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आपदा को बनाया अवसर: दुर्ग के प्रोफेसर ने कोरोनावायरस पर लिखी 7 किताबें, गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ नाम

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भिलाई15 घंटे पहले

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प्रोफेसर शिवानंद कामड़े ने कोरोनावायरस पर सात किताब लिखकर अपना नाम गोल्डन बुक आफ वर्ल्ड रिकॉर्ड और इंडिया बुक आफ रिकॉर्ड में दर्ज करा लिया है।

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के पॉलीटेक्निक में प्रोफेसर शिवानंद कामड़े ने कोरोनावायरस पर सात किताबों को लिखकर अपना नाम गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड और भारत बुक आफ रिकॉर्ड में दर्ज करा लिया है। कोरोना काल में लॉकडाउन के दौरान जब पूरी दुनिया बंद थी। तो उस समय प्रोफेसर काम की किताबें लिख रहे थे। इन किताबों को लिखने में लगभग 8 महीने का समय लगा।

कोरोनायर की किताबों में आखिर क्या है

दुर्ग के रहने वाले प्रोफेसर शिवानंद कामड़े अब तक 88 से ज्यादा किताबें लिख चुके हैं। कोरोना महामारी पर आधारित कोरोना आपदा प्रबंधन की पुस्तक लिखकर कोरोनावायरस संक्रमण के बारे में लोगों को जानकारी दे रहे हैं। कोरोनावायरस बीमारी क्या हैं। यह एक से दूसरे लोगों तक किस तरह फैलता है। इसके क्या लक्षण हैं। इस बीमारी से बचने के लिए किस तरह का इलाज और परहेज लोगों को करना चाहिए। इसकी पूरी जानकारी इस किताबों में दी गई हैं।

किताबों में और क्या खास है

कोरोनावायरस की किताब में बताया गया है कि यह बीमारी जहरीले जीव-जंतुओं को मारकर खाने वाले लोगों में फैली है। सबसे पहले चीन में इसका जन्म हुआ। और जो भी व्यक्ति में कीटाणु पाया गया है। उसके संपर्क में आने वाले लोगों से होते हुए इसके संक्रमण पूरे विश्व में फैलता चला गया है। प्रोफेसर शिवानंद का कहना है कि कोरोना पर सात पुस्तकें अब तक लिखी जा चुकी हैं। साथ ही पुस्तक में महा रिफाम का भी विशेष जिक्र किया है। इससे किस तरह से उपयोग किया जाए। जिससे आसानी से कोरोना पर विजय पाया जा सकता है। में उसने कोरोना पर 100 गजल और 100 कार्टून के साथ सेफ़शूल और कोरोना फोटो पत्रकारिता पर भी लिखा है।

  • कोरोना एक वैश्विक महामारी
  • कोरोना टिंकट
  • कोरोना फोटो पत्रकारिता
  • कोरोना शब्दावली
  • कोरोना कैप्सूल
  • कोरोना आपदा प्रबंधन
  • कोरोना पर 100 गजल का संग्रह
प्रोफेसर शिवानंद कामोद द्दिद लिखित कोरोनावायरस की सात पुस्तकें

प्रोफेसर शिवानंद कामोद द्दिद लिखित कोरोनावायरस की सात पुस्तकें

कोरोना पर गजल संग्रह

प्रोफ वर्कोड बताते हैं कि गजल का नाम आता है, तो प्रेमी-प्रेमिका की याद आती है। लेकिन, कोरोनावायरस को सामने रखकर 100 गजलें लिखी हैं। गजल एक बहुत ही संवेदनशील पक्ष की ओर जाता है। कोरोना की वजह से जो मानवीय संवेदनाएं लोगों के सामने जो मरती हुई नजर आई। इतनी मौतें लोगों ने देखी की उनकी आंख की आंसू तक खत्म हो गई।

प्रोफेसर को अब तक मिल चुके हैं

प्रोफेसर शिवानंद कामड़े ने बताया कि अब तक चार राष्ट्रीय डिग्री मिल चुके हैं। उन्होंने विदेशों में भी गांधी जी पर प्रदर्शनी लगाई है। और गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड से मेल आया कि आपका वर्क यूनिक है। और निश्चित रूप से यह सराहनीय है। किसी ने भी कोरोना पर सात किताबें नहीं लिखी थीं। इसलिए इन किताबों को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल किया गया। इसी संबंध में भारत ऑफ रिकॉर्ड भी दर्ज है, जो भारत की संस्था है।

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