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6 घंटे से वेंटिलेटर सपोर्ट मांग रहे थे परिजन: तेजिशियन जहां काम करता था वहां पर वेंटिलेटर नहीं मिला, मौत

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रायपुर9 मिनट पहले

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ओमप्रकाश चौहान।

मेडिकल कॉलेज में पिछले एक साल से कोरोना जांच कर रही किशिशियन की शनिवार को कोरोना से मौत हो गई। तेजिशियन के परिजन 6 घंटे से अंबेडकर अस्पताल के डॉक्टरों से वेंटिलेटर की मांग कर रहे थे। तेजिशियन को लेकर एक घंटे तक अस्पताल में खड़े हुए थे, लेकिन वेंटिलेटर सपोर्ट नहीं मिला।

तेजिशियन ने वहीं दम तोड़ दिया। तेजिशियन को अपने ही अस्पताल में वेंटिलेटर बेड नहीं मिल पाया है। विवेक ने बताया कि पिछले तीन महीने से भैया को वेतन नहीं मिला था। मृत्यु के बाद भी अब तक कोई मदद नहीं मिली है। जबकि कोरोना वारियर्स के परिवार को लाखों का मुआवजा देने की बात कही गई थी। बिलाईगढ़ कारीभाठा निवासी विवेक चौहान ने बताया कि उनका बड़ा भाई ओमप्रकाश चौहान (33) स्वास्थ्य विभाग में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी था। पिछले एक साल से कोविड ड्यूट कर रहे थे। वे मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कोरोना सैंपल की जांच करते थे। पिछले एक साल से लगातार कोविड ड्यूटी कर रहे थे। 6 दिन पहले उन्हें बुखार आया था। दूसरे दिन की रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो घर पर ही होम आइसोलेशन पर थे। 15 अप्रैल को सांस लेने में तकलीफ बताए।

अंबेडकर अस्पताल में बिस्तर पता किया, वहाँ फूल था। उनसे सेजबहार के एक निजी अस्पताल ले आए। जहां उनका इलाज चल रहा था। संक्रमण बढ़ते जा रहा था। 16 तारीख की सुबह ओमप्रकाश के सीनियर से संपर्क किया और तबीयत के बारे में बताया। वेंटिलेटर सपोर्ट मांगा सीनियर ने बताया कि वेंटिलेटर खाली नहीं है। कोशिश कर रहे हैं। 6 घंटे तक कोशिश करते रहे। फिर फोन आया कि अंबेडकर अस्पताल में आ जाए, वेंटिलेटर की व्यवस्था की है। दोपहर को ओमप्रकाश को लेकर अस्पताल पहुंचे। एक घंटे तक इंतजार किया गया, वेंटिलेटर खाली नहीं था। एक घंटे बाद जब भीतर ले जा रहे थे, तो भाई की मौत हो गई। अगर समय में वेंटिलेटर मिल जाता है तो मेरा भाई जिंदा रहता है।

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