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असम के सियासी मेहमानों पर बवाल: बस्तर के चित्रकोट रेस्टहाउस में ठहरे विधायक नेताओं की तस्वीरें और वीडियो वायरल, पूर्व मंत्री बोले- प्रदेश कांग्रेस में और ये बकरा भात खिलाया जा रहा है।

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रायपुर18 मिनट पहले

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तस्वीर जगदलपुर के सरकारी रेस्ट हाउस की है। यहां भोजन के साथ मेज पर रखे बोतलें काफी कुछ कह रही हैं।

बस्तर में असम से चुनाव के नेताओं को चित्रकोट के सरकारी रेस्ट हाउस में रखा गया है। बेफिक्री से ये सियासी मेहमान वहां दावत का लुत्फ ले रहे हैं। जिले का प्रशासनिक अमला इनकी आवभगत में लगा हुआ है। इस पर अब सियासी हंगामा फैल गया है। पूर्व मंत्री और बस्तर से भाजपा के बड़े नेता केदार कश्यप ने कहा है कि प्रदेश में हर रोज 15 हजार से ज्यादा मरीज मिल रहे हैं, दर्जनों लोगों की असमय मौत हो रही है और असम से आए इन लोगों को सरकार बकरा भात खिला रही है। ये किस नियम के तहत सरकारी रेस्ट हाउस में रुके हैं, जबकि जिले में धारा 144 लगी है। सरकार को बस्तर की चरमराती चिकित्सा व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए।

असम के प्रमुखों के साथ उनके कुछ समर्थक और सुरक्षाकर्मी भी पहुंचे हैं।  चित्र जगदलपुर के रेस्ट हाउस की।

असम के प्रमुखों के साथ उनके कुछ समर्थक और सुरक्षाकर्मी भी पहुंचे हैं। चित्र जगदलपुर के रेस्ट हाउस की।

बस्तर से अब रायपुर की ओर
बस्तर में न सिर्फ असम से आए ये प्रत्याशी ठहरे हुए हैं बल्कि इनकी गाड़ियों का काफिला इधर से उधर घूमता दिख रहा है। पूर्व मंत्री केदार कश्यप ने बताया कि अब सरकार की पूरी सुरक्षा व्यवस्था के साथ असम के प्रत्याशियों का काफिला बस्तर से रायपुर की ओर रवाना होता है। जहां आम नागरिकों को अभी तक एक जिले से दूसरे जिले में जाने के लिए जिला प्रशासन से अनुमति लेनी पड़ती है वहां ये काफिला बेरोकटोक भ्रमण कर रही है।

पूर्व मंत्री केदार कश्यप ने कहा है कि 5 की संख्या में आम आदमी कहीं जमा नहीं हो सकता, लेकिन ये काफिला सरकारी सुरक्षा में घूम रहा है।

पूर्व मंत्री केदार कश्यप ने कहा है कि 5 की संख्या में आम आदमी कहीं जमा नहीं हो सकता, लेकिन ये काफिला सरकारी सुरक्षा में घूम रहा है।

आरक्षित भी भेजे गए प्रत्याशी हैं
अब तक विधायकों की खरीद फरोख्त के डर से इस तरह की बाड़े बंदी की जाती थी, लेकिन यह पहली बार है कि चुनाव होने के बाद प्रत्याशियों को ही इस तरीके से प्रदेश से बाहर दूसरे प्रदेशों में भेजा गया है। असम में कांग्रेस अपने सहयोगी दलों, ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक लिमिटेड (AIUDF) और बोडोलैंड पीपुल्स एमआर (BPF) के साथ सियासी मैदान में उतरी थी। अपने नेताओं को कांग्रेस शासित प्रदेश का दर्जा और छत्तीसगढ़ भेजा गया है। असम से विपक्षी गठबंधन के 22 नेताओं को जयपुर भी भेजा गया है।

असम के प्रमुखों की देख-रेख में स्थानीय प्रशासनिक अमले के लगे होने का आरोप है।

असम के प्रमुखों की देख-रेख में स्थानीय प्रशासनिक अमले के लगे होने का आरोप है।

कांग्रेस को फरोख्त का डर है
कांग्रेस पार्टी को आशंका है कि भाजपा अगले महीने आने वाले चुनाव परिणामों के बीच उनकी पार्टी के लोगों को लुभाने की कोशिश कर सकती है। असम में सत्तारूढ़ भाजपा को कांग्रेस गठबंधन से टक्कर मिल रही है। असम में कांग्रेस के साथ इस बार बदरुद्दीन अजमल की पार्टी AIUDF चुनाव लड़ रही है। असम में भाजपा की स्थिति देखकर कांग्रेस और उसके सहयोगी दल घबराए हुए हैं और उन्हें पूरा यकीन है कि अगर भाजपा कुछ सीटों से पीछे रही तो वह हमारे विधायक तोड़कर असम में फिर से सरकार बना लेगी। यही कारण है कि रिजल्ट आने से पहले ही कांग्रेस अपने और अपने सहयोगी दल AIUDF के विधायक प्रत्याशियों को आरक्षित और छत्तीसगढ़ शिफ्ट कर रही है।

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