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गजराज का आतंक: मृत्युदर में 17 दिन में तीसरे बार गांव को बनाया गया निशाना, हाथियों के झूठे बार-बार आकर कब्रों और फसलों को करते हैं तबाह

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  • हाथी इस गाँव को तीसरी बार 17 दिनों में मरवाही में निशाना बनाते हैं, गजदल बार-बार आते हैं और घरों को नष्ट करते हैं, हाथियों का आतंक

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गौरेला-पेंड्रा-मृत्युदरएक घंटा पहले

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हाथियों ने जिले के तनेरा गांव में आज फिर से उत्पात मचाया है। जिसके चलते ग्रामीण का घर तबाह हो गया है।

(*17*)छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मृत्युभोग (जीपीएम) जिले में मृत्यु सीमा सीमा के पास एक गांव में जंगली हाथी ने उत्पात मचाया है। शनिवार तड़के 3 बजे हाथी कटघोरा वनमंडल के पसान रेंज के तनेरा गांव में घुस गया। इसके बाद उन्होंने कई घरों को तोड़ा और फसलों को भी बर्बाद कर दिया। इस दौरान गांव वालों की लापरवाही का भी एक वीडियो सामने आया है। वीडियो में लोग जान जोखिम में डालकर हाथी के करीब गो वीडियो बनाते दिख रहे हैं। इस दौरान हाथी लोगों को दौड़ाता हुआ भी नजर आ रहा है। वर्तमान में विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई है और लोगों से हाथियों के पास नहीं जाने की अपील की है। इसी इलाके में 17 दिन के भीतर हाथियों के उत्पात की यह तीसरी घटना है।

(*17*)23 हाथियों का झुंड मौजूद है
जानकारी के मुताबिक, कोरबा जिले के कटघोरा वनमंडल के पसान रेंज में हाथियों का झुंड मौजूद है। इसी में से एक हाथी सुबह तनेरा गाँव पहुँचा। चूंकि इसी रेंज से मृत्युदर वन मंडल भी लगा हुआ है, जिसके कारण लगातार हाथी इस गांव में पहुंच रहे हैं। पता चला है कि पसान रेंंज में लंबे से समय से लगभग 23 हाथियों का झुंड विचरण कर रहा है, जिसके कारण कई बार हाथी झुंड से भटककर इस इलाके में आ जाते हैं और लोगों को घरों को नुकसान पहुंचाते हैं। हालांकि वन विभाग की टीम हाथी को वापस जंगल की ओर खदेड़ा दिया है।

(*17*)17 दिन के अंदर 3 बार हाथियों ने मचाया आतंक
तनेरा गांव में गजदलों के आतंक का ये कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी हाथी इस गांव को 17 दिन के भीतर 2 बार लक्ष्य बना चुके हैं। 7 अप्रैल को झुंड से बिछड़ कर 2 हाथी इस गांव में घुसे थे। उस दौरान उन्होंने ग्रामीणों को घर को तोड़ दिया था। इसके अलावा गजराज ने एक ग्रामीण के घर में 3 क्विंटल महुआ और फसलों को चट कर दिया था। वहीं इसी गांव में 8 अप्रैल को भी एक हाथी घुस आया था और अधेर सिंह गोड़ के घर को तोड़कर मक्का और धान की फसल को खा लिया गया था। आज भी हाथी ने चार ग्रामीणों के घर को तबाह कर दिया था। इस प्रकार के हाथियों ने इसी गांव को तीसरे बार निशाना बनाया है।

(*17*)वन विभाग ने अब तक नहीं किया
पसान रेंज में हाथियों का मूवमेंट लंबे समय से है। हाथी पसान रेंज के ही रूट से इस मृत्यु क्षेत्र में आते हैं। इसके बावजूद मृत्युदर वन मंडल ने सुरक्षा के कोई खास इंतजाम नहीं किए हैं। यही कारण है कि हाथी के बार-बार इस क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं। हालांकि हाथी ने अब तक किसी की जान नहीं ली है। लेकिन ग्रामीणों में हाथियों को लेकर दहशत है। बताते चलें कि मृत्युदर सीमा से सटे कटघोरा वनमंडल एक घना वन परिक्षेत्र है। जिसकी वजह से बार-बार हाथी इस क्षेत्र मे आ जाते हैं। वन विभाग की टीम अगर उन्हें किसी ओर खदेड़ भी देती है तो भी ये इसी जंगल में आ जाते हैं।

(*17*)20 अप्रैल को बलौदाबाजार में भी दंपति को उतरा मौत के घाट
छत्तीसगढ़ में लगातार हाथियों के आतंक के मामले अलग-अलग इलकों से सामन आते हैं, जिनकी वजह से कई ग्रामीणों की जान भी जा चुकी है। इससे पहले 20 अप्रैल को बलौदाबाजार जिले के कसडोल इलाके के लवन वन परिक्षेत्र के अंतर्गत खैरा (ब) गांव में हाथियों ने एक दंपती को मौत के घाट उतार दिया था। इसी दौरान इसी इलाके में 3 हाथियों के मूवमेंट की जानकारी मिली थी।

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