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साहित्यकार मुकुंद कौशल का निधन: 75 साल की उम्र में ली अंतिम सांस, रविवार की शाम आया था हार्ट अटैक

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दुर्ग42 मिनट पहले

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दुर्ग के साहित्यकार और संगीतकारकार मुकुंद कौशल का निधन हो गया है। छत्तीसगढ़ी में पहला गजल लेखन का श्रेय मुकुंद कौशल को जाता है।

छत्तीसगढ़ ने बड़े साहित्यकार और संगीतकारकार को खो दिया। दुर्ग के रहने वाले मुकुंद कौशल का निधन हो गया है। रविवार शाम 5 बजे उन्हें हार्ट अटैक आया था। जिसके बाद वे दुनिया से अलविदा कह गए। राष्ट्रीय स्तर के कवि, रचनाकार व गजलकार रहे मुकुंद कौशल ने छतीसगढ़ी भाषा को अपनी सार्थक रचना के माध्यम से देश, दुनिया में पहचान दिलाई।

अलविदा साहित्यकार मुकुंद कौशल
छत्तीसगढ़ी में पहली बार मुकुंद कौशल ने ही गजल लिखी थी। वे यही नहीं हैं। कन्नड़, गुजराती सहित कई भाषाओं में मुकुंद ने गजल, कविता और गीत लिखे हैं। वे दुर्ग जिला हिंदी साहित्य समिति के अध्यक्ष भी रहे। साक्षारता मिशन में उनका बड़ा योगदान था। उनके द्वारा लिखित गीत साक्षारता मिशन में सुनाए जाते हैं। सोमवार सुबह मुकुंद कौशल की अंतिम यात्रा उनके निवास स्थान पद्यनाभपुर से निकली और अंतिम संस्कार हरनाबांधा मुक्तिधाम में की गई।

मुकुंद कौशल का अंतिम संस्कार दुर्ग के हरनाबांधा मुक्तिधाम में किया गया।

मुकुंद कौशल का अंतिम संस्कार दुर्ग के हरनाबांधा मुक्तिधाम में किया गया।

याद कर रहे हैं
वरिष्ठ कांग्रेस नेता ज्ञानचंद जैन ने कहा कि मुझे आदरणीय मुकुंद कौशल के साथ साक्षारता समिति दुर्ग में लंबे समय तक कार्य करने का अवसर मिला। जब जिले का प्रशिक्षणदाताओं मेरे पास रहा और कौशल जी को हम लोग साक्षरता समिति में प्रशिक्षण प्राप्त करने के जिले के दौरे में तत्कालीन जिलाधिकारियों वर्तमान रेरा के अध्यक्ष विवेक ढांढ साहब के कार्यकाल में जा रहे थे। कला परंपरा के संस्करण व साहित्यकार डॉ। डीपी देशमुख ने कहा कि उनका जाना बड़ा दुखद है। छत्तीसगढ़ी के साथ-साथ हिंदी भाषा में उनका अधिकार था। कैसेट्स की दुनिया में उन्होंने राज किया। उनके गाने गजब के होते थे। उनका जाना मेरी व्यक्तिगत क्षति है।

मुकुंद कौशल को कई सम्मान मिले

सृजन श्री अलंकरण, समाज की गौरव सम्मान, साक्षरता सम्मान, अहिंदी भाषी हिंदी सम्मान, लोककला सम्मान, मुश्फिक पुरस्कार, मुकीम भारती सम्मान, साहित्य गौरव, भारत गौरव, डॉ। नरेंद्र देव वर्मा सम्मान, अंबिका प्रसाद दिव्य अलंकरण, भुइयां सम्मान, परिधि सम्मान, कथाकार सम्मान सहित और लगभग 30 से भी अधिक सम्मानों, अलंकरणों और प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुए।

मुकुंद कौशल की गजलें

लालटेन जलने दो, शब्दक्रान्ति, रचनाओं का चंदनवन, देश हमारा भारत, चिराग गजलों के, जमीं कपड़े बदलने चाहती है, भिनार, हमर भुईयां हमर अगास, मैया के मुंदरी, केवरस, सिर पर धूप-आंख में सपने के अलावा 6 छत्तीसगढ़ी गजल संग्रह भी मुकुंद ने लिखी थी।

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