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को विभाजित रोगियों से भरे अस्पताल में आग: एक जिंदा जला, चार का दम घुटा; धपरते आईसीयू से निकाला, सड़क पर लगाई आक्सीजन, 3 घंटे बाद दूसरे अस्पताल में

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रायपुर6 घंटे पहले

  • पुलिसिया एसे; पीसीबीई किट ढूंढती रही पुलिस, दो घंटे बाद मिली फिर भीतर घुसी
  • सरकारी लापरवाही; संकरा रास्ता, फायर सेफ्टी नहीं फिर भी 35 बिस्तर का रेगायन

राजधानी अस्पताल के कोविड आईसीयू में आग लगने की सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन कोविड प्रोटोकाॅल की वजह से बुझा के लिए आईसीयू के भीतर नहीं घुसी। अफसर थोकई किट ढूंढते हुए, जो दो घंटे बाद मिला। किट पहनकर पुलिस टीम भीतर घुसी, तब तक आईसीयू खाली हो चुका था। शव उतारे जा चुके थे, दूसरे को विभाजित मरीज जो दमने की वजह से और बीमार या बेहोश हुए थे, उन्हें भी उतराारा जा चुका था।

टिकरापारा टीआई संजीव मिश्रा ने बताया कि जिस फ्लोर में आग लगी, उसकी चिंता से जांच की गई है। रविवार को फोरेंसिक जांच होगी। इसके बाद प्रबंधन के खिलाफ जुर्म दर्ज किया जाएगा। टीआई ने भर्ती मरीजों के परिजन से बातचीत के आधार पर बताया कि अस्पताल की दूसरी मंजिल पर स्थित एसआईसीयू में हादसा हुआ था। अब तक यही पता चला है कि 34 मरीजों की भर्ती हुई है। एक मरीज के बिस्तर के ऊपर पंखा लगा था, जो शॉर्ट सर्किट से जला और मरीज के ऊपर ही गिर गया। इससे पूरे आईसीयू में धुंआ फैल भर गया। एक मरीज के जिंदा ही जलने की सूचना है। इस वार्ड में ड्यूटी कर रहे पैरामेडिकल स्टाफ जीबीई किट पहनने की वजह से भाग नहीं मिला और कई की हालत खराब है। उनका भी इलाज चल रहा है।

पंचनामे के बाद ही बाहर निकाल दिया जाएगा शव

अस्पताल के नीचे मौजूद परिजन ने जब अपने संबंधी के शव के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि पंचनामे के बाद ही बॉडी निकोल जाएगी। लेकिन देर शाम चुपचाप पिछले दरवाजे से शव उतारे गए। एक ही गाड़ी में तीन शवों को ऐसे ले जाया गया।

फोरेंसिक जांच के लिए लिंग रात सील किया गया अस्पताल
अस्पताल की फोरेंसिक जांच कराई जाएगी। रविवार को फोरेंसिक टीम बुलाई गई है, जो एसआईसीयू में पूरी हादसे को जांचेगी। इसके लिए अस्पताल को देर रात पुलिस ने सील कर दिया है। मरीजों को दूसरे अस्पतालों में भेजने की सूचना है। अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ लापरवाही से मरीजों की मौत का मामला दर्ज करने की तैयारी है। हालांकि रात 12 बजे तक इस मामले में पुलिस एफआईआर नहीं कर पाई है। आला अफसरों ने बताया कि इस मामले में विधि विशेषज्ञों की राय ली जा रही है। संभवत: रविवार को सुबह इस मामले में पहली सूचना रिपोर्ट दर्ज की जा सकेगी।

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आईसीयू का एक ओर का गिलास तोड़ा गया, फिर जाकर ओवर में आई आग।

सरकारी लापरवाही; संकरा रास्ता, फायर सेफ्टी नहीं फिर भी 35 बिस्तर का रेगायन
पचपेड़ीनाका स्थित जिस राजधानी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में आग से 5 कोरोना मरीजों की जान गई है, भास्कर टीम ने हादसे के बाद मौके की पड़ताल की तो पता चला कि वहां फायर सेफ्टी सिस्टम ही नहीं था। यह नहीं है, अस्पतालों में स्थिति के लिए अलग रास्ता जरूरी है। इस अस्पताल में भीतर जाने और बाहर आने का एक ही संकरा रास्ता है। हादसे के बाद किसी तरह की इमरजेंसी एग्जिट नहीं थी, इसलिए आग लगने के बाद मरीजों को तत्काल बाहरर नहीं खींचा जा सका। हादसे से एक बड़ा सवाल यह उठ गया है कि जब इमरजेंसी एग्जिट नहीं थी, फायर सेफ्टी नहीं थी, जब आखिरकार सरकारी अमले ने नर्सिंग होम एक्ट में इस अस्पताल का पंजीकरण कैसे कर दिया? इस सवाल को लेकर जिले के स्वास्थ्य अफसर ही नहीं, नर्सिंग होम एसोसिएशन और अस्पताल प्रबंधन भी यही कहकर बचता रहा कि जांच के बाद ही यह कहेगा।

भास्कर की पड़ताल में यह भी पता चला कि स्वास्थ्य विभाग नर्सिंग होम एक्ट के तहत अस्पतालों में जरूरी संसाधन की जांच कर ही पंजीयन करने के दावे करता रहा है। अस्पताल में अंदर और बाहर जाने का अलग-अलग रास्ता होना जरूरी है, लेकिन अस्पताल में ऐसा नहीं है। केवल एक ही रास्ता है, जो काफी संकरा है। अस्पताल में कोई वेंटिलेशन भास्कर टीम को नजर नहीं अया। जिस आईसीयू में आग लगी, वहां से धुआं बाहर निकालने के लिए सामने और पीछे लगे कांच को तोड़ना पड़ा। जबकि इस अस्पताल में हमेशा काफी मरीज भर्ती रहते हैं।

पिछले साल से जबसे कोरोना के मरीज आए, तब से कोरोना रोगी भर्ती करने लगे हैं। अस्पताल रिंग रोड नंबर एक के बिल्कुल किनारे है, जहां पार्किंग के लिए बेमेंट है। बेसमेंट का उपयोग स्टोर के रूप में किया जा रहा है। मरीज व परिजनों को अपनी बाइक व कार सर्विस रोड में खड़ी करनी होती है। अस्पतालों के पंजीयन में भी यह महत्वपूर्ण है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग का सिस्टम ऐसे अस्पतालों को मान्यता देने के पीछे नहीं हटता, यह इसका बड़ा उदाहरण है। डाक्टरों का ही दावा है कि राजधानी में बिना पार्किंग व जरूरी सुरक्षा उपाय वाले 20 से ज्यादा अस्पताल हैं। उनमें से किसी में भी इस तरह का हादसा हुआ तो नतीजे भयावह भी हो सकते हैं।

बच्ची चीख रही थी-कोई मेरी दादी को बाहर निकाल लो, कंबल से लपेटकर ऐसे निकाला

मौत और मायूसी के मंजर में परेशान परिजन मदद के लिए गुहार करते रहे लेकिन कोई सुनने को तैयार न था। परिजन जानते थे कि अस्पताल में पहले ही माले में उनके घर के लोग भर्ती हैं। लेकिन उन्हें बाहर के बारे में कौन करेगा … कैसे होगा कुछ भी नहीं पता था … जो दौड़कर जब तक आ गए वे खुद को और बहुत ज्यादा बदकिस्मत मान रहे थे क्योंकि वह अपने ही परिजनों की मदद नहीं कर पा रहे थे। कोरोना अस्पताल होने के कारण बाहर खड़े लोग … मदद करने के अंदर अंदर तक नहीं जा सके।

जांच के बाद ही बताएगा

अस्पताल में आवश्यक सुविधा थी या नहीं, यह जांच के बाद पता चलेगा। आगजनी की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है।
डॉ। मीरा बघेल, सीएमएचओ

फायर सेफ्टी सिस्टम था या नहीं, यह जांचने के बाद ही पता चलेगा। पंजीकरण जांच के बाद ही करते हैं।
डॉ। विकास अग्रवाल, अध्यक्ष आईएमए रायपुर

घटना की जानकारी ले रहे हैं। कितने मरीजों को कहां शिफ्ट किया गया है, इसकी जानकारी ली जा रही है।
डॉ। अनिंदो राय, निदेशक राजधानी अस्पताल

स्वास्थ्य की सहजता; पोर्टल में 27 मरीज दर्ज किए गए जबकि अस्पताल में 35 का चल रहा था
राजधानी अस्पताल में आग हादसे के साथ ही प्राथमिक अस्पतालों में कोरोना मरीजों के लिए बने सरकारी आश्रय प्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्वास्थ्य के ही पोर्टल में इस अस्पताल में शनिवार शाम 6 बजे तक भर्ती मरीजों की संख्या 27 बताई जा रही है। लेकिन यहां जो आईसीयू में हादसा हुआ, वहीं 34 मरीज थे। मरीजों के परिजन का दावा है कि आईसीयू के भीतर-बाहर सहित यहां 50 से ज्यादा को विभाजित मरीजों का इलाज चल रहा था। स्वास्थ्य विभाग के पोर्टल में इस अस्पताल के आंकड़ों को शनिवार को दोपहर 12 बजकर 38 मिनट पर अपडेट किया गया। स्वास्थ्य के बिस्तर अवेलेबिलिटी केयरिंग सिस्टम (बिस्तरों की उपलब्धता) के मुताबिक अस्पताल की कुल बिस्तर क्षमता 35 बताई गई है।

इसमें ऑक्सीजन सपोर्ट 14 बेड हैं। पोर्टल के मुताबिक आईसीयू में इस अस्पताल में कुल 8 बिस्तर बताए जा रहे हैं, जिनमें से एक भी खाली नहीं है। पहला सवाल यही है कि अगर अस्पताल में 34 मरीज थे, तो पोर्टल में केवल 27 मरीज ही क्यों बताए जा रहे हैं? अस्पताल में पोर्टल के मुताबिक 8 बिस्तर खाली हैं। दरअसल, कोरोना मरीजों की सुविधा के लिए शहर में 74 प्राथमिक अस्पतालों को इलाज के लिए अनुमति दी गई है। लेकिन अस्पताल कोरोना मरीजों की वास्तविक संख्या को वास्तविक समय पर अपडेट ही नहीं कर रहे हैं। इस गड़बड़ी की वजह से भी राजधानी में मरीजों को बिस्तर नहीं मिल रहे हैं।

रायपुर सीएमएचओ ने रात 10 बजे इस तरह स्वीकार किया हैडसे को
राजधानी अस्पताल से 29 मरीज बाहर निकाले गए। इनमें से 10 को यशोदा अस्पताल में शिफ्ट किया गया। 19 मरीजों को अलग-अलग अस्पतालों में ले जाया गया। सभी रोगियों से स्वास्थ्य विभाग की टीमें बात कर रही हैं। उनके स्वास्थ्य और इलाज के लिए संबंधित अस्पतालों को सभी आवश्यक सहायता की जाएगी।
– डॉ। मीरा बघेल, सीएमएचओ

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