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कोरोना का असर: लॉकडाउन में पेट्रोल पंपों को गाड़ियों के लाले पड़े, 90 प्रतिशत तक गिरी खपत

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रायपुर20 घंटे पहलेलेखक: असगर खान

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  • राजधानी में एक दिन में 4 लाख लीटर पेट्रोल लगता था; अब 40 हजार भी नहीं, पिछले साल के लॉकडाउन में इतनी गिरावट नहीं थी

राजधानी में लगातार तीन लॉकडाउन और आम लोगों को पेट्रोल-डीजल नहीं देने के नियम ने पेट्रोल पंपों से पेट्रोल-डीजल की बिक्री 90 फीसदी कम कर दी है। पिछले साल के लॉकडाउन में भी इतनी गिरावट नहीं आई थी, क्योंकि इस बार के लॉकडाउन में आई है।

पिछले साल मार्च से मई में पेट्रोल-डीजल की खपत 25 फीसदी से ज्यादा हो रही थी। लेकिन इस बार खपत औसत की 10 प्रति भी नहीं बचती है। पंप संचालकों और पेट्रोलियम कंपनियों के अनुसार रायपुर शहर में हर दिन चार लाख लीटर से ज्यादा की पेट्रोल की खपत होती थी, लेकिन अभी भी पंपों से केवल 40 हजार लीटर के आसपास ही सेम रहा है।

इसी तरह डीजल की रोजाना की खपत आठ लाख लीटर थी, जो अब घटकर लगभग 80 हजार लीटर हो गई है। सरकार को पेट्रोल नहीं बिकने से वैट के तौर पर लगभग 200 करोड़ रुपये का नुकसान का अंदेशा है। लॉकडाउन की वजह से बाहर की गाड़ियां भी नहीं आ रही हैं। शहर के लोगों को पेट्रोल देने की छूट नहीं है। केवल इमरजेंसी सेवाओं में शुरू हुई गाड़ियां ही पंपों तक पहुंच रही हैं। इस कारण से बिक्री सटीक से कम हो गई है।

भास्कर की पड़ताल के मुताबिक राजधानी के शहरी इलाकों में 100 से ज्यादा और जिले में करीब 125 पेट्रोल पंप हैं। राज्यभर में इनकी संख्या 1400 के आसपास है। लॉकडाउन लगने के बाद से ही सार्वजनिक ट्रांसपोर्ट पूरी तरह से बंद हो गया है। इस कारण से शहर के सामान्य दिनों में जहां एक दिन में ४५०० से ५००० लीटर बिकता था अब भी ५०० लीटर भी नहीं है। शहर के बड़े पेट्रोल पंप संचालकों ने बताया कि इस महीने कर्मचारियों की सैलरी, बिजली का बिल तक निकालना मुश्किल हो गया है।

पेट्रोल पंप संचालक बताते हैं कि सुबह के वक्त ही कुछ गाड़ियां पेट्रोल पंपों में आती हैं। दोपहर 1 बजे के बाद से देर रात तक पंपों में इक्का-दुक्का ही ग्राहक आ रहे हैं। यही कारण है कि ज्यादातर पेट्रोल पंप रात 8 बजे से ही बंद होने शुरू हो जाते हैं। अभी जैसे हालात हैं उससे लगता है कि लॉकडाउन खत्म होने के बाद भी स्थिति सामान्य होने में एक से दो महीने लग जाएगी।

सरकार को 250 करोड़ के निवेश का अनुमान

राज्य सरकार को अभी पेट्रोल-डीजल से 25 प्रतिशत वैट मिलता है। इसके साथ ही पेट्रोल में 2 और डीजल में 1 रुपए का सेस अतिरिक्त मिलता है। इस महीने राज्य के लगभग सभी बड़े जिलों में लॉकडाउन लागू है। ऐसे में पेट्रोल-डीजल से मिलने वाला वैट आधा से भी कम होना तय है। आमतौर पर राज्य सरकार को एक महीने में 350 से 400 करोड़ तक वैट पेट्रोल-डीजल से मिलता है। लेकिन अप्रैल का वैट घटकर 100 करोड़ या उससे भी कम होने की पूरी संभावना है।

जो पम्प हजार लीटर थे, 100 नहीं बेच पा रहे

शहर के सभी पेट्रोल पंपों की बिक्री 10 प्रति भी नहीं बची है। जो पंप हजार लीटर पानी थे, 100 लीटर भी नहीं बेच पा रहे हैं। पंपों का खर्च निकलना मुश्किल हो गया है।
-अभय भंसाली, सचिव-राजधानी पेट्रो डीलर एसोसिएशन

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