Harshit India news

breaking news | Bhopal local news | Madhya Pradesh news | Indore news

अस्पताल की मर चुकी संवेदनाएँ: भूके-प्यासे परिजन सुबह से बैठे हैं, अभी तक डिज़ाइनर नहीं मिले; प्रबंधन पर एफआईआर लेकिन कार्रवाई नहीं, अफसरों को भी अब याद आ गया

विज्ञापन से परेशान है? बिना विज्ञापन खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

रायपुर3 घंटे पहले

  • कॉपी लिस्ट

रायपुर के अंबेडकर अस्पताल की मर्चुरी के बाहर मृतकों के परिजन सुबह से भूके-प्यासे इस आस में हैं कि कम से कम अपनों की लाशें तो मिल जाएगी। लेकिन रविवार की शाम होने को है और अब तक वे शव नहीं सौंपे गए हैं। इंतजार में बैठे परिजन का कहना है कि वे अपनों को अस्पताल में जान बचाने के लिए लाए थे, जलाने के लिए नहीं।

दरअसल राजधानी अस्पताल का नाम एक प्राथमिक को विभाजित अस्पताल में आग लगने से एक मरीज की जिंदा जलकर जबकि चार की दमने से मौत हो गई थी। हादसे में 5 लोगों की मौत होने का दावा शनिवार रात को प्रशासन ने किया था। शव रात को ही अस्पताल से निकलवा लिए गए थे, पोस्टमार्टम में देरी की वजह से परिजन बेबस होकर पार्थिव देह मिलने के इंतजार में हैं।

तस्वीर रायपुर के मर्चुरी के बाहर मृतकों के परिजन बेबसी में सिर्फ इंतजार करते दिखे।

तस्वीर रायपुर के मर्चुरी के बाहर मृतकों के परिजन बेबसी में सिर्फ इंतजार करते दिखे।

रास्ता में दौड़ना में कुछ की मौत के दौरान

5 मौतों की आधिकारिक पुष्टि के बाद रविवार की सुबह राजधानी अस्पताल के मरीजों में से 6 के शव लाए गए। सूत्रों ने बताया कि एक मरीज की मौत आग लगने की वजह से जान बचानेकर भागने के दौरान हो गई। हालांकि इस पर आधिकारिक तौर पर कुछ भी कहने से अफसर बच रहे हैं। शनिवार को किए गए सरकारी दावे के मुताबिक राजधानी अस्पताल में लगी आग की वजह से कोरोना मरीज रमेश साहू की जलने, ईश्वर राव, वंदना गजला, देवकी सोनकर, और भाग्य श्री की दमने की वजह से मौत की वजह बताई गई थी।

वहां से लेटर होगा तो पोस्टमार्टम होगा

पूरी रात अपनों के जलकर मर जाने का बोझिल गम झेल रहा परिजनों को पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के दौरान सरकारी लेट लतीफी से दो चार होना पड़ रहा है। मृतक रमेश साहू के भाई प्रिय प्रकाश ने बताया कि सुबह से मैं पूछ रहा हूं कि जब हमें बॉडी मिलेगी, तो तरह-तरह की प्रक्रियाएं समझा दी जाती हैं। कहने देते हैं, पुलिस से जानकारी नहीं आई, तहसीलदार का लेटर नहीं है, स्टाफ कम है बॉडी ज्यादा। सिर्फ मुझे ही नहीं ये बातें सभी मृतकों के परिजनों को परेशान किए हुए हैं, क्या करें।

आग लानगे के बाद कोई वैकल्पिक व्यवस्था न होने की वजह से देर शाम तक बुजुर्ग यूं बैठे रहे।

आग लानगे के बाद कोई वैकल्पिक व्यवस्था न होने की वजह से देर शाम तक बुजुर्ग यूं बैठे रहे।

एफआईआर प्रबंधन के नाम पर दर्ज, कार्रवाई अब तक किसी पर भी नहीं

महिला उत्पीड़न के मामले में एक दिन में केस कोर्ट पहुंचुंचाने का रिकॉर्ड रखने वाली छत्तीसगढ़ पुलिस अक्सर ऐसे हादसों में त्वरित कार्रवाई करने का कोई रिकॉर्ड पेश नहीं कर पाती। इस मामले में भी मृतकों के परिजनों को कई तरह की पेचीदगियां बताई जा रही है। कागजी कार्रवाई में लगने वाला समय पीड़ितों को सिर्फ और सिर्फ परेशान कर रहा है। राजधानी अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ टिकरापारा थाने में जब तक प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है, लेकिन अब तक कार्रवाई किसी के भी खिलाफ नहीं हुई है, अफसर कह रहे हैं छानबीन जारी है।

राजधानी अस्पताल में आग लगने के बाद मरीज के घर वाले उन्हें शिफ्ट करने में लगे रहे।

राजधानी अस्पताल में आग लगने के बाद मरीज के घर वाले उन्हें शिफ्ट करने में लगे रहे।

अब सभी अस्पतालों का फायर ऑडिट याद आ गया है

अब संचेनालय स्वास्थ्य सेवाओं के दफ्तर से एक आदेश जारी हुआ है। यह छत्तीसगढ़ के सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को जारी किया गया है। इसमें लिखा गया है कि शासकीय और प्राथमिक अस्पतालों की फायर सेफ्टी ऑडिट की जानी है। सभी केंद्रीय अस्पताल फायर ऑडिट किए जाने की जानकारी शेफ मेडिकल अफसर को दें। सरकारी अस्पतालों का भी फायर ऑडिट होगा। आदेश में ये भी कहा गया है कि प्राथमिक अस्पतालों में नर्सिंग होम एक्ट के तहत, सुविधा, प्रारूप, दस्तावेज की छापा मारकर जांच करें। हर तीन महीने में इस तरह की जांच होनी चाहिए।

चित्रा रायपुर के राजधानी अस्पताल की है, यहीं शनिवार को हादसा हुआ।

चित्रा रायपुर के राजधानी अस्पताल की है, यहीं शनिवार को हादसा हुआ।

इस तरह हुआ था हादसा

पचपेड़ी नाका क्षेत्र में राजधानी का नाम विभाजित अस्पताल में शनिवार की दोपहर आग लगी। इसका कारण अब तक शॉर्ट सर्किट को बताया जा रहा है। पूर्व जांच में अस्पताल में आग बुझाने के कोई इंतजाम, इमरजेंसी एग्जिट और वेंटिलेशन का प्रॉपर इंतजाम नहींं मिला है। रात के वक्त जिला कलेक्टर डॉ। एस भारतीदासन और सीनियर एसपी अजय यादव घटनास्थल पर पहुंच गए थे। हादसे के बाद 19 मरीजों के दूसरे अस्पताल और 10 को यशोदा अस्पताल भेजा गया। मृतकों के परिजनों के लिए सरकार ने 4-4 लाख रुपये का मुआवजा देने का एलान किया है।

खबरें और भी हैं …

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

%d bloggers like this: