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सफाई कर्मचारी के पक्ष में फैसला: बिलासपुर हाईकोर्ट ने कहा- सफाई कर्मचारी को बेरोजगार होने के लिए मनमाने तरीके से नहीं छोड़ सकते, बर्खास्तगी का आदेश रद्द

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बिलपुर4 घंटे पहले

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बिलासपुर हाईकोर्ट ने आरडीए द्वारा सफाई कर्मचारी को बर्खास्त किए जाने के आदेश को गलत मानते हुए रद्द कर दिया।

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर हाईकोर्ट ने रायपुर विकास प्राधिकरण (RDA) द्वारा सफाई कर्मचारी को बर्खास्त किए जाने के आदेश को गलत मानते हुए रद्द कर दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि कोई भी सफाई कर्मचारी को इस तरह से बेरोजगारी होने के लिए नहीं छोड़ सकता। इससे पहले एकलपीठ कर्मचारी के खिलाफ काम नहीं वेतन नहीं और जांच के आदेश दिए गए थे। इस आदेश में बदलाव करते हुए चीफ जस्टिस पीआर रामचंद्र मेनन व जस्टिस जीबी साहू की खंडपीठ ने कर्मचारी की अपील स्वीकार करते हुए उसको नियुक्त करने का आदेश दिया है। साथ ही आरडीए की अपील खारिज कर दी है।

बेरोजगारी के पक्ष में एच.सी.
खिरोद सोनी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। वहाँ बताया कि RDA में वह दैनिक वेतन भोगी सफाई कर्मचारी के रूप में 1982 में नियुक्त हुआ। 11 अगस्त 1995 को वर्क चार्ज में उसे नियमित कर दिया गया। बाद में 706 दिन अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने के कारण 26 मई 2012 को आरोप पत्र देकर 1 अक्टूबर 2012 को बर्खास्त किया गया। सेवा समाप्ति की कार्रवाई को याचिकाकर्ता ने चुनौती दी।

आरोप पत्र में लिखा 706 दिन का अवैतनिक अवकाश स्वीकृत किए जाने और उसकी जांच पूरी नहीं करने, बर्खास्तगी में संचालक मंडल का अनुमोदन नहीं लिया गया। मामले को सुनने के बाद 15 अप्रैल 2019 को जस्टिस पी। दास कोशी की एकलपीठ ने सेवा समाप्ति की कार्रवाई को अवैध बताकर नौकरी पर फिर से रखने का आदेश दिया। यह भी कहा कि बर्खास्तगी से नौकरी पर दोबारा रखने तक का वेतन नहीं मिलेगा, नियुक्तकर्ता चाहे तो फिर जांच कर सकते हैं।

इस आदेश को याचिकाकर्ता ने दोहरापीठ में चुनौती दी। साथ ही आरडीए ने भी अपील प्रस्तुत की। मामले को सुनने के बाद कोर्ट ने आदेश दिया कि मामले में अब जांच नहीं कर सकती। क्योंकि पहले केवल 706 दिन के वेतन नहीं देने का दंड दे चुके हैं। इसलिए पुन: दंड नहीं दिया जा सकता था। दैनिक वेतन भोगी आकस्मिकता कर्मचारी के सेवा समाप्त करने का निर्णय संचालक मंडल से अनुमति से ही हो सकता है। एकलपीठ के फैसले को बदलते हुए युगलपीठ ने कहा कि दो कार्रवाई एक साथ नहीं हो सकती है। याचिकाकर्ता की अपील स्वीकार की गई और आरडीए की अपील खारिज कर दी गई। साथ ही कहा कि इस उम्र में सफाई कर्मचारी है तो उसे इस तरह से बेरोजगारी होने के लिए मनमाने तरीके से नहीं छोड़ सकते।

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