Harshit India news

breaking news | Bhopal local news | Madhya Pradesh news | Indore news

रेमडेसिवीर इंजेक्शन: अंबेडकर में बीपीएल-एपीएल के बजाय हरड़ रोगी को रेमडेसिवीर डोज, रोजाना 80 को लगेंगे।

विज्ञापन से परेशान हैं? बिना विज्ञापन खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

रायपुर2 घंटे पहले

  • कॉपी लिस्ट

तस्वीर अंबेडकर अस्पताल की।

  • भास्कर लगातार; सप्ताहभर में मिले 1200 इंजेक्शन, वही से सुधरने लगे हालात
  • अब मारपीट की आशंका से बचने की दुकान में

अंबेडकर अस्पताल में अब हर गंभीर रोगी को रेमदेसीवीर इंजेक्शन लगाया जाएगा, चाहे वह बीपीएल हो या एपीएल के श्रेणी का हो। इसके लिए रोगी या उनके अटेंडेंट द्वारा दबाव डालने की भी जरूरत नहीं है। पिछले तीन दिन से रोजाना 80 मरीजों को रेमडेसिवर इंजेक्शन दिया जा रहा है। अफसरों ने बताया कि पिछले एक सप्ताह में 1200 इंजेक्शन यहां अएए हैं, इस कारण से सप्लाई में थोड़ा सुधार हुआ है।

राजधानी सहित प्रदेश में रेमडेसिवर के लिए मारामारी मची हुई है। अंबेडकर अस्पताल में 450 से ज्यादा मरीज भर्ती हैं। इन रोजाना 80 रोगियों को रेमडेसिवर इंजेक्शन लगाया जा रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि कई रोगी रेमडेसिवर इंजेक्शन लगाने का दबाव डालते हैं, लेकिन इंजेक्शन नहीं लगाया जाता है। जिन रोगियों को जरूरत है, उन्हीं को रेमडेसिवर लगाया जा रहा है। हालांकि दूसरे अस्पतालों में मरीजों के दबाव में इंजेक्शन लगाने की बात कही जा रही है। यही कारण है कि बाजार में रेमडेसिवर के लिए मारामारी है। दूसरी ओर रेडक्रास मेडिकल स्टोर में 240 इंजेक्शन पहुंचे थे, जो कुछ घंटों में बिक गए। गौर करने वाली बात यह है कि ये ज्यादातर लोग अंबेडकर अस्पताल की पर्ची रखते हैं। कई लोग निजी अस्पताल से आए लोग होते हैं, जो अपने परिजन व परिचितों के लिए इंजेक्शन के लिए चक्कर लगाते रहते हैं।

रेमडेसिवीर की सप्लाई पिछले एक सप्ताह से बढ़ी है, लेकिन इसकी जरूरत भी बढ़ गई है। अब तक रायपुर और दुर्ग अस्पतालों में भर्ती गंभीर मरीजों के लिए यह इंजेक्शन तलाशा जा रहा था। यहां अब भी मांग बनी हुई है, लेकिन पिछले दो-तीन दिन से अन्य जिलों में मामला बढ़ने की वजह से वहां से भी लोग रेमडेसिवीर की तलाश में पूंजी की दौड़ लगा रहे हैं। इस कारण से मांग में कोई कमी नहीं आई है और सप्लाई अब भी जरूरत की 25 फीसदी भी नहीं है। चिकित्सकों का दावा है कि जब तक प्रदेश में इकट्ठा 20-30 हजार इंजेक्शन सप्लाई नहीं होते, तब तक मांग और सप्लाई का सिस्टम बैलेंस नहीं होता।

अब मारपीट की आशंका से बचने की दुकान में
रेमडेसिवीर इंजेक्शन नहीं मिलना पर कई लोग अंबेडकर अस्पताल के रेडक्रास मेडिकल स्टोर में हंगामा कर चुके हैं। मारपीट की नौबत आने लगी, इसलिए मेडिकल स्टोर के कर्मचारी स्टोर इंजेक्शन आने के बाद ही खुल रहे हैं। इससे दूसरे रोगी जिन्हें अन्य दवाइयों की जरूरत है, वह परेशान हो रहे हैं। उन्हें बाहर जाने की जरूरत पड़ रही है।

टोसिलिजुमैत के लिए भी चक्कर
रेमडेसिविर की तरह टोसिलिजुमाब इंजेक्शन के लिए मारामारी मची हुई है। कोरोना के गंभीर रोगियों को यह इंजेक्शन लगाया जाता है। निजी अस्पतालों में यह इंजेक्शन नहीं मिल रहा है। थोक दवा बाजार और दूसरे मेडिकल स्टोर में भी इंजेक्शन की कमी है। मूलत: यह दवा सोरायसिस बीमारी का है, जिसे कोरोना के गंभीर रोगियों को लगाने की अनुमति मिली है। ये इंजेक्शन भी कुछ स्थानों पर ब्लैक में बिक रहा है।

अंबेडकर में जरूरतमंद सभी रोगियों को रेमडेसिवर इंजेक्शन लगाया जा रहा है। इसके लिए एपीएल या बीपीएल का कोई क्राइटेरिया नहीं है। हर मरीज को इसकी जरूरत नहीं है, लोगों को यह बात समझनी चाहिए।
-डॉ। ओमप्रकाश सुंदरानी, ​​क्रिटिकल कैर इंचार्ज अंबेडकर अस्पताल

खबरें और भी हैं …

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

%d bloggers like this: