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खुद ही पीछे हटे निजी अस्पताल: सरकार ने कोरोना मरीज की मौत के बाद शव सुरक्षित रखने अधिकतम 2500 लेने की अनुमति दी थी, निजी अस्पतालों ने कहा अब वह भी नहीं करेंगे

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रायपुर36 मिनट पहले

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मरीज की मौत के बाद परिजनों से पैसे लेने को अमानवीय बताकर आलोचना की जा रही थी। विपक्ष इसपर काफी सहयोगी था।

प्रदेश के निजी अस्पताल कोरोना से मरीज की मौत के बाद शव को सुरक्षित रखने के लिए अब मरीज के परिजनों से कोई पैसा नहीं लगेगा। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और हास्पटल बोर्ड ने आज इसका फैसला किया है। स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना मरीजों के शव को सुरक्षित रखने के लिए अधिकतम 2500 रुपये लेने की अनुमति दी थी।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ। महेश सिन्हा ने बताया, स्वास्थ्य विभाग ने निजी अस्पतालों को कोरोनाफार्म रोगी की मृत्यु की स्थिति में शव को सुरक्षित बैग में रखने के लिए 2500 रुपये लेने की अनुमति दी थी। भारतीय मेडिकल एसोसिएशन और हास्पटल बोर्ड के सामने यह राशि भी नहीं लेने का प्रस्ताव रखा गया था। उसे सभी ने स्वीकार कर लिया है। अब से कोई निजी अस्पताल रोगी की मृत्यु के बाद उसके परिजनों से यह राशि नहीं लेगा।

दिसंबर 2020 में जारी हुआ था आदेश था

स्वास्थ्य विभाग ने दिसंबर 2020 में कोरोना मरीजों की मौत के बाद शव के पालन, स्टोरेज और प्रबंधन के लिए अधिकतम 2500 रुपये ही लेने का आदेश जारी किया था। स्वास्थ्य विभाग का कहना था, बार-बार शिकायत मिल रही थी कि निजी अस्पताल मृतक के परिजनों से अत्यधिक राशि ले रहे हैं। इसको रोकने के लिए अधिकतम 2500 रुपये ही लेने का आदेश दिया गया था।

विपक्ष के निशाने पर यह आदेश था

आदेश सामने आने के बाद से ही विपक्षी था। भाजपा नेताओं का कहना था, सरकार मरने के बाद भी कोरोना मरीजों से पैसे वसूल रही है। पिछले एक पखडिंग से यह हमला अधिक तेज हुआ है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को कहना पड़ा, इस आदेश का परीक्षण किया जाएगा।

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