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राख से खाक में मिलते जीवन: एनटीपीसी के जलाड़ बांधों से आसपास के कई गांवों में जीना मुश्किल, 14 साल से ग्रामीण बीमारियों से जूझ रहे हैं

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बिलपुर31 मिनट पहले

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तस्वीर में कोहरा नहीं बल्कि राख है। इसी तरह ले ले लोगों की जिंदगी में परेशानी खड़ी की है। ये सीपत क्षेत्र का हाल है।

सीपत के आसपास के गांवों में फिर से NTPC के खिलाफ आंदोलन का माहौल बन रहा है। वास्तव में, यहां पावर प्लांट के तीनों जलाड़ डैम पूरी तरह से भरने जाने के कारण जला की दंतिकाओं ने तबाही मचा दी। सीपत एनटीपीसी के पास स्थित रॉक, रलिया और सुखरीपाली के चारों ओर लगभग दो एकड़ के क्षेत्र में तीन राखड़ डेम का निर्माण कराया गया है।

गर्मी आते ही इस इलाके के रॉक, रलिया, हरदडीह, भिलाई, गतौरा, सुखरीपाली, कौड़िया, देवरी, एरमशाही, बारीप सहित आसपास के कई गांवों में छेद की विरासतें चलती हैं। जरा सी हवा के चलते ही पूरे इलाके में राखड़ की धुंध छा जाती है फिर 10 फीट की दूरी तक में देखना मुश्किल हो जाता है। इस छेद ने पूरे क्षेत्र के लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है।

ग्राम पंचायत रॉक के लगातार दो बार सरपंच रहे कृष्णकुमार राठौर का कहना है कि एनटीपीसी प्रबंधन ने हम लोगों से विकास का वादा करके हमारी जमीन ले ली और नरकीय जीवन जीने के लिए छोड़ दिया। NTPC ने गांव में विकास तो नहीं किया लेकिन गांव में तीन तीन राखड़ डेम बनाकर लोगों को बीमार बना दिया है। यहां ज्यादातर लोगों को अस्थमा, खांसी, सर्दी, बुखार के अलावा सांस लेने में कठिनाई होती है। उड़ती जलाड़ से निजात पाने वाले क्षेत्र के ग्रामीण और जनप्रतिनिधियों द्वारा लगातार एनटीपीसी प्रबंधन और जिला प्रशासन से बात करते रहे हैं, लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। पूर्व सरपंच का कहना है कि लगता है कि 2008 के आंदोलन को फिर से रोकना पड़ेगा, तब कहीं कुछ परीक्षण होगा। 2008 में कई गांवों के ग्रामीणों ने एनटीपीसी का खादर तकरीबन ठप कर दिया था।

14 साल से झेल रहा है समस्या

एनटीपीसी के पावर प्लांट के निर्माण के बाद 14 साल पहले 2007 में इन्फ ग्राम रॉक, रलिया और सुखरीपाली में तीन राखड़ डैम का निर्माण किया गया। विद्युत उत्पादन में इस्तेमाल किए गए कोयले के जलने के बाद बची हुई परतों को पानी सहित पाइप लाइन के माध्यम से इंही राखड़ डैम में डंप किया जा रहा है। तब से आज तक राखड़ की इस धनी का प्रकोप झेलना पड़ रहा है।

क्या कहते हैं पर्यावरण विभाग

पर्यावरण विभाग के नियमानुसार एनटीपीसी को जलाड़ डेम में जला के साथ गर्मी के दिनों में पानी भी डालना चाहिए ताकि जलाया उड़े हो। इसके साथ Inf गाँवों में सफाई और पर्यावरण संरक्षण के उपाय करना चाहिए लेकिन NTPC के द्वारा ऐसा नहीं किया जा रहा है। NTPC की एजीएम के स्पष्टता का कहना है कि इस विषय में कुछ तो किया जा रहा है, लेकिन इसकी पूरी जानकारी दूसरे अधिकारी दे सकते हैं।

छेद से होता है कई तरह की बीमारियाँ

हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ। रामकृष्ण कश्यप के अनुसार हमारे शरीर को बहुत नुकसान पहुंचाता है। इससे आँखों की परेशानी, दमा, अस्थमा, एलर्जी के अलावा न्यूोमोकोनोसिस जैसी जानलेवा बीमारी भी होती है। डॉ। ने बताया कि न्यूओमोकोनोसिस बीमारी से फेफड़ा सूख जाता है और अगर समय पर इलाज नहीं हुआ तो मरीज की मौत भी हो सकती है।

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