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आखिरकार खोजी पंछी का राज खुला: तेलंगाना में हुई रेस का कबूतर भटककर बस्तर आया था, विदेशों और नक्सलियों से संबंध की चर्चा थी।

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कोंडागांव2 घंटे पहले

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चित्रा कोंडागांव में रह रहे कब कबूतर की है जिस पर कई तरह की बातें की जा रही थीं। अब यह अपने मालिक का इंतजार है।

कोंडागांव में तीन दिन से एक कबूतर की बड़ी चर्चा है। अब ये राज खुल गया कि पैरों में अजीब से विदेशी मुद्रा वाला ये कबूतर आखिर आया कहां से था? चेन्नई के वेटेनरी डॉ। ए चंद्रशेखर से पता चला कि यह कबूतर तेलंगाना से है। वहाँ शिरपुर ब्लॉक में 8 अप्रैल को कबूतरों की रेस हुई। इसी में भक ये कबूतर बस्तर के कोंडागांव आ गया। कोंडागांव के पशु चिकित्सा विभाग के अफसरों ने कबूतर के मालिक का भी पता लगा लिया। पी.वी.एस.सेल्वम नाम के आदमी से बात की गई तो पता चला कि वह उनका कबूतर है। उन्होंने कहा कि वे अपने कबूतर को वापस लेने आएंगे। सेल्वम अब तेलंगाना से कोंडागांव इस कबूतर को लेने आएंगे क्योंकि ये वहां कबूतरों की अवशेष में होता है।

यह पूरा मामला है
कोंडागांव जिला मुख्यालय से लगे जामपदर मोहल्ले में एक कबूतर सोमवार को पकड़ा गया था। इसके पैरों में अंगूठी लगी हुई थी। जिस पर विदेशी भाषा में कुछ लिखा हुआ था। जामपदर के रहने वाले अरुण खिलवारे के आंगन में सोमवार को एक कबूतर उतरा था। संदिग्ध लगने के कारण उक्त कबूतर पकड़े जाने की सूचना उन्होंने तत्काल कोंडागांव पुलिस को दी। पुलिस ने पशु चिकित्सा विभाग में पदस्थ डॉ नीता मिश्रा ने कबूतर पर जांच करने को कहा। कबूतर के पैरों पर मिले कपड़े और अंगूठी से पता चला कि इसका कनेक्शन तेलंगाना से है।

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