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थाने पहुंचे आदेश का फर्जीवाड़ा: छत्तीसगढ़ में अवर सचिव के नाम पर फर्जी आदेश हटाकर शिक्षकों-क्लर्क का तबादला कर दिया, राखी थाने में एफआईआर

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रायपुर4 घंटे पहले

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मंत्रालय के कई विभागों के नाम से जब-तब ऐसे फर्जी आदेश जारी होते रहते हैं। इनकी वजह से कर्मचारियों से उगाही और ठगी भी होती रही है।

  • स्कूल शिक्षा विभाग के नाम पर जारी हुआ फर्जी आदेश
  • मंत्रालय के फर्जी आदेश का इस साल का यह पहला मामला है

प्रदेश में तबादलों का मौसम नजदीक आते हैं, फर्जी स्थानांतरण आदेश भी जारी होने लगे हैं। इस साल का पहला मामला स्कूल शिक्षा विभाग का सामने आया है। इसमें किसी ने विभाग के अवर सचिव जनक कुमार के नाम से 21 व्याख्याताओं, शिक्षकों व एक क्लर्क का तबादला कर दिया। अवर सचिव ने मंगलवार को नवा रायपुर के राखी थाने में इसकी लिखित में शिकायत की है।

अवर सचिव जनक कुमार ने पुलिस को बताया, किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनके नाम से 30 मार्च को एक स्थानांतरण आदेश जारी किया। इसमें स्पष्टता, शिक्षक एलबी और सहायक ग्रेड दो के नाम शामिल हैं। इस आदेश में उनके पदनाम के ऊपर किसी ने जारी किए गए हस्ताक्षर किए हैं। यह हस्ताक्षर न तो उनके द्वारा किए गए हैं और ना ही ऐसे कोई नस्ती विभाग में प्रचलन में है। यह पूरी तरह से फर्जी है। कुमार के निवेदन पर पुलिस ने अपराध दर्ज कर लिया है। मालूम हो कि इस फर्जी आदेश में बस्तर के शिक्षा और महिला शिक्षक ज्यादा हैं। उन्हें बालोद, रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग आदि स्थानों पर भेजा गया है। दिलचस्प यह है कि फर्जी अधिकारी ने सुदूर सुकमा व कोंटा से लेकर सूरजपुर तक के शिक्षकों के तबादले कर दिए। इन मैदानी क्षेत्रों के शिक्षकों के नाम भी शामिल हैं। बताते हैं कि शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ। आलोक शुक्ला के संज्ञान में मामला लाने के बाद केस पुलिस को सौंपा गया।

स्कूल शिक्षा विभाग के अवर सचिव जनक कुमार ने राखी थाने में यह शिकायत सौंपी है।

स्कूल शिक्षा विभाग के अवर सचिव जनक कुमार ने राखी थाने में यह शिकायत सौंपी है।

पहले भी आते रहे हैं ऐसे फर्जी आदेश

मंत्रालय व सरकारी संस्थाओं से राज्य बनने के बाद से ही फर्जी आदेश जारी होते रहे हैं। ये शिक्षा विभाग, वन विभाग और सामान्य प्रशासन विभाग आदि प्रमुख विभाग हैं। पिछले साल शिक्षा विभाग से जाली आदेश जारी होने के बाद बिलासपुर जिले में प्राचार्य को संयुक्त संचालक ने रिलीव तक कर दिया था। इस मामले की जांच के आदेश हुए थे, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ है। एक अधिकारी भी वहां जांच अधिकारी बनाकर भेजा गया था। संयुक्त संचालक ने इस मामले में गोलमोल जवाब फाइल किया था। कुछ वर्षों पहले जांजगीर जिले में स्थानांतरण को लेकर दो प्राचार्यों में ठन गई। जिसका तबादला हुआ उसके पास कोई आदेश नहीं था। वह जाने के लिए तैयार नहीं थे। वह स्कूल में प्राचार्य कक्ष के दरवाजे पर हिरी लगाता था। बालोद जिले में तो दो DFO भी तबादले को लेकर कोर्ट तक चले गए थे।

असली-नकली आदेशों में बना रहता है भ्रम है

वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि कंप्यूटराइजेशन के जमाने में जब सारा काम ऑनलाइन हो रहा है। मंत्रालय में उनकी निगरानी का कोई तंत्र नहीं हैं। कोई आदेश या सर्कुलर आधिकारिक तौर पर जारी होने से पहले लोगों तक पहुंच जाता है। ज्यादातर विभाग भी सर्कुलर को अपने पोर्टल पर जारी नहीं करते। नकली आदेश जारी कर वायरल करने वाले इसी का फायदा उठाते हैं। जब तक विभाग के संज्ञान में मामला आया यह नकली सर्कुलर बड़ा नुकसान कर चुके हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सभी गैर-कानूनी आदेशों और पत्राचारों को आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक किए बिना फर्जी ग्रेड पर लगाम नहीं लगे हैं।

अब सतर्क रहने की जरूरत है

जानकारों का कहना है कि सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों को सतर्क रहने की जरूरत है। स्थानांतरण से प्रतिबंध हटने वाला है। मंत्रालय से लेकर, दूसरों के बंगलों व दफ्तरों में तबादला कराने का दम भरने वाले दलाल घूमने लगे हैं। नौकरी पाने के नाम पर भी फर्जी आदेश हटाकर बेरोजगारों को ठगा जा रहा है। हाइटेक युग होने की वजह से तारीख, हस्ताक्षर व कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को विलोपित कर ठगी करने वाले जाली आदेश जारी कर देते हैं।) जब तक इसका सत्य पता लगता है तब तक वे गायब हो जाते हैं।

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