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आपदा बनी संस्थाओं का अवसर: घर से सैंपल कलेक्ट करने के नाम पर वसूलेप, फिर अपने मन से फर्जी लेटर्स पर पॉजिटिव-निगेटिव लिखकर लोगों को बांट दी रिपोर्ट।

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रायपुर10 मिनट पहले

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यही आपदा में लोगों की जान से खेलकर पैसे कमाने का आरोपी रेशम, मंदिर हसौद थाने की पुलिस इससे पूछताछ कर रही है। ‘

रायपुर के मंदिर हसौद थाने की पुलिस एक युवक को पकड़कर पूछताछ कर रही है। इस शतीर ने कुछ ऐसी हरकत की है कि सुनकर सिर चकरा जाए। कोरोना के इस संकट काल में बीमारी से जूझ रहे लोगों की जिंदगी से इसने बड़ा खिलवाड़ किया। ये जनाब लोगों को अपने मन से ही पॉजिटिव या निगेटिव की रिपोर्ट बांटते फिर रहे थे। घर से को विभाजित सैंपल लिया गया, फिर रिम्स अस्पताल के एडिट लेटर को तैयार करके उसमें मरीज का नाम पता लिखकर उसे खुद बता दिया गया कि कोरोना है या नहीं। लोगों के सैंपल न अस्पताल जाते थे और नपुंसक क्योंकि ये युवक के न तो किसी अस्पताल से अधिकृत था न जापान से।

कहा- पैसा कमाने की धुन में ये रिस्क मामूली लगा
पुलिस को शुरूआती पूछताछ में पता चला है कि रेशम मंगेश्कर नाम के इस युवक ने अजय पैथलंटी स्कूल में कुछ दिन काम किया है। अरब वाले इसे लोगों के घरों में ब्लड शुगर वगैरह की जांच के लिए भेजते थे। पिछले कुछ समय से ये कोविड सैंपलिंग का काम करने लगा। मगर लोगों से मिलते हैं उन्हें ये अपना व्यक्तिगत नंबर देकर भरोसे में लेता था। स्वयं रेशम ऐसे लोगों के घर जाता था जहां कोरोना के मरीज थे या लक्षण वाले लोग रहते थे। मगर पैसे कमाने की धुन के आगे इसे ये रसीद मार्जिन लगा दिया।

ऐसी की ठगी
कुछ लोग कोरोना की RT-PCR रिपोर्ट देर से आने से परेशान थे। ऐसे में रेशम ने उनकी परेशानी का फायदा उठाने की सोची। इसने कहा कि कुछ एक्स्ट्रा पैसे देने पर ये लोग को जल्द दिलवा देंगे। लोग भी झांसे में आ गए। इसके बाद रिम्स अस्पताल के पुराने लेटर इसने कंप्यूटर में कॉपी किए, अपनी मर्जी से ही लोगों की रिपोर्ट निगेटिव-पॉजिटिव लिखकर दे दी। कई लोगों को इसने ऐसे ही 24 घंटे के भीतर सुपर फास्ट फर्जी रिपोर्ट पकड़ा दी। इन्हीं में से एक शख्स ने अपनी रिपोर्ट को लेकर रिम्स अस्पताल में संपर्क कर लिया तो पता चला कि रेशम का अस्पताल से कोई लेना-देना नहीं ये फर्जी रिपोर्ट बना रहा था। पुलिस ये जांच कर रही है कि इसने कितने लोगों को शिकार बनाकर कैसे रुपए ठगे।

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