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गर्मी से पहले सूखे डेम: केलो डेम में जलभराव 60% पर जर्जर हैं नहरें; रबी की सिंचाई के लिए पानी की किल्लत, किंकारी में 3 और केदर डेम में 31% है भराव

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रायगढ़2 घंटे पहले

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केलो डेम में अभी भी 60 प्रतिशत पानी मौजूद है।

गर्मी की शुरुआत में ही जलाशय 30 प्रतिशत से अधिक सूख चुके हैं। केलो को छोड़ छोटे और मध्यम स्तर के जलाशय पूरी तरह सूख चुके हैं। इस दौरान किसानों को रबी की फसल के लिए सबसे ज्यादा पानी की आवश्यकता होती है। अभी जलाशयों में इतना पानी ही नहीं बचा है कि वे किसानों के लिए संभव हो सकें।

अप्रैल के पहले ही पखडिंग में डेम में जलभराव की स्थिति चिंताजनक है। केदर, पुता, किंके, खम्हर पाकूट जैसे जिले के चार मुख्य बांधों में अब 30 प्रतिशत से भी कम पानी रह गया है। केलो डेम की स्थिति अन्य जलाशयों से बेहतर है, यहां 60 प्रतिशत से अधिक जल शेष है। सबसे ज्यादा खराब स्थिति तो 135 माइनर पैचबों की है, जो पूरी तरह से सूख चुके हैं। विभाग ने इसे सूखा घोषित कर दिया है। यह हाल की गर्मी की शुरुआत है। शहर व गांव के तालाब भी सूख चुके हैं। पेयजल व सूखे तालाबों को भरने का इकलौता विकल्प बांध है।

ग्रामीण कर रहे पानी के लिए फरियाद
बैंड के गेट बंद हैं। महानदी और मांड सहित केलो नदी सूख गई है। कई गांवों के लोगों की निस्तारी बांध के पानी से होती है। कुछ दिन पहले ही जलसंग्रह के दफ्तर में किंकारी क्षेत्र के लोगों ने नहर में पानी छोड़ने की मांग की थी लेकिन जलाशय में पानी 3% शेष है।

नहरों की लाइनिंग टूटी खेतों तक नहीं पहुंचता पानी
1 लाख 79 हजार 475 एकड़ खेती की जमीनों में उसी जगह से पानी मिलता है। जिले में रबी फसल के लिए 2 लाख 23 हजार एकड़ क्षेत्र में भूमि है। लेकिन समय से पहले सूख जाने की वजह से जलाशयों में इतना पानी नहीं है कि उन्हें नहर के जरिए खेतों तक पहुंचाया जा सके।

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