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भिलाई इस्पात प्लांट दे रहीसेसे: कई राज्यों को यहां से सप्लाई हो रही है, हर रोज 265 मिलियन टन लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन का उत्पादन होता है।

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भिलाई21 मिनट पहले

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छत्तीसगढ़ से देश भर में मरीजों को ऑक्सीजन उपलब्ध कराई जा रही है। जिसमें भिलाई स्टील प्लांट अपनी प्रमुख भूमिका निभा रही है।

छत्तीसगढ़ सहित देशभर में कोरोना संक्रमण के कारण ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए हर तरफ हाहकार मचा हुआ है। लेकिन छत्तीसगढ़ हर दिन न केवल प्रदेश के अस्पतालों में बल्कि देश के दूसरे राज्यों को भी ऑक्सीजन पहुंच रही है। इसमें बीएसपी (भिलाई स्टील प्लांट) की महत्वपूर्ण भूमिका है।

राज्य के ऑक्सीजन आपूर्ति के नोडल अधिकारी डॉ अय्य फकीर भाई राओली ने दैनिक भास्कर को बताया कि छत्तीसगढ़ ऑक्सीजन आपूर्ति राज्य। यहाँ से तेलिंगाना, आंध्र प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, ओडिशा और छत्तीसगढ़ व अन्य राज्यों को ऑक्सीजन की निर्बध सप्लाई की जारी है। छत्तीसगढ़ में वर्तमान में लगभग 388 टन टन प्रतिदिन ऑक्सीजन का उत्पादन हो रहा है, जिसमें छत्तीसगढ़ केवल 160 मिलियन टन का ही उपयोग कर रहा है। शेष ऑक्सीजन निर्बध रूप से अन्य राज्यों को भेजी जा रही है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में ऑक्सीजन बनाने वाले 29 प्लांट हैं। इनमें से 27 प्लांट में जहां ऑक्सीजन सिलेंडर भरा जाता है। कुछ हवा के बारे में बना रहे हैं और कुछ बीएसपी और उसके साझेदारी वाले उपक्रम प्रैक्सेयर प्लांट से लिक्विड ऑक्सीजन के बारे में सिलेंडरों में भर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस प्लांट की क्षमता 210 टन टन उत्पादन करने की है और स्टोरेज क्षमता 4007 पर्याप्त टन की है। लेकिन सबसे लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन का उत्पादन BSBS और उसकी साझेदारी वाले एककिंग प्रैक्सेयर प्लांट में होता है।

यह भिलाई स्टील प्लांट है, जिसकी नींव तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु ने रखी थी।

यह भिलाई स्टील प्लांट है, जिसकी नींव तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु ने रखी थी।

ऑक्सीजन का उत्पादन के आंकड़े
BSBS पिछले साल अगस्त से लेकर 31 मार्च 2021 तक 13002 टन टन लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति कर चुका है, जो देश के अन्य राज्यों के अस्पतालों में हो रहा है। इसमें सबसे अधिक तेलंगाना को 5921 टन टन लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन दिया गया है। मध्य प्रदेश को 2640 टन टन लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन की सप्लाई हुई है। छत्तीसगढ़ को 1955 टन, महाराष्ट्र को 999 टन, आंध्र प्रदेश को 665 टन, उत्तर प्रदेश को 389 कोटे टन, ओड़िशा को 190 टन टन, गुजरात को 154 टन टन, कर्नाटक को 89 टन ​​टन लिक्विड केमिकल की आपूर्ति गया है।

भिलाई स्टील प्लांट में लिक्विड ऑक्सीजन का उत्पादन हो रहा है।

भिलाई स्टील प्लांट में लिक्विड ऑक्सीजन का उत्पादन हो रहा है।

डिमांड के आधार पर आपूर्ति

1 अप्रैल को भिलाई इस्पात संयंत्र में 279.35 टन टन का उत्पादन हुआ था। जबकि आपूर्ति केवल 75.60 टन थी। लेकिन सप्ताह भर बाद 7 अप्रैल को आपूर्ति का आंकड़ा 142.35 तक पहुंच गया। देश भर में जैसे-जैसे ऑक्सीजन की मांग बढ़ती गई, आपूर्ति के आंकड़े भी बढ़ते चले गए। 10 अप्रैल को भिलाई से लगभग 294 मिलियन टन ऑक्सीजन की आपूर्ति की गई। 21 अप्रैल को अकेले भिलाई से 365 मिलियन टन ऑक्सीजन की आपूर्ति की गई। ऑक्सीजन की बढ़ती मांग को देखते हुए बीएसपी ने अब बचे हुए ऑक्सीजन को विभिन्न राज्यों को देना शुरू कर दिया है। ताकि जितना हो सके लोगों को ऑक्सीजन मिल जाए और जीवन बच जाए।

भिलाई स्टील प्लांट ने बिना रुके लिक्विंड ऑक्सीजन का उत्पादन किया जा रहा है।

भिलाई स्टील प्लांट ने बिना रुके लिक्विंड ऑक्सीजन का उत्पादन किया जा रहा है।

ऑक्सीजन पर सियासत
प्रदेश में ऑक्सीजन को लेकर विपक्षी दल के पास कई सवाल हैं। पूर्व सीएम रमन सिंह ने कहा कि बीएसपी हिंदुस्तान का सबसे बड़ा स्टील प्लांट है। इसके बाद भी छत्तीसगढ़ के मरीज बिना ऑक्सीजन के मर रहे हैं। ये व्यवस्था की डिफ़ॉल्ट है। इसका कारण यह है कि मुख्यमंत्री एक दिशा में जा रहे हैं और स्वास्थ्य मंत्री एक दिशा में जा रहे हैं। वहीं स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव कहते हैं कि रमन सिंह के 15 वर्षों के कार्यकाल में ऑक्सीजन की सुविधा वाले बिस्तरों की संख्या केवल 4242 थी। दिसंबर 2018 के बाद इन तेजी से इजाफा हुआ और अब 7042 ऑक्सीजन सुविधा वाले बेड प्रदेश के अस्पतालों में है।

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