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टीकाकरण में प्राथमिकता का मामला हाईकोर्ट पहुंचा: पूर्व विधायक अमित जोगी ने इसे आरक्षण संबंधी स्पष्टीकरण के लिए आवेदन दिया, कहा- पहले से चल रही सुनवाई में उनकी हस्तक्षेप याचिका स्वीकार की जाएगी।

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  • पूर्व विधायक अमित जोगी ने आवेदन को यह कहते हुए लागू किया कि यह एक आरक्षण था, कहा कि उनकी हस्तक्षेप याचिका को सुनवाई के दौरान स्वीकार किया जाना चाहिए।

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बिलपुर6 घंटे पहले

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छत्तीसगढ़ सरकार ने टीकाकरण अभियान में आरक्षण लागू करने का आदेश जारी किया है। इस निर्णय को अमित जोगी ने हाईकोर्ट में अपनी हस्तक्षेप याचिका पर सुनवाई करने कहा है।

छत्तीसगढ़ सरकार के टीकाकरण अभियान में अंत्योदय कार्डधारियों को प्राथमिकता देने के निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।) स्वत: संज्ञान याचिका में एक अंतरिम आवेदन जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी ने दायर किया है। उन्होंने हाईकोर्ट से इस मामले को प्राथमिकता से सुनने का निवेदन किया है।

कहा गया कि छत्तीसगढ़ सरकार ने टीकाकरण अभियान में आरक्षण लागू करने का आदेश जारी किया है। इस निर्णय को अमित जोगी ने अधिवक्ता अरविंद श्रीवास्तव के माध्यम से चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में आवेदन देकर अपनी हस्तक्षेप याचिका पर सुनवाई करने कहा है।

याचिका में दलील दी है कि छत्तीसगढ़ सरकार का टीकाकरण में आरक्षण लागू करने का निर्णय असंवैधानिक और अनैतिक होने के साथ-साथ गैर-वैज्ञानिक भी है। टीके की खुराक से पहले उन लोगों को लगना चाहिए जिनकी संभावना होने की अधिक संभावना है। भले ही वे किसी भी वर्ग या जाति के क्यों न हों। इस बात का निर्णय अस्पताल में विशेषज्ञ डॉ ही ले सकते हैं। याचिका में अमित जोगी ने कहा कि भारत के संविधान के तहत किसी भी शासक को यह तय करने का अधिकार नहीं दिया जा सकता है कि कौन जिया और कौन मरे।

टीकाकरण का आधार आरक्षण की जगह विज्ञान होना चाहिए और उपचार का केवल एक ही आधार होता है, जिसे चिकित्सा की भाषा में तड़ीआज कहा जाता है। यह भी निर्दिष्ट किया गया है कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा 15 अप्रैल को बुलाई सर्वदलीय बैठक में याचिकाकर्ता ने लिखित में कोरोना के हस्तक्षेप, नियंत्रण और उपचार के लिए सुझाव दिए थे। इसमें उन्होंने शासन से अनुरोध किया था कि 1 मई से शुरू होने वाले 18-45 आयु के लक्षित समूह के टीकाकरण अभियान में तड़ीजा के आधार पर पूर्व रोग से ग्रसित लोगों को पहले टीका लगाने की मांग की थी।याचिका को प्राथमिकता से परीक्षण के लिए हाईकोर्ट से मांग की गई है।

पहले से हाईकोर्ट में चल रहा है परीक्षण
कोरोना के बिगड़ते हालात के दौरान पिछले साल 20 मार्च 2020 को हाईकोर्ट ने स्वचालित संज्ञान में व्यवस्थाओं पर परीक्षण शुरू की थी। इसके बाद कोरोना को लेकर बचाव, सुविधाएं, दवाएं, इलाज नहीं होने जैसे कई मामलों पर शिकायतें कोर्ट में पहुंची थीं। कोर्ट ने इस मामले में एडवोकेट प्रफुल्ल एन भारत को न्याय मित्र बनाया था। इसका लगातार परीक्षण जारी है। पिछली सुनवाई 26 अप्रैल को हुई थी। अगली सुनवाई 10 मई को संभावित है। अब देखना है कि कोर्ट अमित की हस्तक्षेप याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार करता है या नहीं।

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