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पूर्व सांसद का अवसान: डॉ। खेलन राम जांगड़े का हार्ट अटैक से निधन; 30 साल पहले लोकसभा सदस्य रहे, फिर बिलासपुर से नहीं जीत सकी कांग्रेस

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बिलपुरएक घंटा पहले

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छत्तीसगढ़ में बिलासपुर से सांसद रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ। खेलन राम जांगड़े का निधन।

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से सांसद रहे वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ। खेलन राम जांगड़े (75) का शुक्रवार दोपहर करीब 2.50 बजे को हार्टअटैक से निधन हो गया। वह दो दिन से बीमार थे। उनका उपचार वंदना को विभाजित अस्पताल में चल रहा था। उनकी RC-PCR रिपोर्ट निगेटिव थी, लेकिन चिप स्कैन में परिवर्तन दिखाई देने के कारण उन्हें भर्ती कराया गया था। उनका अंतिम संस्कार कोविड प्रोटोकॉल के तहत शनिवार को सरकंडा मुक्ति धाम में किया जाएगा।

पहली बार 1980 में मुंगेली से चुने गए विधायक थे, फिर 2 बार सांसद रहे(*30*)डॉ। खेलन राम जांगड़े 1980 में मुंगेली से विधायक चुने गए। उसके बाद दो बार 1984 और 1989 में बिलासपुर से सांसद रहे। हालांकि, तीसरी बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके साथ ही कांग्रेस का विजय रथ भी बिलासपुर लोकसभा में रुक गया। उनके बाद कोई भी कांग्रेस उम्मीदवार अभी तक अपनी जीत दर्ज नहीं कर सका है। परिवार में 7 बेटियां व एक बेटा है। दो बेटियों की शादी हो चुकी है, बाकी 5 विभिन्न विभागों में अफसर हैं। पुत्र अनिल जांगड़े व्यवसायी हैं।

आयुर्वेद डॉ।, जनसंघ नेता राजनीति में लाए और कांग्रेस जौइन किए गए(*30*)डॉ। जांगड़े ने रायपुर से आयुर्वेद में डॉक्टरी पास की थी। इसके बाद वह मुंगेली के पास फुलवारी गांव में प्रैक्टिस करते थे। उनकी राजनीति में आने को लेकर एक किस्सा भी मशहूर है। वरिष्ठ पत्रकार शशि कोनहर बताते हैं कि जनसंघ के कद्दावर नेता स्व। निरंजन लाल केशरवानी ने उन्हें राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया। हालांकि, उन्हें कांग्रेस में जाने की सलाह दी गई। इसके पीछे क्या कारण था, इस संबंध में किसी को कोई जानकारी नहीं है।

पूर्व मुख्यमंत्री के करीब आने और फिर से विधानसभा का टिकट मिला(*30*)बताया जाता है कि इसके बाद डॉ। जांगड़े तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व। प्रकाश चंद्र सेठी के मुंगेली प्रवास के दौरान उनसे मुलाकात की। डॉ। जांगड़े की प्रसिद्धि को देखते हुए वह मुख्यमंत्री के करीबी हो गए। इसके बाद उन्हें मुंगेली विधानसभा से टिकट दिया गया। पूर्व मुख्यमंत्री स्व। अजीत जोगी ने उन्हें छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग का सदस्य बनाया था। वे कुछ समय तक कार्यकारी अध्यक्ष भी रहे। आम लोगों में भी उनकी सरल छवि थी। पिछले कुछ वर्षों से डॉ। जांगड़े राजनीति से दूर हो चुके थे।

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