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नहीं रहा चरणदास चोर: छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध रंगकर्मी दीपक विराट तिवारी का निधन, पढ़े से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य

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राजनांदगांवएक घंटा पहले

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मसल्स रंगकर्मी दीपक विराट तिवारी का निधन।

मसल्स रंगकर्मी दीपक विराट तिवारी की लंबी बीमारी के बाद शुक्रवार को निधन हो गया। प्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर के नए थिएटर में दीपक ने लंबे समय तक नाटकों में भूमिकाएं निभाई हैं। दीपक को रंगकर्मी और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया। अंतिम समय वे अपने परिवार के साथ राजनांदगांव में थे।

दबंग कलाकार के रूप में अपनी पहचान बनाई

देश के प्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर के नाटकों में दीपक विराट तिवारी दबंग किरदार निभाते थे। प्रसिद्ध नाटक ‘चरणदास चोर’ में चोर का जीवंत किरदार प्लेकरक ने नाट्य कला के क्षेत्र में विश्व में अपनी अलग पहचान ली थी। चोरी के इस हुनर ​​के लिए दीपक को देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ‘संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया था।

फरवरी 2019 में दीपक तिवारी को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सम्मानित किया।-फाइल फोटो

फरवरी 2019 में दीपक तिवारी को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सम्मानित किया।-फाइल फोटो

प्रसिद्ध नाटकों में प्रदर्शन किया गया

आपको बता दें कि बिलासपुर के रहने वाले दीपक विराट तिवारी ने राजनांदगांव को अपना कर्म क्षेत्र बनाया। वर्ष 1980-90 के दशक में हबीब तनवीर के ग्रुप नए थिएटर का हिस्सा बने। उन्होंने चरणदास चोर, लाला शोहरत राय, मिट्टी की गाड़ी, आगरा बाजार, कामदेव का अपना बसंत ऋतु का सपना, देख रहे हैं नैन, लाहौर नहीं देखा और हिरमा की अमर कहानी जैसे नाटक में अपनी अलग छाप छोरी। पिछले 12 वर्षों से वे जीवन और मौत के बीच जंग लड़ रहे थे। और शुक्रवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। गत वर्ष उनके पुत्र दीपक तिवारी का भी निधन हो गया था।
थिएटर के लिए नौकरी से निकाले गए
दीपक की पत्नी पूनम बताती हैं कि बात करीब 26 साल की है। जब दीपक जनपर्क विभाग में नौकरी करते थे। साथ ही हबीब तनवीर के साथ थिएटर भी किया करते थे। इससे सरकार नाराज थी हम दिल्ली में आवेदन के लिए गए थे। उसी दौरान एक पत्र सरकार की ओर से मिला कि आप अगर थिएटर में ही काम करेंगे तो नौकरी से निकाल दिया जाएगा। इन थिएटरों को नहीं छोड़ा तो उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया।

पक विराट तिवारी द्वारा मंचों पर प्रस्तुति।-फाइल फोटो

पक विराट तिवारी द्वारा मंचों पर प्रस्तुति।-फाइल फोटो

प्रसिद्ध लेखक अशोक मिश्रा ने किया था

मुंबई के कहानी एवं पटकथा लेखक अशोक मिश्रा बताते हैं कि वे हमसे काम मांगने के लिए मुंबई आए थे। उन्होंने कहा कि इस समय हमारी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है, तो हमें कहीं काम दिलवा दो, तो हम उस वक्त फर्ज सीरियल लिख रहे थे। हमने बात करके उन्हें फर्ज सीरियल (जो पहले डीडीएल) पर आता था। इसमें बैगा की भूमिका दिलवा दी थी, तो उन्होंने धारा के 10 से 12 एपीसोड में काम किया था, तो कुछ रुपए की व्यवस्था हो गई थी। लेकिन उन लंबे समय तक मूरत में रुके नहीं। वापस 2 से 3 महीने में चले गए। लेकिन बड़े ही जिंदा दिल आदमी थे। उनके प्रदर्शन का लोहा हम सभी लोग मानते हैं। लेकिन जिस तरह से इतने बड़े रंगकर्मी कलाकार को जो सम्मान मिलना चाहिए था। अंतिम समय में उन्हें नहीं मिला।

मुफलिसी में गुजरी जिंदगी
वर्ष 2015 में राज्य सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ अलंकरण से सम्मानित पूनम तिवारी (दीपक की पत्नी) बताती हैं कि लगभग दो साल पहले जब इनकी तबीयत बहुत ज्यादा खराब हो गई, तो हम लोग तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ। रमन सिंह से मुलाकात और नौकरी के लिए आवेदन दिया। लेकिन उन्होंने नौकरी देने की बजाय उनके इलाज के लिए 1 लाख रुपए देने की घोषणा की थी। पैसा मिल भी गया, लेकिन आय को लेकर संकट बना रहा। 8/10 के कमरे में पुराने टीवी और दवाइयों के सहारे ही जीवन चल रहा था। दरअसल साल 2008 से वो लकवाग्रस्त हो गए थे।

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