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अंतिम यात्रा के साथी: मारवाड़ी-गोकुलनगर में युवाओं की बड़ी टीम, कोई डॉ। हैं तो किसी का शो-रूम

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रायपुर2 घंटे पहले

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  • जान की परवाह किए बिना युवाओं की अद्भुत सेवा

मारवाड़ी शमशानघाट और गोकुलनगर मुक्तिधाम में कोरोना मृतकों का अंतिम संस्कार करने वाली सामाजिक संस्था पहल की टीम के 20 नौजवान बीते 4 महीने से हर दिन घर तो रहे हैं, लेकिन अपने परिजनों से मेलजोल नहीं रख पा रहे हैं। कोरोना अंतिम संस्कार करने के कारण टीम के इन सदस्यों को घर पर आइसोलेट ही रहना पड़ता है। गर्मी के मौसम में अंतिम संस्कार करने के इस 4 से 5 घंटे की सेवा के दौरान पीसीबीई किट शरीर पर रहने से पसीने के कारण ये लोग बहुत ज्यादा डीहाइड्रेट भी हो जाते हैं।

पहल संस्था के युवा रितेश अग्रवाल के मुताबिक दोनों श्मशान घाट में हर दिन 12 -12 से ज्यादा को विभाजित डेड बॉडी का दाह संस्कार हो रहा है। 20 लोगों की इस टीम में डॉ, समाजसेवी, व्यवसाय जैसे प्रोफेशन से जुडे़ लोग भी हैं। रितेश के मुताबिक मारवाड़ी शमशान घाट में मनीष महानंद, अनिल महानंद, दादू सारथी, चंदन यादव, अनिल विश्वकर्मा, राजेश सारथी जैसे युवाओं की टीम 4-4 घंटे काम कर रही है। एर्केन्स एंड स्वर्ग रथ बॉडी को रखने के लिए फ्रीजर प्रभारी का काम अशोक गलानी, दोनों मुक्तिधाम में खाने का प्रबंध डॉ मनोज ठाकुर, गोबर के कंडे लकडी़ का बंदोबस्त प्रदीप वर्मा और पहल संस्था की महिला समिति द्वारा किया जा रहा है। एक पहल सेवा समिति के अध्यक्ष राजकुमार साहू, सचिव देव कुमार साहू सभी आवश्यक चीजो का इंतजाम करते हैं। गोबर के कंडे लकडी की उपलब्धता और प्रबंधन पहल महिला स्व सहायता समूह की अध्यक्ष नीलम अग्रवाल कर रही हैं।

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