं।

हादसे में अपने परिजनों को खो चुके घर वालों को डर है कि कहीं फिर पैसा और रसूख की ताकत से ये छूट न जाएं।

लंबी कारों में आते थे डॉक्टर्स, इलाज के नाम पर चलता है लाखों का पैकेज

राजधानी अस्पताल में हुई आगजनी में अपने भाई को चुनने वाले प्रिय प्रकाश साहू ने कहा कि यहां के डॉक्टर्स हाई प्रोफाइल लाइफ स्टाइल जीता है। बीएमडब्ल्यू ब्रांड के लेटेस्ट मॉडल वाली गाड़ियों में सवार तक पहुंचते थे। एक तरफ तो सरकार ने कोविड मरीजों के उपचार के लिए रेट तय कर रखे हैं लेकिन इसके बाद भी एक सप्ताह के लिए ढाई लाख, 4 लाख का पैकेज यहां बताया जाता है। अस्पतालों में जगह न मिलने के अभाव में लोग उनके अस्पताल में इनकी मुंहमांगी कीमत देकर अपने मरीज का इलाज करवा रहे थे।

अस्पताल में आग बुझाने के कोई इंतजाम, इमरजेंसी एग्जिट और वेंटिलेशन का प्रॉपर इंतजाम नहीं मिला है।

अस्पताल में आग बुझाने के कोई इंतजाम, इमरजेंसी एग्जिट और वेंटिलेशन का प्रॉपर इंतजाम नहीं मिला है।

इस तरह हुआ था हसद

पचपेड़ी नाका क्षेत्र में राजधानी का नाम विभाजित अस्पताल में शनिवार की दोपहर आग लगी। इसका कारण अब तक शॉर्ट सर्किट को बताया जा रहा है। पूर्व जांच में अस्पताल में आग बुझाने के कोई इंतजाम, इमरजेंसी एग्जिट और वेंटिलेशन का प्रॉपर इंतजाम नहींं मिला है। रात के वक्त जिला कलेक्टर डॉ। एस भारतीदासन और सीनियर एसपी अजय यादव घटनास्थल पर पहुंच गए थे। हादसे के बाद 19 मरीजों के दूसरे अस्पताल और 10 को यशोदा अस्पताल भेजा गया। हादसे के फौरन बाद मृतकों के परिजनों के लिए सरकार ने 4-4 लाख रुपये का मुआवजा देने का एलान किया है।

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हादसे के बाद 19 मरीजों के दूसरे अस्पताल और 10 को यशोदा अस्पताल भेजा गया।

जांच से जुड़े अफसार ने कट फोन दिया

पिछले 16 दिनों से फायर डिपार्टमेंट भी इस हादसे की जांच कर रहा है। सूत्रों की मानें तो कई बड़े खामियां भी इस अस्पताल की सामने आई हैं, जैसे अस्पताल में फरा सेफ्टी के उचित उपाय न होना, परमिशन के बिना साझेदारी करना जैसी चीजें सामने आ रही हैं। शिशु अस्पताल के इन खामियों पर खुलकर बात करने के लिए कोई अफसर तैयार नहीं है। एक अधिकारी को दैनिक भास्कर ने फोन किया तो उन्होंने कहा कि इस तरह की जानकारी मीडिया को नहीं दी जाती मैं कुछ नहीं बता सकता। और इतना कहकर हड़बड़ाए अधिकारी फोन काट दिया।

हादसे में अपने भाई को खो चुके प्रिय प्रकाश ने कहा कि आप मेरी जगह रहकर सोचिए मेरे भाई ही पूरे परिवार को करते थे, आज उनके बच्चों को कोई वैसी परवरिश नहीं दे सकती जैसी वह दे सकते थे।

हादसे में अपने भाई को खो चुके प्रिय प्रकाश ने कहा कि आप मेरी जगह रहकर सोचिए मेरे भाई ही पूरे परिवार के साथ करते थे, आज उनके बच्चों को कोई वैसी परवरिश नहीं दे सकती जैसे वह दे सकते थे।

हॉस्पटल पूरी तरह से बंद हो, मृतक के घर वालों को इंसाफ मिले

इस हादसे में अपने भाई को खो चुके प्रिय प्रकाश ने कहा कि आप मेरी जगह रहकर सोचिए मेरे भाई ही पूरे परिवार को करते थे, आज उनके बच्चों को कोई वैसी परवरिश नहीं दे सकती जैसी वह दे सकते थे। मेरा भाई तो लौटाया नहीं जा सका। लेकिन लापरवाही से संचालित अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई हो, इसे पूरी तरह से बंद किया जाए। मृतकों के घर वालों को अस्पताल की तरफ से मुआवजा मिलना चाहिए ताकि उन्हें आगे के जीवन के लिए कुछ तो सहारा मिले।

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