Harshit India news

breaking news | Bhopal local news | Madhya Pradesh news | Indore news

बेटे नहीं आए दो दिन मर्च्यूरी में पड़ा रहा शव: पिता का शव भेजने अस्पताल ने परिजनों के आने की शर्त रखी, गंभीर परिवार ने मनाया तो 50 घंटे बाद हो गए अंतिम संस्कार

  • हिंदी समाचार
  • स्थानीय
  • छत्तीसगढ
  • छत्तीसगढ़ गरियाबंद कोविद 19 समाचार: कोरोना संक्रमण की असंवेदनशीलता के कारण 50 घंटे के बाद बूढ़े व्यक्ति के शरीर का दाह संस्कार

विज्ञापन से परेशान हैं? बिना विज्ञापन खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

(*50*)गरियाया हुआ28 मिनट पहले

  • कॉपी लिस्ट

(*50*)प्रशासन की टीम लगभग 50 घंटे बाद रात 9 बजे वृद्ध का अंतिम संस्कार करा सकी।

छत्तीसगढ़ में कोरोना संक्रमण के बीच भावनाहीनता के नए-नए मामले सामने आ रहे हैं। गरियाबंद में संक्रमण से वृद्ध की मौत हो गई। अस्पताल प्रबंधन ने पहले तो 121 किमी दूर शव भेजने के लिए परिजनों के आने की शर्त रख दी। ईमानदार परिवार ने अपने हालात का हवाला देते हुए जाने से मना कर दिया। प्रशासन की टीम सेलखा पहुंची तो मर्चुरी से शव वाहन में रखने के लिए कोई तैयार नहीं हुआ। फिर किसी तरह 50 घंटे बाद रात 9 बजे अंतिम संस्कार किया गया।

देवभोग के बरबहली गांव निवासी जयराम नेताम (64) को विभाजित कैर सेंटर में भर्ती कराया गया था। वहां तबीयत ज्यादा बिगड़ी तो रविवार को गरियाबंद जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया, लेकिन कुछ घंटों बाद शाम को उनकी मौत हो गई। अस्पताल प्रबंधन ने गांव शव भेजने के लिए परिवार के किसी सदस्य के आने की शर्त रखी। इस पर बेटे भारत और परमानंद ने बताया कि परिवार के सभी 6 सदस्य पॉजिटिव हैं। उनकी आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं है।

प्रशासन की टीम सुबह पहुंची, रात 8 बजे शव मिला
दोनों बेटों ने सोमवार शाम को लिखित रूप से प्रशासन को दे दिया गया कि वह शव ले जाने और अंतिम संस्कार करने में सक्षम नहीं हैं। उसी रात एसडीएम आशीष टोप्पो ने देवभोग तहसीलदार समीर शर्मा को अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी सौपी। आदेश के मुताबिक मंगलवार को नायब तहसीलदार अभिषेक अग्रवाल तीन अन्य राजस्व कर्मियों के साथ जिला अस्पताल पहुंचे। वहां घंटों की मशक्कत के बाद रात 8 बजे शव मिला तो अंतिम संस्कार किया गया।

पालिका का स्वीपर शव छोड़कर भागा, प्राथमिक कहा गया
जिला अस्पताल की मॉर्चुरी से शव को वाहन तक ले जाने के लिए कोई स्वीपर नहीं मिल रहा था। शव वाहन का चालक 4 बजे पहुंचा तो नगर पालिका के जिस स्वीपर की ड्यूटी थी, वह शव को छोड़कर भाग गया। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग में निर्माण कार्य कर रही एजेंसी के स्वीपर को रात 8 बजे अस्पताल बुलाया गया। उसने शव को वाहन तक पहुंचाया। वहीं सिविल सर्जन जीएस टंडन ने कहा, स्वीपर भी है, ड्राइवर भी है। हमने पूरा सहयोग किया।

टीम समय पर गरियाबंद पहुंच गई थी। निर्धारित स्थान पर चिता और अन्य आवश्यक सामान का प्रबंधन भी करवा लिया गया था। कई घंटे बाद भी शव नहीं मिला। फिर शाम 7.30 बजे बारिश भी शुरू हो गई। इस पर टीम रवाना हुई। रात करीब 8.30 बजे किसी तरह शव को शमशान घाट पहुंच कर अस्पताल प्रबंधन ने सूचना दी। तब तक टीम 40 किमी दूर आ चुकी थी। वह फिर लौट आए और रात करीब 9 बजे अंतिम संस्कार करवा सकी।
– समीर शर्मा, तहसीलदार, देवभोग

खबरें और भी हैं …

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

%d bloggers like this: