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वाहीविड अस्पताल में लापरवाही की इंतेहा: गर्भवती की तीन दिन पहले मौत, पति को बताया ही नहीं

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बिलपुर15 मिनट पहले

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लापरवाही पर कांग्रेसजन अधिकारियों से बात करते हैं।

संभागीय कोविड अस्पताल में भर्ती गर्भवती महिला की मौत हो गई। प्रबंधन ने शव लावारिस मानकर मरच्यूरी में रखवा दिया। इस बीच मृतका का पति लगातार उसका हालचाल जानने वाला अस्पताल आता रहा और पत्नी की जरूरत का सामान अस्पताल स्टाफ को देता रहा। उसे पत्नी की मौत की जानकारी तीन बाद मिली तो वह बदहवास हो गई। संभागीय कोविड अस्पताल में जिम्मेदार डॉक्टरों की भारी लापरवाही सामने आई है।

अस्पताल में भर्ती महिला का पति रोजाना अपनी पत्नी की तबियत के बारे में जानकारी लेने जाता था, लेकिन उसे कुछ बताया नहीं जाता। पत्नी की जब जानकारी भी मिली तो यह कि उसकी मौत हो चुकी है और उसका शव लावारिसों की तरह तीन दिन तक मरच्यूरी में रहा। अस्पताल पहुंचे कांग्रेस नेताओं को इस लापरवाही का पता चला तो हासामा शुरु हो गया। हंगामे की सूचना मिलते ही सीएमएचओ भी पहुंच गए और उचित कार्यवाही का आश्वासन दिया। हालांकि कांग्रेसियों ने साफ कह दिया है कि वह मामले में कार्यवाही करकर ही मानेंगे।

महेसिया बाई 27 वर्ष पत्नी कमलेश निषाद निवासी लालखदान की 24 अप्रैल को तबियत खराब हुई तो उसे जांच के लिए के बारे में पता चला। यहां जांच के बाद महेसिया बाई को कोरोना पॉजिटिव आ गया। इसका पता चलते ही डॉक्टरों ने उसे कोविड अस्पताल में भर्ती करने को कहा। कमलेश ने अपनी पत्नी को उसी दिन अस्पताल में भर्ती करा दिया। कमलेश ने अपना नाम और मोबाइल नंबर भी अस्पताल के रजिस्टर में दर्ज कराया।

कर्मचारियों ने कमलेश से कहा कि वह मोबाइल नम्बर पर उसकी पत्नी की जानकारी दें। कमलेश रोज अस्पताल में अपनी पत्नी का हाल-चाल लेने जाता है लेकिन कोई उसे कुछ नहीं बताता है। न ही मोबाइल पर बात करवाई जाती है।

बुधवार को कमलेश के बड़े भाई ने कांग्रेस नेता अभय नारायण राय को फोन कर इसकी जानकारी दी तो वह कोविद अस्पताल पहुंचे और नोडल अधिकारी डाॅ। अनिल गुप्ता और अस्पताल कंसलटेंट डा। शैफाली से बात की। दोनों डॉ। उन्हें बहुत ज्यादा कुछ बताने को तैयार नहीं हुए। तब तक कांग्रेस नेता जावेद मेमन, पंकज सिंह भी अस्पताल पहुंच गए और डॉक्टरों से बात की फोटो से हुई पहचान महेषिया बाई की मौत को विभाजित अस्पताल में 25 अप्रैल को ही हो गई थी। लेकिन जिम्मेदार डॉक्टरों ने उसके परिजनों की तलाश न करते हुए शव को लावारिश की तरह मरच्यूरी में रखवा दिया।

कमलेश ने जब फोटो डॉक्टरों को दिया तो उसे मरच्यूरी में रखे शव से मिलाया गया। तब कहीं जाकर पता चला कि महेसिया बाई की तो मृत्यु हो चुकी है। इतना पता चलते ही परिजन और कांग्रेस नेता हंगामा करने लगे। मौके पर सीएमएचओ डाॅ। प्रमोद महाजन भी पहुंच गए और मामले की जांच कराने की बात कही।

किचन वाला रोज कपड़े लेकर जाता था

महेषिया बाई का पति कमलेश रोज उसके लिए साफ कपड़े लेकर जाता था और उसे किचन के स्टाफ के जरिए अस्पताल में पहुंचाता था। लेकिन उसकी पत्नी के मौत के बाद आखिर कपड़े ले कौन रहा था इसका भी पता नहीं चला था।
मरीज के पति ने अपना मोबाइल नम्बर गलत लिखवा दिया था, इसलिए यह सब कुछ हुवा। मरीज जब 25 अप्रैल को एक्सपायर हुआ तो उसके परिजनों को फोन लगाते हुए लेकिन नहीं डाला गया। संभवता हाउस कीपिंग वालों ने या फिर मरीज के पति ने ही जल्दबाजी में गलत नंबर दिया या लिख ​​लिया। मामला में हमारी कोई लापरवाही नहीं है। हमने तो मौत हो जाने के बाद परिजनों से संपर्क करने की कोशिश भी की लेकिन हो नहीं पाए।
-डा। अनिल गुप्ता, नोडल अधिकारी, कोविंद अस्पताल

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