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कालाबाजारियों के छूटने से सरकार पर दबाव: रेमदेसीविर इंजेक्शन को आवश्यक वस्तु अधिनियम में शामिल करने की मांग, मुख्यमंत्री बघेल ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को लिखा पत्र

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रायपुर14 मिनट पहले

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रायपुर पुलिस ने पिछले दिनों इन युवकों को रेमदेसीविर इंजेक्शन बेचने की कोशिश करते पकड़ा था। रायपुर, दुर्ग और महासमुंद में ऐसे गिरपतरियां हुई हैं। ज्यादातर में उन्हें छोड़ दिया गया है।

कोरोना के खिलाफ लड़ाई के बीच रेमडेसिवीर इंजेक्शन की कालाबाजारी से जुड़े लोगों की जमानत मिल जाने से छत्तीसगढ़ सरकार के अधीन चली गई है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ। हर्षवर्धन को पत्र लिखकर आवश्यक दवाओं को आवश्यक वस्तु अधिनियम (ईसीए) के तहत सशर्त करने की मांग की है, ताकि जमाखेरी और कालाबाजारी कर रहे लोगों को सख्त सजा दिलाई जा सके।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने लिखा, केंद्र सरकार पहले भी एन -95 संकाय, सैनिटाइजर आदि को आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत सशंकित कर चुकी है। इस कदम से देश भर में कोरोना के खिलाफ लड़ाई में आसानी से हुआ। प्रदेश में कोरोना के बढ़ते संक्रमण की वजह से मरीजों के उपचार में रेमडेसिवर इंजेक्शन, आइवर मेक्टिन इंजेक्शन, टोसीलीजुमब इंजेक्शन, फेविपीरावर कैप्सूल, एनोकसापारिन इंजेक्शन और डेक्सामेथासोन डॉलर एवम इंजेक्शन जैसे दवाओं की मांग बढ़ गई है।

इसकी वजह से इन दवाओं की जमाखोरी और कालाबाजारी की शिकायत भी मिल रही है। जमाखोरी की वजह से मरीजों को दवा मिलने में भी दिक्कत हो रही है। मुख्यमंत्री ने लिखा, इन दवाओं के सशंकित हो जाने से प्रशासन को कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने में सहायता मिलेगी। मुख्यमंत्री ने इसे तत्काल लागू करने की मांग की है।

यहाँ छूट जा रही है कालाबाजारी

छत्तीसगढ़ में रेमडेसिवीर और दूसरी दवाओं की कालाबाजारी को रोकने का कोई कानून नहीं है। पुलिस, दंड संहिता की धारा 151 के तहत कालाबाजारियों को पकड़ रही है। यह धारा पुलिस को अपराध होने की संभावना रोकने के लिए किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी का अधिकार देती है। लेकिन इसका प्रभाव सीमित है। एसडीएम कोर्ट से उन्हें जमानत मिल जाती है।

आवश्यक वस्तु अधिनियम 7 साल की सजा

संसद के बनाए आवश्यक वस्तु अधिनियम में खाद्य, औषधि और आवश्यक चीजों की जमाखोरी, कालाबाजारी और मिलावटखोरी को रोकने का प्रावधान।]यदि आवश्यक दवाओं को इस कानून के तहत सशंकित किया जाता है तो पुलिस को कार्रवाई में आसानी होगी। अपराधियों को आसानी से जमानत नहीं मिलेगी और अपराध अनुक्रम होने पर सात साल की जेल भी हो सकती है।

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