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माध्यमिक शिक्षा प्रभाग: परीक्षा लेने से बना रहेगा

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रायपुर6 घंटे पहले

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  • शिक्षा और चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है, वर्तमान में परीक्षा लेने वाले खतरे से खाली नहीं, प्रमुख सचिव बाहर इसलिए उनके लौटने के बाद ही निर्णय संभव है

प्रदेश में कोरोना का असर बढ़ता जा रहा है। माध्यमिक शिक्षा प्रभाग की 15 अप्रैल से होने वाली दसवीं की परीक्षाओं में कर दी गई हैं, लेकिन 9 मई से शुरू होने वाली 12 वीं की परीक्षाओं पर कोई फैसला नहीं हो पाया है। इधर, सीबीएससी ने दसवीं की परीक्षा इंटरनल असेसमेंट के माध्यम से और 12 वीं की परीक्षा लेने का निर्णय किया है।

प्रदेश में यदि दोनों बोर्ड परीक्षाओं और ज्यादा टलीं या उनके बारे में कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है तो पूरा शैक्षणिक सत्र चौंकानेाने की आशंका है। साथ ही इसका पूरा असर कालेगेस एडमिशन और एकेडमिक कैलेंडर पर भी पड़ेगा। बताते हैं कि बोर्ड परीक्षाओं के बारे में राज्य में जल्द ही कोई निर्णय नहीं होगा। शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ। आलोक शुक्ला प्रदेश से बाहर हैं और वे लॉक डाउन में फंसे हैं। उनके यहाँ ही सीएम भूपेश बघेल और शिक्षा मंत्री डॉ। प्रेमदास सिंह टेकाम से मिलने की संभावना है। लाक डाउन ज्यादा खींचा गया तो वीसी के जरिए शिक्षा विभाग के प्रमुखों से सीएम बात कर सकते हैं। तब उनके बीच परीक्षाओं को रोकने या जनरल प्रमोशन को लेकर बात हो सकती है।

इधर, शिक्षा विभाग व मेडिकल प्रोफेशन से जुड़े जानकारों का मानना ​​है कि प्रदेश में वर्तमान हालात को देखते हुए वर्तमान में परीक्षाओं को खतरे से खाली करना होगा। कोरोना का असर कम भी होता है तो इसका खतरा तो बरकरार रहेगा। स्कूलों में यदि परीक्षाएँ ली जाती हैं तो एक कक्ष में कम से कम 20 से 30 स्टूडेंट होंगे। कई परीक्षकों के हाथ से उन्हें कापियां व प्रश्नपत्र मिलेंगे। साथ ही टॉवर भी उनकी आंसरशीट व अटेंडेंस शीट पर साइन करेंगे। इस कारण से कोरोना स्प्रेड होने की आशंका बनी रहेगी। इसका विकल्प यह हो सकता है कि कोरोना का असर कम भी हो जाए तो परीक्षाएं कम से कम दो महीने टाल दी जाएं।

छात्र परीक्षा नहीं देंगे तो उनके लिए बस पास का विकल्प होगा
शिक्षा विभाग ने दसवीं -बारहवीं बोर्ड परीक्षाओं के छात्रों के लिए परीक्षा को लेकर विकल्प दिया है। जो परीक्षाएं देंगे उनके परिणामजे जारी होंगे। जो परीक्षा नहीं देंगे। उनकी मार्कशीट में -सीयत कर दी जाएगी। यानी वे केवल कहलाएंगे। उन्हें कोई श्रेणी नहीं मिलेगी। इसके अलावा परीक्षाओं के दौरान जो छात्र कोरोना से भिन्न होंगे। उनके लिए बाद में परीक्षा देने का विकल्प खुला रखा गया है। उनकी विशेष परीक्षा सप्लीमेंट्री के साथ या अलग से ली जाएगी।

फिर उन्हें उनकी मेहनत के अनुसार अंक मिल जाएगा। अफसरों का दावा है कि इससे अध्ययनशील छात्र या जो छात्र परीक्षाएं देते हैं वे केवल चाहते हैं कि उनकी मेहनत पर पानी नहीं फिरेगा। इससे पहले बोर्ड ने स्कूलों में टैस्टिंग के दौरान दसवीं – बारहवीं के परीक्षार्थियों के ऑनलाइन यूनिट टेस्ट के लिए हैं। उन्हें संशोधन दिए जाते थे और वे तय समय पर इसके आंसर बोर्ड में ऑनलाइन जमा करते थे। बोर्ड ने अंतिम रिजल्ट में इन अंकों का 30 प्रतिशत समावेश होगा। 70 प्रति अंक परीक्षा के शामिल होंगे।

लिंग से परीक्षाएँ होंगी तो अगले सत्र की पढ़ाई में मचेगी आपाधापी
यदि परीक्षाएँ दो महीने के होते हैं तो जून अंत तक प्रारंभ होगी। जुलाई तक परीक्षाओं ली जाती हैं तो कम से कम एक महीने परिणामजे आने में लगेगा। यानी परिणाम सितंबर अंत में आने की संभावना होगी। मतलब शैक्षणिक सत्र दो महीने लेट हो जाएगा। इसके बाद एडमिशन होने और पढ़ाई शुरू होने के विलंब के कारण से नए सत्र में कोर्स कंपलीट करने में आपदादी मची होगी। 11 वीं तक के बच्चों को बहुत परेशानी नहीं होगी, लेकिन इसका असर 12 वीं के बच्चों पर पड़ेगा। उनके कालेजों में एडमिशन होना आसान नहीं होगा। बारहवीं के बच्चे बोर्ड परीक्षा के साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगे हुए हैं। वे नर्सिंग, मेडिकल, पीएमटी वार्म और पीएटी आदि में शामिल होंगे। सफल बच्चों को मेडिकल, सीएस, एग्रीकल्चर कालेजों में प्रवेश लेना होगा। नर्सिंग के 7 से 8 हजार छात्रों का एक वर्ष पहले ही प्रभावित हो चुका है।

एक्सपर्ट्स व्यू; बारहवीं की परीक्षा तो लेनी ही होगी – बीकेएस रे
परीक्षाओं की परिस्थिति को लेकर जब भास्कर ने राज्य के पूर्व एसीएस बीकेएस रे से बात की तो उन्होंने कहा कि दसवीं की परीक्षा लॉक डाउन और कोरोना के बढ़ते प्रभाव की वजह से इमर्जेंसी ऑपरेशन के कारण स्थगित की गई है। इसे भविष्य में लेना नहीं लेना पड़ेगा जटिलताओं और सरकार पर निर्भर करेगा। बारहवीं की परीक्षा की बात करें तो यह शिक्षा प्रभाग को लेना ही होगा। इसका कारण यह है कि यह सर्वोच्च न्यायालय का आदेश भी है। स्कूली परीक्षा का यह अंतिम पड़ाव है। इसके आधार पर ही छात्र को कालेजों में या प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रवेश मिलता है। इस परीक्षा के कट आफ नंबर बहुत मायने रखते हैं। माशिमं भले ही इसे डेल से ले, लेकिन उसे ऑफलाइन या ऑफ लाइन परीक्षा ही होगी।

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