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शानो की रिलीज़ के पीछे की पूरी कहानी: नक्सलियों ने हाथों की रस्सी खोली तो पत्रकारों से बोले राकेश्वर- यहां से जल्दी चलो, आखिर में भोर भीड़ ने किया रिहा होने का विरोध

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रायपुर7 मिनट पहलेलेखक: सुमन पांडेय

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बीजापुर में बीते शनिवार को हुई मुठभेड़ के बाद सीआरपीएफ के कोबराांडो राकेश्वर को नक्सलियों ने अगवा लिया था।

बीजापुर जिले के जोनागुड़ा गांव से 15 किलोमीटर अंदर के इलाके में CRPF के कोबराांडो राकेश्वर सिंह को गया था। गुरुवार दोपहर उन्हें प्रशासन की तरफ से फिक्स्डन्स और पत्रकारों की एक टीम को सौंप दिया गया। 5 दिनों से नक्सलियों के कब्जे में रहेंडरो को जब नक्सली छोड़ रहे थे, वहां लगभग 40 नक्सली मौजूद थे। आस-पास के 20 गांव के लोगों को बुलाया गया था। ये सबके बीच जवान को छोड़ दिया गया। जबांडो की रिलीज़ हो रही थी तो बीजापुर और सुकमा के पत्रकार गणेश मिश्रा, राजन दास, मुकेश चंद्राकर, युकेश चंद्राकर, शंकर और चेतन वहां मौजूद थे। उसने जो कुछ देखा, महसूस किया और झेला, जानिए उन्हीं के शब्दों में।

तस्वीर बीजापुर सुकमा जिले के बॉर्डर पर तोमलपाड़ गांव की है जहां युवा को सौंप दिया गया था।

तस्वीर बीजापुर सुकमा जिले के बॉर्डर पर तोमलपाड़ गांव की है जहां युवा को सौंप दिया गया था।

सुबह 5 बजे वहां से चले गए थे
बीजापुर के एसपी कमलोचन कश्यप ने बताया कि सुबह 5 बजे से संवाददाताओं की टीम और पत्रकार बीजापुर से रवाना हुए थे। पत्रकारों में शामिल मुकेश चंद्राकर ने बताया कि हमें जोनागुड़ा आने के लिए कहा गया था। भीषण गर्मी उथ-खाबड़ रास्तों से होते हुए हम जोनागुड़ा तक पहुंचे। बीजापुर जिला मुख्यालय से ये जगह लगभग 80 से 85 किलोमीटर दूर है। यहां पहुंचने के बाद और लगभग 15 किलोमीटर अंदर हम गए। लगभग दो से तीन घंंटे के तनाव भरे माहौल के बाद संतो राकेश्वर को छोड़ दिया गया। शाम 5 से 6 बजे के करीब हम जवान को तर्रेम थाना लेकर आए, जिसके बाद उन्हें पुलिस और सीआरपीएफ के हवाले किया गया।

अब राकेश्वर CRPF की निगरानी में हैं।  वर्तमान में उनका उपचार जारी है।

अब राकेश्वर CRPF की निगरानी में हैं। वर्तमान में उनका उपचार जारी है।

ठीक हैं राकेश्वर सिंह
बीजापुर में बीते शनिवार को हुई मुठभेड़ के बाद सीआरपीएफ के कोबराांडो राकेश्वर सिंह को नक्सलियों ने अगवा लिया था। 5 दिन बाद गुरुवार को रिहा हुए राकेश्वर जब कैंप पहुंचे तो सीआरपीएफ की तरफ से कहा गया कि 210 कोबरा बटालियन के सिपाही राकेश्वर सिंह मनहास सुरक्षित हैं। सीआरपीएफ के नियमानुसार मनहास की चिकित्सा परीक्षण किया जा रहा है। इस संबंध में उनके परिवार को चिह्नित कर दिया गया है। साथ ही उनके परिजन से मोबाइल के माध्यम से मनहास की बात भी करें दी गई है। शानो को अपनी बाइक पर बैठाकर लाने वाले पत्रकार शंकर ने बताया कि जब राकेश्वर से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि कोई परेशानी नहीं है, मैं ठीक हूं।

20 गांव के लोगों की सभा बुलाकर राकेश्वर को छोड़ा गया।

20 गांव के लोगों की सभा बुलाकर राकेश्वर को छोड़ा गया।

राकेश्वर ने छूटते हुए ही कहा- जल्दी चलो
रणो राकेश्वर से पत्रकारों ने रिहा होते ही बात करने को कहा। इस पर राकेश्वर धीरे से बोले कि यहाँ से जल्दी चलो। सहभागिता कैंप में कर देगा। राकेश्वर ने बताया कि नक्सलियों ने उनसे कहा था कि वे उन्हें सुबह 9 बजे रिहा करेंगे। राकेश्वर सिंह अंधरा होने से पहले कैंप पहुंचने की हड़बड़ी में नजर आए। पत्रकार भी स्थिति को समझनेकर उन्हें तर्रेम थाना लेकर आए थे।

जवान को नक्सलियों ने रस्सी से बांध रखा था।

जवान को नक्सलियों ने रस्सी से बांध रखा था।

हजारों ग्रामीणों की भीड़ और फिर जंगल में हलचल दिखी
नक्सलियों ने सरकार से मांग रखी थी कि निर्दलीय लोगों के साथ, हम युवा को छोड़ देंगे। युवा की रिहाई के लिए गए पत्रकार युकेश ने बताया कि वहां 20 गांवों के लगभग 2 हजार लोगों की भीड़ थी। ये देखकर हम डर गए थे, क्योंकि कुछ भी हो सकता था। मौजूद गांव के लोगों, पत्रकारों और बागों पर नक्सली नजर बनाए हुए थे। प्रयोगशालाओं के पहुंचते ही पहले जवान को नहीं लाया गया। नक्सलियों ने पहले पूरे माहौल को भानपा और इसके बाद जंगल की तरफ कुछ हलचल दिखी। करीब 35 से 40 हथियार बंद नक्सलींडो राकेश्वर को लेकर लोगों के बीच आए।

तारों से लैस नक्सली इस तरह लोगों के बीच खड़े हुए थे।

तारों से लैस नक्सली इस तरह लोगों के बीच खड़े हुए थे।

नक्सलियों ने ग्रामीणों से बातें ये बातें, कैमरा बंद रखने को कहा
युवा को लाने के बाद कुछ नक्सलियों ने पूरे इलाके को घेर लिया, कुछ युवा के को घेरे खड़े हुए तो कुछ खुदराता वाले लोगों को। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक ये नक्सली पल्लेदार इलाके कमेटी के थे। उनकी साथ एक महिला नक्सली थी जो पूरे नक्सलियों को छोड़कर कर रही थी। आते ही नक्सलियों ने पत्रकारों से कहा कि कोई भी कैमरा चालू नहीं करेगा। जवान की सुरक्षा का मामला था, इसलिए पत्रकारों ने नक्सलियों की बात मानी। इसके बाद नक्सलियों ने वार्ता करने आई आदिवासी समाज की तेलम बौरैया और खुशीमती हक्का को बुलायाकर कुछ बातें कीं।

ग्रामीणों को इस तरह एक जगह पर जुटा लेना ये भी बताता है कि वहाँ नक्सलियों का नेटवर्क और हुकूमत किस कदर चलता है।]

ग्रामीणों को इस तरह एक जगह पर जुटा लेना ये भी बताता है कि वहाँ नक्सलियों का नेटवर्क और हुकूमत किस कदर चलता है।]

नक्सलियों ने ग्रामीणों से कहा कि जोनागुड़ा में मुठभेड़ के बाद राकेश्वर उन्हें बेहोशी की हालत में मिले थे। 5 दिन तक उन्हें सुरक्षित रखा गया, कुछ चोटें भी राकेश्वर को आईं थीं उनका इलाज करवाया गया। अब हम उन्हें सुरक्षित छोड़ रहे हैं। नक्सलियों की महिला लीडर ने साफ-साफ कहा कि हम पत्रकारों को सौंप रहे हैं ताकि ये उन्हें कैंप तक चले, रास्ते में उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचे। काफी देर तक सभी इंतजार करते रहे फिर युवा को रिहा किया। जब युवा को छोड़ा जाने लगा तो मीडिया को वीडियो बनाने की अनुमति दी।

जवान के बदले एक ग्रामीण छोड़ना पड़ा पुलिस को
पुलिस के आला अफसरों ने एक महत्वपूर्ण जानकारी इस पूरी रिलीज के केस में छुपा रखी थी। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक नक्सलियों के पास जाने से पहले ही तोपों को प्रमुखम सुक्का नाम का ग्रामीण सौंप गया था। ये ग्रामीण मुठभेड़ वाली जगह से हिरासत में लिया गया था। नक्सलियों ने जवान को रिहा करने से पहले आरोपों से पूछा कि वह ग्रामीण कहां है। तो मानसों ने कहा कि हम उसे लेकर आए हैं। उस ग्रामीण को गांव वालों के सामने नक्सलियों को सौंप दिया गया। इसके बदले जवान को नक्सलियों ने रिहा किया।

युवा को छोड़ते जब पत्रकारों को नक्सलियों ने कैमरा करने की अनुमति दी।

युवा को छोड़ते जब पत्रकारों को नक्सलियों ने कैमरा चालू करने की अनुमति दी।

नक्सलियों ने ये शर्त रखी, आखिर में भड़क गए ग्रामीण थे
पत्रकार युकेश और राजन ने बताया कि जवान को छोड़ने के वक्त शाम को करीब 4 बजे के आस-पास पूरे ग्रामीण आक्रोशित हो गए।]गांव के लोगों ने नक्सलियों से कहना शुरू कर दिया था कि जवान को छोड़कर वे गलती कर रहे हैं, इसे मत छोड़ो, मत करो मत करो। हंगामा बढ़ता है, इससे पहले ही युवा और युवतियों के साथ उपयोगकर्ता बाइक में सवार होकर निकल गए। नक्सलियों और बहुत से ग्रामीणों ने अब पत्रकारों और आभूषणों के सामने ये शर्त भी रख दी है कि आने वाले दिनों में जब फोर्स के लोग आदिवासियों को हिरासत में लें तो उन्हें छुडा़ने के लिए भी इसी तरह की बातचीत और समृद्धि और पहल करनी होगी।

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