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भास्कर विशेष: जिन मरीजाें की कोरोना से माैत हुआ, उनमें 90 प्रतिशत को सांस की समस्या है

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रायपुरएक घंटा पहले

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  • हांफते रहते हैं रोगी, इसलिए ऑक्सीमीटर से लगातार जांचने कह डाक्टर

राजधानी सहित प्रदेश में जिन मरीजों की कोरोना से मौत हो रही है, उनमें 90 फीसदी को सांस की तकलीफ थी। इन रोगियों को खांसी, बुखार के साथ इसके अलावा कोई बीमारी नहीं थी। मरीजों ने अस्पताल पहुंचने में देरी कर दी।

वे जब इलाज के लिए पहुंच रहे थे तब तक उनका ऑक्सीजन सेचुरेशन 60-70 हो चुका था। आक्सीजन सेचुरेशन इतना कम होने से रोगी की स्थिति गंभीर हो जाती है। डाक्टरों के अनुसार सांस में इतनी कमी वाले ज्यादातर रोगियों की मौत अस्पताल पहुंचने के 24 घंटे के भीतर हो रही है।

पिछले महीनेभर से जिन मरीजों की मौत हो रही है, उनमें 60 प्रतिशत केवल कोरोना (को-माबर्डिटी नहीं) से हो रही है। स्वास्थ्य विभाग के रूटीन मीडिया बुलेटिन के अनुसार ज्यादातर रोगी सांस की तकलीफ, खांसी व बुखार की शिकायत के बारे में अस्पताल पहुंचते हैं। ऐसे रोगियों को तत्काल ऑक्सीजन बेड के अलावा वेंटीलेटर की जरूरत होती है। 30 अप्रैल को प्रदेश में कुल 269 रोगियों की माैत हुई, उनमें 156 मरीज को अन्य कोई बीमारी नहीं थी। वे कोरोना से गर्भाशय में गंभीर हुए और अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इन 6 से ज्यादा मरीज मृत अवस्था में अस्पताल पहुंचे।

हाल के दिनों में मृत हालत में अस्पताल पहुंचने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। कुछ मरीजों की मौत होम आइसोलेशन में भी हो रही है, जबकि शासन ने 55 साल से अधिक उम्र वालों को घर आइसोलेशन देने से मना किया है। इसके बाद भी लोग गंभीर लापरवाही बरत रहे हैं और जान गंवा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जिन लोगांे को सांस में तकलीफ हो, उन्हें भी होम आइसोलेशन से बचना चाहिए।

केस -1 आमानाका के 38 वर्षीय व्यक्ति 28 अप्रैल को अस्पताल पहुंचे तो सांस लेने में खासी तकलीफ थी। 29 अप्रैल को केवल 24 घंटे के भीतर उनकी मौत हो गई। उन्हें और कोई भी दूसरी बीमारी नहीं थी। डाक्टरों के अनुसार उन्होंने अस्पताल पहुंचने में देरी कर दी।

केस -2 ब्राह्मणपारा के 40 वर्षीय युवक 28 अप्रैल को एक निजी अस्पताल में भर्ती हुई। उन्हें खांसी, बुखार के साथ सांस लेने में तकलीफ थी। 24 घंटे के भीतर युवक ने भी दम तोड़ दिया। उन्हें अन्य बीमारी नहीं थी।) उनके केस में भी डाक्टरों का यही अनुमान है, देरी से पहुंचे अस्पताल।

ज्यादातर मरीजों को ऐसी समस्या होती है

मरीज जब अस्पताल पहुंचते हैं, तो ज्यादातर रोगियों को सांस की तकलीफ होती है। यह गंभीर स्थिति होती है। ऐसे मरीजों को तत्काल ऑक्सीजन बेड की जरूरत होती है। कई बार वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखना पड़ता है। घर में ऑक्सीजन सेचुरेशन चेक करते रहें। डायबिटीज, हाइपर कैंसर व अन्य गंभीर बीमारी हो तो खतरा और बढ़ जाता है।
– डॉ। विष्णु दत्त, डीन नेहरू मेडिकल कॉलेज

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