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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला: किसी के पक्ष में प्रचार पद का दुरुपयोग नहीं, कोरबा की बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष को पुन: बहाल करने के आदेश

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  • छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा कि किसी के पक्ष में चुनाव प्रचार करने से पद के दुरुपयोग की श्रेणी में नहीं आता है।

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बिलपुर13 मिनट पहले

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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा कि किसी के पक्ष में प्रचार करना पद का दुरुपयोग करने की श्रेणी में नहीं आता है। कोर्ट की सिनेटिक बेंच ने कहा कि ऐसा कोई प्रावधान जेजे एक्ट 2015 में नहीं है। इसी प्रावधान का प्रयोग करते हुए शासन ने कोरबा की बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष मधु पांडेय को पद से हटा दिया था।

11 अप्रैल 2017 को तत्कालीन सरकार ने तीन साल के लिए बाल कल्याण समिति का अध्यक्ष बनाया था। उनका कार्यकाल 2020 को समाप्त होना था। लेकिन जब उनके कार्यकाल को महज 2 महीने बाकी चले गए तो 19 जनवरी 2020 को शासन ने पद से हटा दिया गया। कहा गया कि नवंबर 2018 में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी के प्रचार में हिस्सा लिया गया था। इस आदेश के खिलाफ मधु पांडेय ने एडवोकेट रोहित शर्मा के जरिए हाईकोर्ट में याचिका लगाई। एडवोकेट रोहित ने परीक्षण के दौरान कहा कि समिति के अध्यक्ष को केवल किशोर न्याय अधिनियम 2015 के तहत ही बंद किया जा सकता है। इस मामले में ऐसा नहीं किया गया और दिखाने काज नोटिस में भी यह स्पष्ट नहीं किया गया कि किस तरह मधु पांडेय ने प्रचार में भाग लेकर पद का दुरुपयोग किया। कोर्ट ने माना कि ऐसा कोई प्रावधान अधिनियम में उल्लेखित नहीं है और सिर्फ प्रचार करने से कोई पद के दुरुपयोग के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। इसके बाद कोर्ट ने शासन के आदेश को निरस्त कर दिया

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