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छत्तीसगढ़ कोरोना लाइव: मौत के मामले बढ़े, जीपीएम जिले में लॉकडाउन लगाने का फैसला; मरीजों का बोझ झेल रहा जूनियर डॉक्टर्स ने कर दिया हड़ताल का एलान

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रायपुर10 मिनट पहले

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छत्तीसगढ़ में पिछले 24 घंटे में 107 लोगों की मौत का आंकड़ा सामने आया है। पिछले सप्ताहभर से संवेदनशीलों की अधिक तादाद मिल रही थी लेकिन अब तक एक साथ 100 से अधिक मौतें उजागर नहीं हुई थीं। हर रोज औसतन 95 कोरोनाटेन्स की मौत हो रही है। सिर्फ 7 दिनों में 668 लोगों की जान गई है। परिस्थिति बिगड़ने की वजह से गौरेला-पेंड्रा-निगेटिव (GPM) जिले में लॉकडाउन लगाने का फैसला किया गया।) 14 अप्रैल की सुबह 6 बजे से 21 अप्रैल की सुबह 6 बजे तक GPM जिले में सबकुछ बंद रहेगा। इसकी गाइड लाइन जारी कर दी जाएगी।

कोविड वार्ड में काम कर रहे डॉक्टर्स की हड़ताल
मंगलवार की सुबह सामने आई इस खबर ने सभी को हैरान कर दिया। प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रायपुर के अंबेडकर अस्पताल में जूनियर डॉक्टर्स ने हड़ताल कर दी है। 13 अप्रैल की सुबह अस्पताल के चीफ मेडिकल अफसर को एक लैटर देकर ये स्ट्राइक शुरू कर दी गई। अब अंबेडकर अस्पताल की ओपीडी में ये डॉक्टर्स नहीं दे रहे हैं। अपनी मांगें मनवाने के लिए 18 अप्रैल तक का अल्टीमेटम भी डॉक्टर्स ने दिया है। व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो डॉक्टर्स इसके बाद सभी एमरजेंसी सर्विस और कोविड वार्ड की ड्यूटी करना भी बंद कर देंगे।

हर रोज बेहोश होते हैं डॉ, हम सुधार की मांग कर थक चुके हैं
कोवि वार्ड में काम करने वाले एक जूनियर डॉक्टर ने दैनिक भास्कर को बताया कि आखिर क्यों इस आपदा के माहौल में डॉ। हड़ताल पर जाने को मजबूर हैं।) डॉ ने बताया कि अंबेडकर अस्पताल के तीसरे माले में पीपीई किट पहनकर ड्यूटी करने के दौरान एक डॉ। बेहोश हो जाती है। गर्मी की वजह से ऐसा होता है। इस बार गंभीर रोगियों की तादाद ज्यादा है, कई घंटों की ड्यूटी के बाद कोई रिलैक्सेशन नहीं मिलता, परेशान लोगों की गालियां मिलती हैं वे अलग हैं। अच्छी क्वालिटी की पीपीई किट, वर्क ग्लव्स और आई वियर नहीं मिल रही। मेडिकल वेस्ट को डिस्पोज करने का उचित इंतजाम नहीं है। डॉक्टर्स को एक्स्ट्रा ड्यूटी का कोई इंसेंटिव भी नहीं दिया जा रहा है। ये सभी बातें हम 1 साल से सरकार को बता रहे हैं, अब मजबूरन हमें विभाजित होकर छोड़ दूसरी सेवा बंद करनी पड़ी है।

इन वजहों से लोगाें की मौत हो रही है
12 अप्रैल की रात को सरकार की ओर से जारी किए गए आंकड़ों को देखने पर पता चलता है कि मरने वालों में ज्यादातर सांस में तकलीफ के लक्षण – परेशान थे। 57 लोगों की जान कोविड के गंभीर संक्रमण और 50 ऐसे लोगों की भी मौत हुई, जिनकी दूसरी बीमारी थी। ये लोगाने में एक बीमारी कॉमन नजर आई वो थी, हाइपर कैंसर और डायबिटिज। अंबेडकर अस्पताल के एक्सपर्ट्स ने बताया कि इन बीमारियों से जूझ रहे लोगों की मौत अधिक हो रही है, इनकी स्थिति बिगड़ रही है। पिछले सप्ताह हुई 25 मृत्यु की जानकारी सोमवार को सरकार के पास आई थी इनमें 11 को विभाजित और 14 कोरोना के साथ दूसरी बीमारियों से ग्रसित थे।

मृत्यु के मामले में दूसरे नंबर पर छत्तीसगढ़
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक देशभर में कोरोनाटेन्स की मौत के मामले में छत्तीसगढ़ दूसरे नंबर पर है। आंकड़ों के मुताबिक महाराष्ट्र में 258, छत्तीसगढ़ में पिछले 24 घंटे और बीते सप्ताह जिसमें कुल 132, उत्तर प्रदेश में 72, गुजरात में 55 मौतें होने की वजह से ये राज्य मौत के मामले में शीर्ष पर हैं। केंद्र सरकार के मुताबिक जम्मु कश्मीर, असम, लद्दाख, दमन दीव, त्रिपुरा, मेघालय, सिक्किम, नागालैंड, मिजोरम, मनिपुर, लक्षद्वीप, अंडमान निकोबार और अरुणाचल प्रदेश में एक भी मौत नहीं हुई है।

दुर्ग के रेलवे स्टेशन पर निगेटिव रिपोर्ट दिखानी होगी
रेलवे सुरक्षा बल की ओर से सोमवार को ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों में रोको-टोको अभियान चलाया गया है। इसके अंतर्गत दुर्ग, पावर हाउस, भिलाई -3 इत्यादि श्रेणियों में यात्रियों को सही तरीके से वर्क पहनने के तरीके बताए गए। इसके अलावा कोरोना की जांच को अनिवार्य किए जाने की जानकारी दी गई। यात्रियों को बताया गया कि बिना जांच ट्रेन में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। स्टेशन से बाहर निकलने का समय हर यात्री को निगेटिव रिपोर्ट दिखाना अनिवार्य है। इसकी भी जांच की जा रही है। इसके अलावा रेलवे स्टेशन पर कोविड टेस्ट का भी बंदोबस्त किया जा रहा है। दुर्ग में पिछले 24 घंटे में 1591 नए मरीज मिले, 11 लोगों की जान चली गई।

छत्तीसगढ़ में कोरोना
छत्तीसगढ़ में सोमवार की रात 13 हजार 576 नए कोरोनासिक तत्व मिले। इस कारण से अब प्रदेश में सक्रिय मरीजों की संख्या 98 हजार 856 हो गई है। सोमवार को राज्य में 45 हजार 997 सैंपल की जांच की गई। प्रदेश में अब तक कुल 5031 लोगों की मौत कोरोना संक्रमण की वजह से हो चुकी है। सरकार का दावा है कि चेतों की पहचान के लिए हर दिन 40 हजार से 50 हजार सैंपलों की जांच की जा रही है। यह और बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

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