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कलेक्टर ने जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई के निर्देश दिए: 4 महीने बाद भी गोबर का पैसा नहीं मिला।

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रायगढ़38 मिनट पहले

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गोधन न्याय योजना के तहत गोबर बेचने के चार महीने बाद भी गो पालकों के खाने में राशि नहीं आने का मामला सामने आया है। तीन विभागों में आपस में सामंजस्य नहीं होने के कारण ऐसी स्थिति बनी रही। कलेक्टर ने जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। गोबर बेचने के बाद लाभार्थी के खाने में रुपए ट्रांसफर होते हैं, दिसंबर तक इसके सुविधाजनक काम जनपद पंचायत स्तर पर हो रहे थे।

इसके बाद की देखभाल और किसानों के पैसों के हस्तांतरण कार्य कृषि विभाग को दिया गया। जपं की देखरेख के दौरान 7 गौठनों में 150 से ज्यादा गोबर बेचने वाले किसानों के खाते में सात लाख 35 हजार रुपए जाने थे। रायगढ़ के ननसिया, लेबड़ा, सहसपानी, बरलिया और लैल करेंगे के सोनाजोरी और पाकरगाँव के किसानों के खातों में नहीं गए। बैंक प्रबंधन और जपं स्तर पर जो बजट मिला, खातों में एक सामान रूप से पैसे का हस्तांतरण नहीं किया गया। कुछ राशि गौठानों समितियों के खातों में भी जाने वाले की बात सामने आई है, इंडेक्स बैंक अफसरों ने भी इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं की है। 7.35 लाख में 4.12 लाख रुपये एक- दो दिन में किसानों के खाते में डलवा दिए गए। अभी 3.23 लाख रुपए ट्रांसफर नहीं हो पाए हैं। सहकारिता विभाग के उप पंजीयक सुरेन्द्र गौड़ ने बताया कि जनपद और बैंक स्तर पर सतर्कता में कुछ कमी रह गई है।]

जिम्मेदार अफसरों ने ध्यान नहीं दिया
लिंक्स बैंक के विशेष कर्म अधिकारी और सहकारिता विभाग के उप पंजीयक ने सूचित नहीं किया। कलेक्टर भीम सिंह ने भी इन दोनों अफसरों पर कार्रवाई की अनुशंसा करते हुए शासन को पत्र भेजने की बात कही है। मामला मंगलवार को कलेक्टर समय सीमा बैठक में उठा था।

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