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नक्सलियों ने 15 साल के छात्र की हत्या की: ऐसा पहली बार जब इतनी कम उम्र वाले की हत्या, बौखलाए नक्सलियों ने पुलिस का मुखबीर बताकर सुकमा में दो युवकों को मार दिया।

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  • पहली बार जब इस तरह के एक जवान की हत्या की गई थी, तो गुस्साए नक्सलियों ने सुकमा में दो युवकों को मार डाला था, पुलिस के मुखबिर होने का दावा किया था

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बस्ता9 मिनट पहले

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21 वर्षीय मड़कम अर्जुन को नक्सली रात को ही घर से जंगल की ओर ले गए थे और उनकी हत्या कर दी।

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सलियों ने अब एक युवक और एक स्कूल के छात्र को मौत के घाट उतार दिया है। पूरा मामला जिले के जगरगुंडा थाना के मिलमपल्ली इलाके का बताया गया है, जहां से दोनों का शव रोड से 500 मीटर की दूरी से बरामद किया गया है। पुलिस के मुताबिक नक्सलियों ने देर रात ही दोनों की हत्या कर दी थी। दोनों का नाम मड़कम अर्जुन और ताती हड़मा है। माओवादियों ने मौके पर पर्चे भी फेंके हैं और दोनों पर पुलिस मुखबिरी का आरोप लगाया है।जित के एसपी केएल ध्रुव ने घटना की पुष्टि की है। वर्तमान में मामले की जांच की जा रही है।

घटना के मुताबिक 15 वर्षीय ताती हड़मा और 21 वर्षीय मड़कम अर्जुन को नक्सली रात को ही घर से जंगल की ओर ले गए थे और उनकी हत्या कर दी। अर्जुन का भाई बस्तरिया बटालियन में जवान है, जबकि ताती हड़मा के पिता सहायक आरक्षक रह चुके हैं और नक्सलीडिंग के बाद ही उन्होने नौकरी छोड़ दी थी।

ऐसा पहली बार जब 15 साल के बच्चे को मारा गया

अमूमन नक्सली छात्रों का, बच्चों का उपयोग अपने लाभ के लिए करते हैं। इन बच्चों का ब्रेन वाश कर उन्हें अपने संगठन में भर्ती करते हैं। उन्हें सूचनाएँ, सामान लेने-देने का काम करते हैं। इस तरह 15 साल के छात्र की हत्या की बात नई है। पुलिस सूत्रों का मानना ​​है कि लगातार फोर्स नक्सलियों पर दबाव बना रहा है। गांवों में उनके सूचना तंत्र को तोड़ दिया जा रहा है। इससे नक्सली बौखला गए हैं और लगातार निर्दोष ग्रामीणों को मार रहे हैं। इसके पीछे उनके मंशा गांवों में दहशत फैलाना है, जिससे उनके खिलाफ आवाज नहीं उठाई गई।

चार दिन में तीन हत्याएं

इससे पहले शनिवार को भी सुकमा के दोरनापाल-जगरगुंडा इलाके में ही नक्सलियों ने एक शख्स की हत्या की सजा दी थी। जिसे मारा गया वह इस इलाके में सड़क निर्माण के काम में लगा कर्मचारी था। उस दौरान नक्सलियों ने दो गाड़ियों को भी आग के हवाले कर दिया था। इतना ही नहीं नक्सली मौके पर काम कर रहे 3 लोगों को अगवा किया था और अपने साथ जंगल की ओर ले गए थे, हालांकि दो को बाद में छोड़ दिया गया था और एक की हत्या कर दी गई।

थाने से आधा किलोमीटर की दूरी पर 2 जवानों की हत्या

गुरूवार को जिले के ही भेज्जी थाने से सिर्फ आधा किलोमीटर दूर पर पुलिस के दो जवानों की हत्या कर दी गई थी। जिन पुलिसवालों की हत्या हुई है वे भेज्जी थाने में ही तैनात थे। उस दौरान ग्रामीण सूत्रों ने बताया था कि हत्या के पीछे नक्सलियों की स्मॉल एक्शन टीम का हाथ हो सकता है। इस तरह की टीमें कैंप से बाहर निकले पुलिस के लोगों पर नजर रखती हैं। हालांकि पुलिस ने उस दौरान कहा था कि घटना में नक्सलियों के शामिल होने की कोई जानकारी नहीं है

3 अप्रैल को 23 जवानों की हुई शहादत

दंतेवाड़ा में शनिवार को भी नक्सलियों के लगाए गए IED की चपेट में आने से एक ग्रामीण की मौत हुई थी। उस दौरान जिले के एसपी ने बताया था कि नक्सली पूरी तरह से बौखला हुए हैं। वहीं 3 अप्रैल को भी नक्सलियों ने बीजापुर जिले में सुरक्षबलों पर हमला किया था। वहीं सीआरपीएफ के एकांडो राकेश्वर सिंह को नक्सलियों ने बंधक बना लिया, जिसे बाद में छोड़ दिया गया।

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