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टीका लेता ही सियासी साइड इफेक्ट: कम उम्र की संसदीय सचिव का हुआ वैक्सीनेशन, भाजपा बोली- क्या सभी नियम आम आदमी के लिए, इन पर FIR हो और पद से किया जाए बर्खास्त

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रायपुर3 घंटे पहले

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चित्रा संसदीय सचिव शकुंतला के वैक्सीनेशन के दौरान की। यह तस्वीर ही पूरे प्रदेश में सियासी बवाल उठाई गई है।

छत्तीसगढ़ में को विभाजित वैक्सीनेशन की वजह से सियासी साइड इफेक्ट देखने को मिल रहा है। कसडोल की विधायक और संसदीय सचिव शकुंतला साहू ने अपने वैक्सीनेशन की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की। आम लोग और विपक्षी दलों में बहस छिड़ गई कि साहू की उम्र न तो 45 से अधिक है और न ही वे कोरोना एम लाइन लाइन हेरिटेज मार्केटिंग में आते हैं तो फिर उनका वैक्सीनेशन कैसे हुआ। इस मामले में अब भाजपा के विधायक (अकलतरा) सौरभ सिंह ने बड़ा बयान दिया है। सिंह ने कहा है कि को-वैक्सीन टीकाकरण की आयु-सीमा का उल्लंघन कर 35 वर्ष की आयु में को विभाजितकालीन लगवाने के लिए कसडोल की विधायक और संसदीय सचिव शकुंतला साहू पर फ्रॉड और फंदा का मामला दर्ज किया जाना चाहिए। हम मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से संसदीय सचिव के पद से बर्खास्त करने की मांग करते हैं।

कहीं भी उजालों से तो वैक्सीन कम नहीं पड़ रहे हैं?
भाजपा विधायक सिंह ने कहा कि जब केंद्र सरकार की ओर से अभी 45+ की आयु-सीमा तय करके टीकाकरण कराए जाने की व्यवस्था की गई है तो संसदीय सचिव साहू ने 35 साल की उम्र होने के बावज़ूद टीका लगवाकर सरकार में नियमों का उल्लंघन किया है। करने का दुस्साहस कैसे, क्यों और किसके इशारे पर किया, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री बघेल ने अपनी टीम में ऐसे-ऐसे नगीने जोड़ रखे हैं कि तमाम सरकारी व्यवस्थाओं पर सवाल खड़ा करके वे अपनी ही सरकार को कठघरे में ला पटकते हैं।

पोस्ट कर दी डीलिट
अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए खुद कसडोल विधायक शकुंतला ने अपनी वैक्सीनेशन की जानकारी दी थी। तस्वीर साझा कर उन्होंने लिखा है कि मैं काफी अच्छा महसूस किया। वैज्ञानिकों ने काफी जल्दी इस लाइफ सेविंग दवा को अनुमति दी। कोरोना के विरुध्द वैक्सीन रूपी सुरक्षा कवज को जरूर लगवाए, हारेगा कोरोना विनगा नीति। बवाल के बाद सोशल मीडिया से अब ये पोस्ट गायब है।

अफसरों पर भी कार्रवाई की मांग
भाजपा विधायक ने कहा है कि दूसरी लहर में प्रदेश को दहशत के मुहाने पर ला खड़ा करने में कांग्रेस और उनकी प्रदेश सरकार ने कोई क़सार बाकी नहीं रखा है। इस मामले में सीएमएचओ के ज़वाब को भी ग़ैर-ज़िम्मेदाराना मानकर जाँच के दायरे में लेने की ज़रूरत बताई है, क्योंकि सवाल यह है कि सत्ता विपक्ष के जनप्रतिनिधियों के लिए क्या कोई नया नियम हैं या अपने पद के प्रभाव को डॉक्टर्स से सिडठांनाथ द्वारा टीके लगवाए जा रहे हैं। कर रहे हैं? क्या सभी क़ायदे-क़ानून सिर्फ़ आम आदमियों के लिए ही हैं?

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