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संक्रमण से थोड़ा राहत: शहर के 10 रेड ज़ोन से मार्च में निकले 36% मामले में अब नए किस्मो की संख्या बढ़ी हुई 3 राशि

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रायपुर2 घंटे पहले

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दूसरी लहर की शुरूआत से पहलेिटेन्स की संख्या के लिहाज से लगातार कई हफ्तों तक शीर्ष पर बने रहने वाले रायपुर शहर के रेड जोन के 10 क्षेत्रों में अब संक्रमण पूरी तरह से अधिक में दिखाई दे रहा है। यह मार्च और अप्रैल के मध्य में इन क्षेत्रों से रायपुर के नए क्षेत्रोंों की तादाद का 36 प्रतिशत तक हिस्सा आ रहा था।

अब पिछले तीन हफ्तों में 3.63 प्रतिशत केस भी नहीं मिल रहे हैं। रायपुर के ये इलाके समता कॉलोनी, डंगनिया, अमलीडीह, शंकर नगर, टाटमेंट, श्यामनगर, कबीर नगर, हीरापुर, अवंति विहार और खमतराई जैसे इलाके हैं, जहां पिछले तीन हफ्तों से लगातार केस में कमी देखी जा रही है। यही नहीं इन क्षेत्रों में अप्रैल के आखिरी सप्ताह में जब शहर में सबसे ज्यादा 19063 केस निकले तो यहां बहुत कम यानी 693 नए मरीज निकले।

मार्च में होली के पहले शहर के 10 रेड जोन क्षेत्रों समता कॉलोनी, डंगनिया, अमलीडीह, शंकर नगर, टाटमेंट, श्यामनगर, कबीर नगर, हीरापुर, अवंति विहार और खमतई में दूसरी लहर की दस्तक नजर आने लगी थी। दरअसल 17 मार्च से 24 मार्च के मध्य सप्ताह में शहर में 2868 से अधिक केस मिले। जिनमें से 1037 केस केवल दस क्षेत्रों से निकले।

शहर में उस दौरान मिले कुल केस का 36.15 प्रतिशत हिस्सा केवल दस इलाकों में मिला। इसके बाद 24 से 30 मार्च के सप्ताह में शहर में 3756 मामले में 1200 से अधिक केस क्षेत्रों में निकले। अंतिम सप्ताह में कुल नए केस का 31.94 प्रतिशत हिस्सा यहीं से निकला।

इसके बाद अप्रैल के पहले और दूसरे सप्ताह में शहर में निकले कुल 39320 केस में 10 प्रतिशत केस इसी इलाके से निकले जिनकी तादाद 3932 के करीब रही। ऐसा नहीं है, इन क्षेत्रों में लॉकडाउन से पहले माइक्रो लेवल पर शहर में विभाजन क्षेत्र भी बनाए गए।

श्यामनगर में 20 से ज्यादा मरीज रोज मिल रहे थे, अब नंबर जीरो है

श्यामनगर में हर दिन 20 से अधिक केस मिल रहे थे। लिहाजा इलाके की लगभग पूरी गलियों को बंद करने की नौबत आ गई। इस इलाके में मौत के आंकड़े भी लगातार बढ़ रहे थे। यहां तक ​​कि एक ही परिवार में तीन से ज्यादा लोगों की मौत तक हुई। अप्रैल के आखिरी दिनों में यहां एक भी केस नहीं मिला है।

इलाके के पार्षद और मिसी मेंबर अजीत कुकरेजा के मुताबिक वार्ड में सघन वैक्सीनेशन अभियान के तहत 1200 लोगों के टारगेट के मुकाबले 700 से अधिक लोगों को टीके लगाए गए। वहाँ 150 से अधिक लोग ऐसे हैं जो स्वयं से चलते हैं। कुक्करेजा के मुताबिक उनके वार्ड में उनकी जानकारी में आए वैक्सीनेशन के बाद 12 लोग फंस गए। लेकिन कोई भी गंभीर नहीं हुआ।

केस में किस तरह की कमी आई, इसे आंकड़ों से समझे

  • अवधि नया केस 10 रेड जोन कुल%
  • 17 से 24 मार्च 2868 1037 36.37
  • 24 से 30 मार्च 3756 1200 31.94
  • 1> 8 अप्रैल 15060 3012 20.08
  • 8 से 15 अप्रैल 24260 2724 11.23
  • 15 से 20 अप्रैल 14543 1348 09.27
  • 21 से 30 अप्रैल 19063 693 03.63

वैक्सीनेशन संक्रमण को रोकने का प्रभावी तरीका है। दुनिया के दूसरे देशों में इसका असर सामने आया है। अगर हम अगले 6 महीने में टारगेट पूरा करें तो अच्छी स्थिति में पहुंचा जा सकता है। शहर में छोटे रूप में ही सही इसका संकेत दिखाई दिया है।
डॉ। विष्णु दत्त, डीन, नेहरू मेडिकल कॉलेज

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