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कोरोना से जीत हम करेंगे: भिलाई में कोरोना से 76 साल की अम्मा ने जीती जंग, हाइपर ट्रेनिंग से लेकर डायबिटीज के बावजूद 5 दिन में रिकवर

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भिलाई24 मिनट पहले

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भिलाई के चंदूलाल चंद्राकर को विभाजित कैर सेंटर से 76 साल की कस्तूरी बाई साहू ने कोरोना कोटि दे दी है।

छत्तीसगढ़ के भिलाई में चंदूलाल चंद्राकर को विभाजित कैर सेंटर में 76 साल की कस्तूरी बाई साहू ने कोरोना से जंग जीत ली है। मूलत: बलोदा बाजार जिले की रहने वाली है। वर्तमान में वे महल में अपने रिश्तेदार के पास रह रहे हैं। उनमें 17 अप्रैल 2021 को भर्ती की गई थी। महज 5 दिन में ही वह ठीक होकर अपने घर वापस लौट गया।

कस्तूरी बाई साहू की कहानी

भिलाई के चंदूलाल चंद्राकर को विभाजित कैर सेंटर में जब कस्तूरी बाई साहू को लाया गया था। तब तक उनका ऑक्सीजन लेवल 85 से नीचे था। ब्रेक लेवल 25 में से 13 था। जिससे पता चल गया था कि ज्यादा बना हुआ था। निशानेबाजी भी जीरो थी। भोजन की मात्रा शरीर में नहीं होने से मेडिकल टीम के लिए उपचार देना बड़ी चुनौती थी। बुजुर्ग महिला के शरीर में भोजन न होने से पूरी तरह कमजोरी आ गई थी। वह डायबिटीज और हाइपर कैंसर की मरीज भी है। भर्ती होने के बाद उन्हें मेडिसिन दी गई, और उपचार शुरू किया गया। अब वह स्वस्थ होकर घर लौट आया है। ऑक्सीजन की सुविधा होने से मरीज को जल्द रिकवर होने में मदद मिल रही है।

जैसा कि डॉ। ईशांत साहू ने बताया

कोविड कैर सेंटर के डॉ ईशांत साहू ने बताया कि जब कस्तूरी बाई साहू को जब लाया गया था, तब उनकी स्थिति खराब हो गई थी। तुरंत भर्ती के बारे में उपचार शुरू किया गया। महिला का ट्वीटिंग जीरो था। तब उन्हें फ्लूड के माध्यम से भोजन और दवाई देने का निर्णय लिया गया। दिन में चार बार इस विधि को अपनाया गया। एंटीवायरल थेरेपी की शुरुआत की गई। उपचार शुरू करने के दिन से ही महिला के शरीर में चमत्कारिक प्रभाव नजर आया और वह केवल पांच दिनों में स्वस्थ होकर घर लौट गई।

बुजुर्ग के परिजन ने कहा- कोरोना वारियर्स ने रिस ली जान

कस्तूरी बाई साहू के परिजन ने बताया कि कोरोना वारियर्स ने मरीज का पूरा ध्यान रखा। उनकी जरूरतों के अनुसार उन्हें उपचार दिया गया है। बुजुर्ग होने के साथ ही डायबिटीज की बीमारी होने से जल्दी रिकवरी होना आसान नहीं था। कोरोना मरीज के लिए ऑक्सीजन बेड की आवश्यकता महत्वपूर्ण होती है। सही समय पर कोविड कैर सेंटर में भर्ती किया गया। मेडिकल टीम का बेहतर उपचार प्राप्त होने से अब वे स्वस्थ होकर घर आ गए हैं।

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