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बुजुर्ग दंपती ने पहले ही सुन ली मौत की आहट: गांव के पंडित को बुलायाकर गीता सुनी और दान भी किया; पहले पति फिर 24 घंटे बाद पत्नी भी बस्सी के पास जा रही थी

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जागीरदार14 घंटे पहले

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तस्वीर शीतला प्रसाद और उनकी पत्नी की है।

जांजगीर के एक गांव की घटना लोगों को हैरान कर रही है। यहाँ रहने वाली बुजुर्ग दंपती को अपनी मौत का पता था। उन दोनों ने एलान किया कि अब उनका हाल हो चुका है। दोनों ने पंडित को बुला कर गीता सुना, दान किया। इसके बाद सोने चले गए। सोने से पहले बुजुर्गों ने अपने परिजनों से कहा कि ये उनकी आखिरी नींद है और वे जा रहे हैं। घटना के 24 घंटे बाद बुजुर्ग की पत्नी ने भी घरवालों को बुलाया और कहा कि वह अब चंद घंटों की मेहमान है। परिवार के लोगों को जीवन अच्छी तरह से दूराने की नसीहत दी और उनका भी निधन हो गया। मामला जांजगीर-चांपा जिले के बनारी गांव का है।

रिटायर्ड टीचर जीवन के ब्लैक बोर्ड पर लिखा गया- अल बाय(*24*)
बनारी गाँव जिला मुख्यालय से पाँच किलोमीटर की दूरी पर है, यहाँ रहने वाले शीतला प्रसाद पांडेय (80 वर्ष) और उनकी पत्नी द्रौपदी बाई रहती थीं। शीतला प्रसाद पांडेय रिटायर्ड शिक्षक थे। रामशंकर पांडेय और गोपाल प्रसाद पांडेय उनके दो भाई हैं। शीतला प्रसाद पांडेय की कोई संतान नहीं है। रिटायरमेंट के बाद वे गांव में ही रहते थे। बीते गुरुवार की रात को शीतला प्रसाद पांडेय को अपनी मौत का पूर्वाभास हुआ। उन्होंने अपने भतीजे से गांव के पंडित राकेश तिवारी को फोन कर बुलवाया। शीतला प्रसाद ने उनसे कहा कि तबीयत ठीक नहीं लग रही हैं, वे उन्हें गीता सुना दें।

पत्नी ने परिवार के लोगों से अंतिम मुलाकात की(*24*)
राकेश तिवारी ने शीतला प्रसाद गीता सुनाने के लिए संकल्प कराया। शीतला प्रसाद गंगाजल, अक्षत वगैरह के बारे में। गीता सुनने के बाद उन्होंने गंगाजल पिलाने का अनुरोध किया तो घर के सभी लोगों ने गंगाजल और तुलसी खिलाया। शीतला प्रसाद ने गीता सुनने के बाद पंडित तिवारी को दान दिया। इसके बाद पलंग पर बैठ गए। घर के अन्य सदस्य भी तब तक इकट्ठे हो चुके थे। उन्होंने कहा कि अब उनका समय पूरा हो गया है। सभी घर वालों को हमेशा लोगों की मदद करने की सीख देकर वो सो गए और वे फिर नहीं उठे।

उधर, पति की मौत के 24 घंटे के अंदर शुक्रवार की रात को उनकी पत्नी द्रौपदी बाई को भी अपनी मौत का एहसास हो गया। पंडित राकेश तिवारी ने बताया कि शुक्रवार की रात उन्होंने अपने घर की महिलाओं और अन्य सदस्यों को बुलाया कर बताया कि घर में कौन सा सामान कहां पर है। उन्होंने यह भी कहा कि हमारे क्रिया कर्म में किसी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए। सुबह घर वाले उन्हें उठाने के कमरे में गए लेकिन उनकी भी सांसें थम गई थीं।

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