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कोरोना वॉटर का कातिल कौन ?: तीन महीने से बिना वेतन के काम कर रहा था जापानी तेजिशियन; जिस अस्पताल में काम करता था उसमें तापमान नहीं था, वहाँ बिस्तर नहीं मिला, स्ट्रेचर पर राहत मिली

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रायपुर37 मिनट पहलेलेखक: सुमन पांडेय

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तस्वीर रायपुर की है। अंबेडकर अस्पताल के जापानी टेक्नीशियन के भाई विवेक, अब भाई की मौत के बाद सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।

मेडिकल कॉलेज अस्पताल रायपुर (मेकाहारा) इसे अंबेडकर अस्पताल के तौर पर भी लोग जानते हैं। यहां हर दिन कोरोना संक्रमण से लड़ते हुए कई जिंदगियां खो रही हैं। इस अस्पताल में शिशु किशिशियन का काम करने वाले ओम प्रकाश चौहान को यहां ड्यूटी के दौरान कोरोना संक्रमण ने जकड़ लिया। इस अस्पताल में बिस्तर नहीं मिला, तो प्राथमिक अस्पताल गए। हालत बिगड़ रही थी, ओम प्रकाश के भाई विवेक ने अंबेडकर अस्पताल के कर्मचारियों से फिर से बात कर मदद मांगी तो वेंटिलेटर देने का अश्वासन मिला।

ओम प्रकाश को डूंडा के मुख्य अस्पताल में रखा गया था।

ओम प्रकाश को डूंडा के मुख्य अस्पताल में रखा गया था।

भाई की जान बचाओ वो भागता रहा लेकिन …
इसके बाद विवेक ओम प्रकाश को लेकर अस्पताल आया तो डॉक्टर ने कहा कि वेंटिलेटर नहीं है। एक घंटे तक विवेक एक चेंबर से दूसरे चेंबर, कभी ग्राउंड फ्लोर तो कभी सेकंड फ्लोर मदद के लिए भागता रहा। उधर, ओम प्रकाश की सट्रेचर पर लगे-पास मौत हो गई। इसके बाद अस्पताल वालों ने विवेक से कहा कि जब मरीज हमारे यहाँ एडमिट ही नहीं पाए जाते तो हम मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं दे सकते। चूँकि आपके भाई संविदा पर काम करता था, इसलिए मुआवजे का प्रवधान नहीं है, बीमा के रुपए क्लेम के लिए आवेदन कर देना …। ये जवाब विवेक को उस अस्पताल के लोग दे रहे थे, जहां कोविड ड्यूटी में उसके भाई बिना वेतन मिले ही बस अपना फर्ज अदा कर रहे थे। “

ओम प्रकाश ने ये आई कार्ड अपने भाई को दिया था, इस उम्मीद में कि इसे दिखाने से मदद मिली।

ओम प्रकाश ने ये आई कार्ड अपने भाई को दिया था, इस उम्मीद में कि इसे दिखाने से मदद मिली।

ओम ने भाई से एकर्न्स में कहा- मेरा आईकार्ड दिखा, मदद मिलेगी
12 तारीख को संभावित होने के बाद अंबेडकर अस्पताल से मदद नहीं मिली तो संदिग्ध होने के तीन से चार दिन तक डूंडा के प्राथमिक अस्पताल में ओम का इलाज चल रहा था। अचानक 17 अप्रैल को अचानक ओम को खून की उल्टियां होने लगीं। वायरस उसके शरीर में खतरनाक असर दिखा रहा था। विवेक लगभग 6 घंटे तक वेंटिलेटर बेड के लिए कोशिश करते रहे। फोन पर अंबेडकर अस्पताल के लोगों ने कहा था कि वेंटिलेटर खाली है। एर्न्स के बारे में विवेक ओम के साथ छोड़ दिया गया। रास्ता में ओम ने अपना आईकार्ड विवेक को देकर कहा- इसे अंबेडकर अस्पताल में प्रदर्शित करना, वह लोग मदद करेंगे। जब विवेक ने अंबेडकर अस्पताल के एक डॉक्टर से आईकार्ड्स मदद मांगी, तो जवाब मिला- स्टाफ है तो क्या हुआ जब बिस्तर खाली नहीं तो कहां से दें?

जीवन की आस में कोरोना से लड़ते ओम प्रकाश का परिजनों ने कोविड प्रोटोकॉल के तहत अंतिम संस्कार करवाया।

जीवन की आस में कोरोना से लड़ते ओम प्रकाश का परिजनों ने कोविड प्रोटोकॉल के तहत अंतिम संस्कार करवाया।

परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दे सरकार
भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष अमित साहू ने इस मामले में सरकार से मांग की है। अमित ने कहा कि संक्रमण के नियमों के बीच काम करने वाले डाक्टर्स, तेजिशियन, नर्सों और अन्य कर्मचारियों का बीमा करें, मृत्यु होने पर तत्काल परिवार को मुआवजा दे। उन्होंने परिवार के एक सदस्य को शासकीय नौकरी देने की मांग की है। मेडिकल कालेज में पिछले एक साल से कोरोना जांच कर रहे तक्शिशियन ओम प्रकाश चौहान की मौत के बाद भी सरकार को दैनिक वेतनभोगी कर्मियों की कोई फिक्र ही नहीं है और ना ही उसके परिवार की सुध लेने की चिंता। स्वास्थ्य विभाग के लिए इससे ज्यादा शर्मनाक बात हो सकती है।

ओम प्रकाश को तीन महीने से वेतन नहीं मिला था, लेकिन वो बेफिक्री से काम पर लगा हुआ था, अब इसकी परिजन को सरकार से मदद की आस है।

ओम प्रकाश को तीन महीने से वेतन नहीं मिला था, लेकिन वो बेफिक्री से काम पर लगा हुआ था, अब इसकी परिजन को सरकार से मदद की आस है।

50 लाख का बीमा योजना ठप, यह शुरू नहीं कर सकी सरकार
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों ने बताया कि पिछले साल जब को विभाजित अपने चरम पर था तो सरकार ने स्वास्थ्यकर्मियों को कोरोना संक्रमण से मौत पर 50 लाख रुपये का बीमा कवर देने की योजना शुरू की थी। लेकिन इस योजना का कॉन्ट्रैक्ट मार्च के महीने तक ही था। तो अब ये कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने की वजह से ये योजना भी ठप हो गई है। अंबेडकर अस्पताल के कोविड वार्ड के एक डॉक्टर ने बताया कि गुजरात सरकार ने कोविड ड्यूटी कर रहे डॉक्टर्स को तीन महीने तक सैलेरी में 20 हजार रुपए प्रतिमाह का इंसेंटिव दिया। महाराष्ट्र सरकार ने सरकार के लिए काम करने वाले बॉन्ड में छूट दी। मगर छत्तीसगढ़ में ओम प्रकाश जैसे कर्मचारी बिना वेतन के काम कर रहे हैं और इस तरह से जीवन से अपना हक खो रहे हैं।

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