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सुकमा में 2 जवानों की हत्या का मामला: नक्सलियों ने पर्चा जारी कर ली जिम्मेदारी, सड़क निर्माण में लगे मुंशी को भी मारा था; पुलिस पर लगाए गए ग्रामीणों से मारपीट के आरोप

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सुकमा6 घंटे पहले

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माओवादियों ने पर्चा जारी कर दो जवानों और एक मुंशी की हत्या की जिम्मेदारी ली है। नक्सलियों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

नक्सलियों ने पचा जारी कर सुकमा जिले के भेज्जी थाने के पास 2 जवानों की हत्या की जिम्मेदारी ली है। गोरगुंडा में सड़क निर्माण में लगे मुंशी की हत्या करने की बात भी पर्चे में लिखी है। नक्सलियों की कोंटा क्षेत्र कमेटी की तरह से इस पर्चे को जारी किया गया है। दोनों घटनाओं को नक्सलियों के PLGA (पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी) ने अंजाम दिया है। पर्चे में दोनों जवानों पर बेकसूर ग्रामीणों से जबरदस्ती हस्तक्षेप करना, मारपीट करने और उन्हें जबरदस्ती थाने ले जाने का आरोप लगाया गया है। वहीं मुंशी की हत्या के पीछे का कारण नक्सलियों ने उसके राड़ निर्माण में लगा दिया जाना बताया है।

फोर्स पर बेकासुर ग्रामीणों को गिरफ्तार करने का आरोप
नक्सलियों ने अपने पर्चे में लिखा है कि भेज्जी थाने इलाके में जवानों की हत्या के बाद पुलिस फोर्स बेकसूर ग्रामीणों को गिरफ्तार किया है। फोर्स पर आस-पास के गांवों के 40 से 50 निर्दोष ग्रामीणों को गिरफ्तार करने और उनके साथ मारपीट का भी आरोप लगाया गया है। वहीं पोलमपल्ली के गोरगुंडा में मुंशी की हत्या के मामले में आस पास के 30-35 ग्रामीणों को गिरफ्तार करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। दोनों घटनाओं को लेकर कहा गया है कि पुलिस ने आम ग्रामीणों से बदला ले रही है। फोर्स ग्रामीणों क्षेत्रों में लोगों को महुआ बिनने तक नहीं जाना दे रहा है।

दोनों बाइक से बाजार जा रहे थे तभी उनकी हत्या कर दी गई
नक्सलियों ने 15 अप्रैल को भेज्जी थाने से सिर्फ आधा किलोमीटर दूर पुलिस के दो जवानों की हत्या कर दी गई है। जिन पुलिसवालों की हत्या हुई है वे भेज्जी थाने में ही तैनात थे। थाने के पास ही पुलिस कैंप भी है। 15 अप्रैल को दोनों युवा बाइक से बाजार की तरफ जा रहे थे। केवल इनका रास्ता रोक कर हत्या की गई थी। जिन जवानों की हत्या की गई थी उनका नाम पुम्म हड़मा और धनीराम कश्यप है। हालांकि पुलिस ने उस दौरान नक्सलियों का हाथ होने से इंकार किया था।

मुंशी को अगवा कर मौत के घाट उतारा
16 अप्रैल को गोरगुंडा में सड़क निर्माण में शुरू हुई मुंशी की तीर मारकर हत्या की गई थी। उस दौरान नक्सलियों ने मुंशी सहित तीन लोगों को अगवा किया था। बाद में मुंशी की हत्या कर दी गई और सड़क निर्माण में लगे हुए 2 और लोगों को छोड़ दिया गया था। उस दौरान ये भी बात सामने आई थी कि ठेकेदार बिना पुलिस की सुरक्षा के सड़क का निर्माण कार्य करवा रहा था।

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