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सब्जी उत्पादक किसान परेशान: दुर्ग जिले में लॉकडाउन का असर, सब्जियों की बाहर नहीं हो पा रही तालाई, स्थानीय मांग बहुत कम, किसानों के आर्थिक संकट के बादल

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भिलाई14 मिनट पहले

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दुर्ग जिले के सब्जी उत्पादक किसान परेशान हो रहे हैं। उनकी फसल बाहर सेम नहीं पा रही है। जिसके कारण आर्थिक संकट भी गहराने लगा है।

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में अप्रैल महीने के पहले सप्ताह की 6 तारीख से लगातार लॉकडाउन लगा है। जिससे सब्जी उत्पादक किसानों की हालत खराब हो गई। स्थानीय सब्जी मंडियां बंद हैं। जिले की सीमाएं सील होने की वजह से दूसरे राज्यों से आने वाले निर्माता पहुंच नहीं पा रहे हैं। इसलिए सतर्कता जो दूसरे राज्यों में भेजी जाती है, वह इन दिनों बेकार हो रही है। जिले में 1,04,522 एकड़ में सब्जी की फसल ली गई है। सालाना 7,68,137 टन उत्पादन होता है।
टमाटर का सबसे अधिक उत्पादन
जिले में सबसे ज्यादा टमाटर का उत्पादन होता है। टमाटर का सालाना उत्पादन लगभग 1,90,140 टन होता है। उसके बाद बैगन का उत्पादन 1,10,470 टन है। फूलगोभी का उत्पादन 66,548 और बंद गोभी का उत्पादन 66,548 टन है। करेला 18,844, कुंदरू 4,427 टन और भिंडी 22,707 टन है। स्थिति यहाँ तक पहुँच गई है कि किसान अपने टमाटरों को फेकने तक के लिए मजबूर हो रहा है। साथ ही टमाटर की फसल खेतों में ही सड़ने लगी।वहीं गुरुर ब्लाक के किसान डिकेश्वर साहू बताते हैं कि उनके खेतो में लगे टमाटर की फसल खराब होनी शुरु हो गई है। जिससे उनका काफी नुकसान हो रहा है। पहले वे अपने टमाटर की फसल को दुर्ग, राजनांदगांव, कांकेर, धमतरी सहित अन्य जिलों में बेचने भेजते थे। लेकिन जिलों की सीमाएं सील होने के कारण नहीं नहीं जा रही है।

किसानों के खेतों में टमाटर की फसल बककर तैयार है।  लेकिन समय से नहीं टूटने की वजह से खेतों में ही खराब हो रही है।

किसानों के खेतों में टमाटर की फसल बककर तैयार है। लेकिन समय से नहीं टूटने की वजह से खेतों में ही खराब हो रही है।

केले की फसल भी खराब हो रही है
दुर्ग के कोटनी, बोरई, नागपुरा, चिखली बोरई सहित अन्य क्षेत्रों में सबसे अधिक प्रतिबंध का उत्पादन होता है। इस बार 4735 एकड़ में प्रतिबंध की फसल है। सालाना 5396 टन टन केला उत्पादन होता है। नगपुरा के किसान पंकज, बोरई गांव के किसान सोलंकी बताते हैं कि बाबलों में प्रतिबंध के कारण खराब होने के कारण हैं। केले की सबसे ज्यादा खपत दुर्ग भिलाई मंडी में है। लेकिन यह बंद है। उत्तर प्रदेश और बिहार भी प्रतिबंध भेजते थे।

लॉकडाउन में केले की खेती करने वाले किसान परेशान है।  उनका फसल तैयार है, लेकिन वह मंडियों में बेच नहीं पा रहा है।

लॉकडाउन में केले की खेती करने वाले किसान परेशान है। उनका फसल तैयार है, लेकिन वह मंडियों में बेच नहीं पा रहा है।

रोजाना 1204 टन कमजोरियां हो रही हैं
जिले में सब्जियों का वार्षिक उत्पादन 7,68,137 टन है। यह गणना से महीने में सब्जी उत्पादन 64,011 टन है। हर दिन की औसतन सब्जी उत्पादन 2134 टन है। वहीं दुर्ग भिलाई की थोक सब्जी मंडी में रोजाना की औसत खपत 930 टन की है। इन मंडियों से ही फुटकर निर्माताओं को सब्जी मिलती है। इस गणना से रोजाना औसतन 1204 टन सब्जियों को बाजार नहीं मिल पा रहा, जो खराब हो रहा है।
आर्थिक संकट के बादल
किसानों पर आर्थिक संकट की मार भी पड़नी शुरु हो गई है। जब फसल बककर तैयार हुई तो लॉकडाउन लग गया। सब्जी उत्पादक किसान डिकेश्वर साहू बताते हैं कि तालाडाउन से पहले टमाटर व अन्य प्रदूषणियों खेतो से टूटकर सीधा मंडी में जाता है। मंडी के माध्यम से ही सभी फल जाते थे। लेकिन लॉकडाउन लगने के बाद टॉम तो खेतों में ही सड़ रहा है। और बैंगन, कलिंदर, पपीता और कद्दू भी खराब हो रहा है। सबसे बड़ी परेशानी खेतों में काम करने वाले मजदूरों को लेकर हो रही है। हम उनका हराना नहीं दे पा रहे हैं। अब तो मुश्किल यह हो रहा है कि जितनी लागत फसलों को पैदा करने में लगाई गई थी, वह भी नहीं निकल रही है।

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